भारत-चीन के बीच स्थापित होगी सैन्य हॉटलाइन
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भारत और चीन के बीच जल्द ही सैन्य हॉटलाइन सेवा शुरू होगी। यह हॉटलाइन सैन्य ऑपरेशनल महानिदेशालय (डीजीएमओ) के स्तर पर स्थापित की जाएगी। दोनों देशों के बीच बनी इस सहमति को काफी अहम माना जा रहा है। चीन दौरे से लौटने के बाद नौसेना की कमांडर कांफ्रेंस को संबोधित करने आए रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने यह जानकारी दी।
रक्षा मंत्री परिकर पांच दिन की जब चीन यात्रा पर थे, तभी दोनों देशों के सैन्य मुख्यालयों के बीच हॉटलाइन स्थापित करने के लिए यह सहमति बनी थी। इससे सीमा विवाद के प्रबंधन के साथ-साथ आपसी विश्वास को मजबूती देने में काफी मदद मिलेगी।
भारत और चीन के सैन्य मुख्यालय सीमा पर घुसपैठ अथवा किसी भी विवाद की स्थिति में एक दूसरे से संपर्क करके अपना पक्ष रख सकेंगे तथा समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
हॉटलाइन स्थापित करने का यह सुझाव भारत की तरफ से था। रक्षा मंत्रालय सूत्रों के अनुसार इसको लेकर दोनों देशों के बीच इसे स्थापित करने के मसौदे का आदान-प्रदान हो चुका है। इसके लिए दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों में भी सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है जल्द ही यह सेवा आरंभ हो जाएगी।
आतंकवादियों में कोई भेदभाव नहीं: परिकर
परिकर ने बताया कि भारत ने चीन से साफ शब्दों में कहा है कि आतंकवादियों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘मैंने चीन से साफ तौर पर कहा कि आतंकवादियों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता। सभी आतंकवादी एकसमान हैं और उनसे एक ही सिद्धांत से निपटा जाना चाहिए।’
क्या है हॉटलाइन
पिछले साल अगस्त में भारत ने चीन के सामने हॉटलाइन स्थापित करने को लेकर प्रस्ताव रखा था। हॉटलाइन का आशय एक ऐसी दूरसंचार प्रणाली से है, जिसमें कोई नंबर डॉयल करने की जरूरत नहीं होती। एक तरफ से रिसीवर उठाने के बाद दूसरी तरफ बीप बजती है और रिसीवर न रखे जाने तक संवाद प्रक्रिया जारी रहती है। यह प्वाइंट-टू-प्वाइंट कम्युनिकेशन की व्यवस्था है।
सीमा विवाद प्रबंधन में जरूरी
भारत और चीन की सीमा स्पष्ट नहीं है। अरुणाचल से लेकर लेह-लद्दाख तक सीमा विवाद की स्थिति है। ऐसे में कभी चीन के सैनिक भारत के दावे वाले क्षेत्र में चले आते हैं तो कभी भारत के सैनिक चीन के क्षेत्र में।
साल भर में इस तरह की कई बार घुसपैठ हो जाती है। वहीं चीन भारत के 90 हजार वर्ग किमी क्षेत्र पर अपना दावा जताता है तो भारत का मानना है कि अक्साई चिन समेत उसका 38 हजार वर्ग किमी का क्षेत्र चीन के कब्जे में है। दोनों पक्षों का मानना है कि इससे सीमा पर यथास्थिति बनाये रखने और सीमा विवाद प्रबंधन में काफी मदद मिलेगी।
मसूद मुद्दे पर चीन से हुई बात: डोभाल
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा है कि चीन से सीमा विवाद के मुद्दे के अलावा पठानकोट हमले के गुनहगार मसूद अजहर पर भी बातचीत हुई। चीन के दौरे पर गए डोभाल ने चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग से बातचीत के दौरान आतंकवाद और सीमा विवाद के कई मुद्दों पर बातचीत हुई।
इस दौरान ली ने रक्षा मंत्री मनोहर परिकर से दो दिन पहले हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। डोभाल ने बताया कि आतंकवाद निरोधी मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी दौरान मसूद के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। गौरतलब है कि हाल ही में भारत ने मसूद पर प्रतिबंध के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति के समक्ष एक प्रस्ताव रखा था। जिसका चीन ने विरोध किया था।