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रतन टाटा का खत, लिखा- जरूरी हो गया था मिस्त्री को हटाना

Tue, 01 Nov 2016 09:06 PM IST
एजेंसी/ मुंबई
एजेंसी/ मुंबई Updated Tue, 01 Nov 2016 09:06 PM IST
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Mistry was necessary to remove: Ratan Tata
ratan tata

टाटा सन्स के बर्खास्त चेयरमैन सायरस मिस्त्री के लगातार हमलों के जवाब में अब अंतरिम चेयरमैन रतन टाटा ने भी मोर्चा संभाल लिया है। मिस्त्री की बर्खास्तगी के बाद टाटा सन्स के कर्मचारियों को जारी दूसरे संदेश में रतन टाटा ने कहा है कि समूह की आगे की कामयाबी के लिए मिस्त्री को हटाना बिल्कुल जरूरी हो गया था। अंतरिम चेयरमैन रतन टाटा ने 100 अरब डॉलर वाले टाटा समूह के कर्मचारियों को जारी संदेश में कहा है कि टाटा सन्स के नेतृत्व में बदलाव का फैसला काफी सोच-विचार कर लिया गया है। बोर्ड सदस्यों के लिए यह काफी गंभीर फैसला है।

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यह मुश्किल फैसला बेहद सावधानी और अच्छी तरह सोच कर लिया गया है। टाटा समूह की भविष्य की सफलता के लिए यह बिल्कुल जरूरी फैसला था। रतन टाटा की यह चिट्ठी मिस्त्री के उस बयान के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उन पर टाटा डोकोमो विवाद को समूह की संस्कृति और मूल्यों के मुताबिक हैंडिल न करने का गलत आरोप लगाया जा रहा है। मिस्त्री ने कहा है जापान की कंपनी एनटीटी डोकोमो और टाटा के संयुक्त उपक्रम से जुड़े हर फैसले में रतन टाटा शामिल रहे हैं।
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गौरतलब है कि चार वर्ष पहले रिटायर हो चुके 78 वर्षीय रतन टाटा ने टाटा समूह के अंतरिम चेयरमैन का पद फिर यह कहते हुए संभाल लिया था कि उनका लौैटना समूह की स्थिरता और लीडरशिप की निरंतरता के लिए जरूरी है। रतन टाटा का कहना है कि पूर्णकालिक चेयरमैन की नियुक्ति से समूह दोबारा वर्ल्ड क्लास लीडर बन कर उभरेगा।

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क्या है टाटा डोकोमो विवाद

Mistry was necessary to remove: Ratan Tata

टाटा-डोकोमो विवाद में मुझ पर लगाया आरोप गलत : मिस्त्री
टाटा सन्स के बर्खास्त चेयरमैन सायरस मिस्त्री ने एनटीटी डोकोमो के साथ समूह के विवाद में लगे आरोपों क ा जोरदार खंडन किया है और कहा है कि  इस साझा उपक्रम से जुड़े फैसलों में रतन टाटा शामिल रहे थे। मिस्त्री ने कहा है कि यह कहना गलत है कि टाटा डोकोमो विवाद में उन्होंने टाटा सन्स की संस्कृति और मूल्यों के मुताबिक फैसला नहीं लिया। लेकिन टाटा सन्स की ओर से मिस्त्री के इस बयान को खारिज कर दिया गया है और कहा गया है कि पता नहीं वह किन काल्पनिक आरोपों का हवाला दे रहे हैं। 

क्या है टाटा डोकोमो विवाद
नवंबर, 2009 में जापानी कंपनी एनटीटी डोकोमो ने टाटा टेलीसर्विसेज की 26.5 फीसदी हिस्सेदारी 12,740 करोड़ रुपये में खरीद ली थी। सौदे के मुताबिक अगर पांच साल के भीतर डोकोमो इस साझा उपक्रम से अलग होती है तो उसे निवेश की आधी रकम मिल जाएगी। लेकिन जब डोकोमो के निकलने की बारी आई तो आरबीआई ने कहा 50 फीसदी रकम वापस करने का विकल्प मान्य नहीं होगा और रकम उचित बाजार मूल्य के आधार पर मिलेगी। बाद में आरबीआई मान गया लेकिन वित्त मंत्रालय न शर्त में छूट की मांग नामंजूर कर दी। इसे आधार बना कर टाटा ने डोकोमो को रकम देने से इनकार कर दिया।

डोकोमो इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालत में चली गई, जहां उसने टाटा के खिलाफ 1.17 अरब डॉलर का मुकदमा जीत लिया। लेकिन टाटा ने कहा कि स्थानीय नियमों के मुताबिक हर्जाना नहीं दिया जा सकता है। अब डोकोमो ने टाटा के इस रुख के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया है।

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