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मेटावर्स: मेटा के नए वीआर ग्लासेज में आईमैक्स जैसा फिल्म अनुभव, हेडसेट से स्मार्ट ग्लास तक बदलता मेटावर्स

Fri, 25 Sep 2026 06:22 AM IST
संकल्प प्रकाश सिंह स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: संकल्प प्रकाश सिंह Updated Fri, 25 Sep 2026 06:22 AM IST
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सार
मेटावर्स अब सिर्फ वीआर हेडसेट तक सीमित नहीं है। मेटा के नए वीआर ग्लासेज इसे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी के करीब ला रहे हैं। 
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Metaverse: Meta’s New VR Glasses Offer IMAX-Like Movies, How VR And Smart Glasses Are Changing It
Metaverse - फोटो : AI Generated

विस्तार

मेटा ने कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क में अपने कनेक्ट इवेंट में स्मार्ट ग्लासेज और नए वर्चुअल रियलिटी डिवाइस पेश किए हैं। इस इवेंट में मेटा ने बिना कैमरे वाले रे-बन मेटा ऑडियो एआई ग्लासेस लॉन्च किए। इनमें कैमरा नहीं है, बल्कि माइक्रोफोन और स्पीकर दिए गए हैं। यानी इन्हें पहनकर म्यूजिक सुनने, कॉल करने और मेटा एआई से बातचीत करने जैसे काम आसानी से किए जा सकते हैं।



इसके अलावा रे-बन मेटा जेन 3 भी पेश किए गए हैं। इनमें कैमरा मौजूद है और कंपनी ने बेहतर बैटरी लाइफ के साथ Dolby Atmos ऑडियो सपोर्ट दिया है। यानी ये ग्लासेज फोटो और वीडियो बनाने के साथ ज्यादा इमर्सिव ऑडियो का अनुभव देने पर केंद्रित हैं। इन सब के अलावा मेटा ने करीब 100 ग्राम वजन वाले नए वीआर ग्लासेज की झलक दिखाई है। खास बात ये है कि इसका डिजाइन पारंपरिक भारी वीआर हेडसेट की तुलना में चश्मे जैसा है।


प्रोसेसर और बैटरी को एक अलग छोटे डिवाइस में रखा गया है। इसमें 5K डिस्प्ले है और इसे कंप्यूटर या Mac से जोड़कर एक साथ कई वर्चुअल स्क्रीन पर काम किया जा सकता है। इस चश्मे में आप आईमैक्स स्टाइल में 3D सिनेमा देख सकते हैं। 

मेटा के मुताबिक यह नया सिस्टम उसके क्वेस्ट हेडसेट से करीब पांच गुना हल्का है। इसमें micro-OLED स्क्रीन दी गई है, जो 5K रिजॉल्यूशन वाली इंफानाइट डिस्प्ले देती है। इसे क्वालकॉम के स्नैपड्रैगन रियालिटी इलीट प्रोसेसर से पावर मिलती है। इसके साथ मिलने वाला छोटा पक-डिवाइस लगातार करीब 3 घंटे तक हाई-रिजॉल्यूशन वीडियो या अन्य मीडिया चला सकता है। इसमें 45W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी दिया गया है।

दिलचस्प बात ये है कि इन डिवाइस की असली कहानी सिर्फ हार्डवेयर तक सीमित नहीं है। ये नए डिवाइस मेटावर्स की दिशा में मेटा की बदलती रणनीति का संकेत देते हुए दिखाई दे रहे हैं। पहले के वीआर हेडसेट्स वजन में भारी होते थे, जिन्हें 1-2 घंटे से ज्यादा पहनने पर सिर या गर्दन में दर्द होने लगता था।मेटा ने इन वीआर ग्लासेज के जरिए इस समस्या को खत्म करने की कोशिश कर रहा है। मेटा के 100 ग्राम वजनी वीआर ग्लासेज की कीमत करीब 1.24 लाख रुपये है। 

मेटावर्स को शुरुआत में मुख्य रूप से वीआर हेडसेट से जोड़कर देखा जाता था। हालांकि, अब मेटा के ये स्मार्ट ग्लासेज मेटावर्स की दुनिया में एक बड़ा बदलाव लेकर आ रहे हैं। वीआर हैडसेट की तुलना में इन स्मार्ट ग्लैसेज का इस्तेमाल करना ज्यादा आसान और सुविधाजनक है। यही वजह है कि मेटा के नए ग्लासेज केवल स्मार्ट डिवाइस नहीं बल्कि एआई, अगमेंटेड रियालिटी और भविष्य के मेटावर्स के बीच एक संभावित कदम के रूप में देखे जा रहे हैं।  

मेटावर्स क्या है?

मेटावर्स को आसान भाषा में इंटरनेट की एक ऐसी अगली दुनिया समझ सकते हैं, जहां लोग सिर्फ स्क्रीन पर चीजों को देखने तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि वे एक डिजिटल दुनिया के अंदर मौजूद होने जैसा अनुभव कर सकेंगे। यहां आपका एक डिजिटल अवतार होगा, जिससे आप दूसरे लोगों से मिल सकते हैं, बातचीत कर सकते हैं, गेम खेल सकते हैं या काम कर सकते हैं। इसके लिए वीआर हेडसेट, स्मार्ट ग्लासेज और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें एआई, वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी और 3D तकनीक मिलकर काम करती हैं। यानी मेटावर्स का मकसद इंटरनेट को सिर्फ देखने से आगे ले जाकर उसे अनुभव करने जैसा बनाना है।

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पेर ओला क्रिस्टेंसन के मुताबिक मेटावर्स को ऐसी दुनिया के रूप में समझा जा सकता है, जहां वर्चुअल, ऑगमेंटेड और असली दुनिया आपस में जुड़ जाती हैं। इसका मकसद डिजिटल दुनिया में भी लोगों को वैसा ही अनुभव देना है, जैसा वे वास्तविक दुनिया में करते हैं। यानी तकनीक की मदद से हमारी असली दुनिया के अनुभव को डिजिटल दुनिया तक बढ़ाना है।

मेटावर्स में पढ़ाई से लेकर नौकरी तक कई काम वर्चुअल तरीके से किए जा सकते हैं। कोई व्यक्ति घर बैठे किसी वर्चुअल क्लास में शामिल हो सकता है, किसी मेडिकल स्टोर के डिजिटल वर्जन पर सलाह ले सकता है या दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद लोगों के साथ एक ही वर्चुअल जगह पर काम कर सकता है। यहां आप गेम खेल सकते हैं, दोस्तों के साथ मिल सकते हैं, एक्सरसाइज कर सकते हैं, फिल्में देख सकते हैं और अपने डिजिटल अवतार का रूप भी बदल सकते हैं। 

Metaverse
Metaverse - फोटो : AI Generated

नील स्टीफेंस के स्नो क्रैश उपन्यास में पहली बार इस शब्द का किया गया था जिक्र 

मेटावर्स का विचार आज की टेक कंपनियों ने शुरू नहीं किया है। मेटावर्स शब्द 1992 में लेखक नील स्टीफेंसन के उपन्यास स्नो क्रैश में सामने आया था। उस समय उन्होंने एक ऐसी 3D डिजिटल दुनिया की कल्पना की थी, जहां लोग अपने डिजिटल अवतार के जरिए एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं।

मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और एपल जैसी कंपनियां वर्चुअल और ऑगमेंटेड रियलिटी को आगे बढ़ाने पर काम कर रही हैं। ऐसे में मेटावर्स अब सिर्फ साइंस फिक्शन की कल्पना नहीं रह गया है, बल्कि आने वाले 3D इंटरनेट पर होने वाली तकनीकी दौड़ का हिस्सा बन चुका है। एपल हेडसेट और मेटा ग्लासेज जो लॉन्च हो रहे हैं वो इस दिशा की ओर बढ़ने वाले कदम हैं। 

प्राइवेसी से जुड़े खतरे

हालांकि, मेटावर्स से जुड़े कई तरह के खतरे भी हैं। एक रिसर्च में कहा गया है कि इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने से पहले साइबर सिक्योरिटी की कई चुनौतियों को हल करना जरूरी होगा। इसकी एक वजह यह है कि मेटावर्स अभी शुरुआती दौर में है और इसे चलाने के लिए VR, AR, AI और कई दूसरी तकनीकों को एक साथ जोड़ना होगा। जितनी ज्यादा तकनीकें आपस में जुड़ेंगी साइबर हमले होने के उतने ही ज्यादा रास्ते बन सकते हैं। इसके अलावा मेटावर्स में हमारी आंखों और शरीर की गतिविधियों को ट्रैक करने वाली तकनीकों का इस्तेमाल होगा, जिससे प्राइवेसी का खतरा और भी ज्यादा बढ़ सकता है। रिसर्च में पाया गया है कि कुछ VR डिवाइस से यूजर की निजी जानकारी का अनुमान लगाया जा सकता है। AR डिवाइस की मदद से किसी व्यक्ति की लोकेशन को रियल टाइम में ट्रैक करने का खतरा भी मौजूद है। 

मेटावर्स की बड़ी समस्या है इंटरऑपरेबिलिटी 

एक रिसर्च में मेटावर्स में इंटरऑपरेबिलिटी को एक बड़ी समस्या बताया गया है। इसका मतलब है अलग-अलग वर्चुअल प्लेटफॉर्म्स का आपस में न जुड़ पाना। आज टेक कंपनियां अपने अलग-अलग मेटावर्स बना रही हैं, जो अलग सॉफ्टवेयर और कोडिंग पर चलते हैं। इस कारण यदि आप एक प्लेटफॉर्म पर कोई अवतार, डिजिटल कपड़े या संपत्ति खरीदते हैं, तो आप उसे दूसरे प्लेटफॉर्म पर नहीं ले जा सकते, वहां उसका मूल्य शून्य हो जाता है।

कंपनियां व्यावसायिक लाभ के लिए यूजर्स को अपने ही दायरे में सीमित रखना चाहती हैं। जब तक ये सभी प्लेटफॉर्म्स आपस में सुचारू रूप से नहीं जुड़ेंगे, तब तक एक वास्तविक और कनेक्टेड मेटावर्स का सपना अधूरा रहेगा। 

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