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जल शक्ति मंत्रालय: पर्यावरणीय प्रवाह के बिना नहाने लायक नहीं बन सकती यमुना 

Tue, 27 Jul 2021 02:26 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Tue, 27 Jul 2021 02:26 AM IST
सार

  • 35 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में से 22 संयंत्र ऐसे हैं, जो डीपीसीसी के मानक के अनुरूप नहीं
  • दिल्ली सरकार ने जल शक्ति को रिपोर्ट में दी जानकारी

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Ministry of Jal Shakti: Yamuna cannot become bathable without environmental flow
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली सरकार ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में कहा है कि यमुना नदी में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह की कमी के कारण यह नहाने लायक नहीं बन सकती। दिल्ली सरकार ने कहा है कि दिल्ली में 35 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं। इनमें से 22 संयंत्र ऐसे हैं, जो दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के मानक के अनुरूप नहीं हैं।

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दिल्ली सरकार ने जल शक्ति को रिपोर्ट में दी जानकारी
रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली के औद्योगिक इलाकों में 13 शोधन संयंत्र हैं, इनमें से केवल छह डीपीसीसी के मानकों को पूरा करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यमुना को नहाने लायक बनाने के लिए इसमें प्रदूषकों के घुलने के लिए न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह 3 मिलीग्राम प्रति लिटर और 5 मिलीग्राम प्रति लिटर के दो मानक हैं।
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इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के अनुसार पर्यावरणीय प्रवाह किसी नदी, नम क्षेत्र या तटीय इलाकों में जल की वह मात्रा होती है जो उसके इको सिस्टम और उसके लाभ को बनाए रखने के लिए जरूरी होता है।
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23 क्यूबिकमीटर प्रति सेकेंड पानी की जरूरत
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलोजी, रुड़की के एक अध्ययन में कहा गया है कि जल की 23 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड मात्रा हरियाणा के हथनी कुंड बैराज से यमुना में छोड़ा जाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि वजीराबाद से ओखला के 22 किलोमीटर के हिस्से, जो दो फीसदी से भी कम है, में कुल प्रदूषण की 80 फीसदी मात्रा शामिल होती है। शहर में शाहदरा, नजफगढ़ और बारापूला समेत 18 बड़े नाले हैं, जिनका पानी यमुना में गिरता है।


यमुना में आठ स्थानों से लिए गए पानी के नमूनों में केवल पल्ला और वजीराबाद के नमूने मानकों के अनुरूप मिले हैं। जानकारों के अनुसार गैरशोधित गंदा पानी और सीईटीपी से निकलने वाले अपशिष्ट यमुना में प्रदूषण का मुख्य कारण हैं। दिल्ली सरकार ने यमुना में प्रदूषण को रोकने के लिए बीआईएस मानकों को पूरा न करने वाले साबुन एवं डिटर्जेंट की बिक्री, भंडारण आदि पर जून में रोक लगा दी थी।

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