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MHA Report: 2021 में देश की आंतरिक सुरक्षा पूरे नियंत्रण में रही, गृह मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट में खुलासा
Tue, 08 Nov 2022 05:41 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 08 Nov 2022 05:41 AM IST
सार
रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा के मोर्चे पर मुख्य ध्यान जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का मुकाबला करने, उत्तर पूर्वी राज्यों में सुरक्षा परिदृश्य में सुधार करने और वामपंथी उग्रवाद का मुकाबला करने व देश के भीतरी इलाकों में शांति बनाए रखने पर दिया गया।
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गृह मंत्रालय (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : ANI
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विस्तार
केंद्रीय गृहमंत्रालय की 2021-22 की सालाना रिपोर्ट में दावा किया है कि 2021 में देश की आंतरिक सुरक्षा की स्थिति नियंत्रण में रही। सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया कि देश में आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ रखना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।
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रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा के मोर्चे पर मुख्य ध्यान जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का मुकाबला करने, उत्तर पूर्वी राज्यों में सुरक्षा परिदृश्य में सुधार करने और वामपंथी उग्रवाद का मुकाबला करने व देश के भीतरी इलाकों में शांति बनाए रखने पर दिया गया। देश में आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों को मोटे तौर पर देश के भीतरी इलाकों में आतंकवाद, वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) या कुछ क्षेत्रों में नक्सल मुद्दे, उत्तर पूर्वी राज्यों में विद्रोह और जम्मू और कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद से जुड़े मुद्दों के रूप में देखा जा सकता है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने ‘खुफिया संग्रह के क्षेत्र में नियमित प्रशिक्षण, आतंकी घटनाओं की प्रतिक्रिया और जांच’ के माध्यम से राज्यों के पुलिस बलों की क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया क्योंकि वे किसी भी आतंकवादी घटना के पहले प्रतिक्रियाकर्ता हैं। इसके अलावा, आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त ‘आतंकवादी संगठनों’ या व्यक्तियों के नाम क्रमशः गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की पहली अनुसूची और चौथी अनुसूची में सूचीबद्ध किया गया। इसमें यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार ने अब तक 42 संगठनों को आतंकवादी संगठन और 31 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया है।
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आठ वर्ष में 55 फीसदी कम हुईं नक्सल हिंसा की वारदातें
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा, राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना के दृढ़ कार्यान्वयन से बीते आठ वर्षों में नक्सल हिंसा की वारदातों में 55 फीसदी की कमी आई है और इन घटनाओं में मरने वालों की संख्या 63 फीसदी कम हुई। गृहमंत्रालय की 2021-22 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में 2013 की तुलना में वामपंथी उग्रवाद की घटनाएं 1136 से 509 हो गईं और इन वारदातों में मरने वालों की संख्या क्रमश: 397 से घटकर 147 रह गईं। 2020 की तुलना में 2021 में हिंसक घटनाओं में 24 फीसदी (665 से 509) और मरने वालों की संख्या में 20 फीसदी (183 से 147) की कमी आई।
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले सात वर्षों में वामपंथी उग्रवाद की हिंसा के साथ-साथ इसके भौगोलिक प्रसार में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। 2011 में शुरू हुई गिरावट की प्रवृत्ति 2021 में भी जारी है। साथ ही सरकार के विकासात्मक प्रयासों और लोगों तक पहुंच बढ़ने से बड़ी संख्या में वामपंथी उग्रवादी हिंसा की राह छोड़कर मुख्यधार में लौटे हैं। बेहतर वामपंथी उग्रवाद परिदृश्य के कारण, पिछले तीन वर्षों में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की सूची को दो बार संशोधित किया गया। इन जिलों की संख्या अप्रैल 2018 में 90 और फिर जुलाई 2021 में 70 कर दी गई।
2021 में कहां कितनी घटनाएं व मौतें
| राज्य | घटनाएं | मौतें |
| छत्तीसगढ़ | 255 | 101 |
| झारखंड | 130 | 26 |
| ओडिशा | 32 | 3 |
| महाराष्ट्र | 31 | 6 |
| बिहार | 26 | 7 |
सुधार में सुरक्षा बलों की अहम भूमिका
रिपोर्ट के मुताबिक वामपंथी उग्रवाद परिदृश्य में समग्र सुधार का श्रेय वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में सुरक्षा बलों की अधिक उपस्थिति और बढ़ी हुई क्षमता को जाता है। उनकी बेहतर संचालन रणनीति और प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं की बेहतर निगरानी ने सुधार को रूप दिया। 2021 में आठ राज्यों में फैले 46 जिलों में 191 पुलिस थानों के तहत वामपंथी उग्रवाद की हिंसा की सूचना मिली जबकि 2013 में 10 राज्यों में फैले 76 जिलों के 330 पुलिस स्टेशनों में नक्सली हिंसा हुई। हिंसा के दायरे को काफी हद तक प्रतिबंधित कर दिया गया है और केवल 25 जिलों में वामपंथी उग्रवाद की 90 प्रतिशत हिंसा हुई है।
भाकपा (माओवादी) देश के वामपंथी उग्रवादी संगठनों में सबसे शक्तिशाली
रिपोर्ट के मुताबिक भाकपा (माओवादी) देश के विभिन्न वामपंथी उग्रवादी संगठनों में सबसे शक्तिशाली बना हुआ है। कुल वामपंथी उग्रवादी हिंसक घटनाओं में 90 प्रतिशत से अधिक और इनसे होने वाली 95 फीसदी मौतों के लिए वही जिम्मेदार है। रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ते उलटफेरों के बीच भाकपा (माओवादी) बिना किसी महत्वपूर्ण सफलता के अंतर-राज्यीय सीमाओं के साथ नए क्षेत्रों में विस्तार करने के प्रयास कर रही है।