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Ministry of Finance: वित्त मंत्रालय ने किया आगाह- खरीफ फसलों की बुवाई हुई कम, बाजार मूल्यों का प्रबंधन जरूरी

Sun, 18 Sep 2022 03:24 AM IST
निर्मल कांत एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 18 Sep 2022 03:24 AM IST
सार

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सतत वृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लगातार व्यापक आर्थिक सतर्कता की जरूरत है। आगामी सर्दियों के मद्देनजर ऊर्जा सुरक्षा पर विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बढ़ते ध्यान से भू-राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है।

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Ministry of Finance said sowing of Kharif crops is less management of market prices is necessary
खरीफ फसल

विस्तार

वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट में खरीफ सीजन के लिए कम फसल बुवाई को देखते हुए कृषि जिंसों के स्टॉक के कुशल प्रबंधन की बात कही गई है। साथ ही इसमें कहा गया है कि मुद्रास्फीति के मोर्चे पर आत्मसंतोष की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

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वित्त मंत्रालय द्वारा जारी मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर, भारत में मुद्रास्फीति का दबाव सरकार की चुस्त मौद्रिक नीति, अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी की कीमतों में ढील और आपूर्ति शृंखला बाधाओं को दूर करने के लिए प्रशासनिक उपायों में कमी के तौर पर दिखाई देता है।
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हालांकि इसमें कहा गया है कि मुद्रास्फीति के मोर्चे पर आत्मसंतुष्टि की कोई जगह नहीं होनी चाहिए क्योंकि खरीफ सीजन के लिए कम फसल बुवाई हुई है। इसके चलते कृषि जिंसों के स्टॉक और कृषि निर्यात को अनावश्यक रूप से संकट में डाले बिना बाजार मूल्यों के कुशल प्रबंधन की आवश्यकता है।
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खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि इस साल खरीफ सीजन के दौरान धान के बुवाई क्षेत्र में गिरावट के कारण भारत का चावल उत्पादन 10-12 मिलियन टन तक कम रह सकता है। खरीफ सीजन का देश के कुल चावल उत्पादन में करीब 80 फीसदी योगदान होता है।

झारखंड (9.80 लाख हेक्टेयर), मध्य प्रदेश (6.32 लाख हेक्टेयर), पश्चिम बंगाल (4.45 लाख हेक्टेयर), छत्तीसगढ़ (3.91 लाख हेक्टेयर), उत्तर प्रदेश (2.61 लाख हेक्टेयर) और बिहार (2.18 लाख हेक्टेयर) में धान बुवाई में काफी कमी रही। धान खरीफ की मुख्य फसल है और इसकी बुवाई जून से दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत से होती है और अक्तूबर से कटाई शुरू होती है।

सतत विकास सुनिश्चित करने को आर्थिक सतर्कता जरूरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सतत वृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लगातार व्यापक आर्थिक सतर्कता की जरूरत है। 

इसमें आगाह किया गया कि आगामी सर्दियों के मद्देनजर ऊर्जा सुरक्षा पर विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बढ़ते ध्यान से भू-राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। इस दौरान अपनी ऊर्जा जरूरतों को संभालने के लिए भारत को चतुराई से काम लेना होगा। भारत अपनी जरूरत का 85.5 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है और इसलिए वैश्विक बाजार में ऊंची कीमतों का घरेलू मुद्रास्फीति पर बड़ा असर पड़ता है। 

रिपोर्ट के अनुसार, अनिश्चितता से भरे इस वक्त में, संतुष्ट रहना और लंबे समय तक हाथ पर हाथ रखकर बैठना संभव नहीं हो सकता। स्थिरता और स्थायी वृद्धि के लिए लगातार व्यापक आर्थिक सतर्कता जरूरी है। ऐसे समय में जब धीमी वृद्धि और उच्च मुद्रास्फीति दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर रही है, भारत की वृद्धि मजबूत रही है और मुद्रास्फीति नियंत्रण में रही है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की वृद्धि आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सतर्क और विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन और विश्वसनीय मौद्रिक नीति जरूरी है।


पांचवां सबसे ज्यादा एफडीआई पाने वाला देश बना भारत
भारत ने दुनिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए आकर्षक देश का दर्जा बरकरार रखा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत एफडीआई पाने वाले शीर्ष पांच देशों में शुमार रहा। शनिवार को जारी हुई वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक रिपोर्ट में कहा गया है, कारोबारी सुगमता में सुधार, सकारात्मक वृद्धि दर अनुमान के साथ सरकार की नीतियों के कारण भारत आकर्षक व्यापार गंतव्य बना है और विकसित और विकासशील देशों की फेहरिस्त में पांचवां सबसे बड़ा एफडीआई प्राप्तकर्ता रहा।

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