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Manipur: मैतेई और कुकी जवानों ने साथ ली ट्रेनिंग, अब बनेंगे मणिपुर के शांतिदूत
Wed, 25 Dec 2024 07:09 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डेरगांव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डेरगांव
Published by: शुभम कुमार
Updated Wed, 25 Dec 2024 07:09 AM IST
सार
पुलिस अकादमी (एलबीपीए) से उत्तीर्ण मैतेई-कुकी जवानों ने कहा कि वे शांति और प्रेम का संदेश लेकर मणिपुर लौंटेंगे और दोनों समुदायों के बीच जारी नफरत खत्म करेंगे। जवानों के इस हौसले ने एक बार फिर मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष को खत्म करने की उम्मीद जगा दी है।
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मैतेई और कुकी जवानों ने साथ ली ट्रेनिंग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
असम के लचित बोरफुकन पुलिस अकादमी (एलबीपीए) से उत्तीर्ण मैतेई-कुकी जवानों ने कहा कि वे शांति और प्रेम का संदेश लेकर मणिपुर लौंटेंगे और दोनों समुदायों के बीच जारी नफरत खत्म करेंगे। जवानों के इस हौसले ने एक बार फिर मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष को खत्म करने की उम्मीद जगा दी है।
पिछले वर्ष मई से इंफाल घाटी स्थित मैतेई और समीपवर्ती पहाड़ियों पर स्थित कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। एलबीपीए से 44 सप्ताह के कड़े प्रशिक्षण के बाद सोमवार को कुल 1,946 रंगरूट स्नातक हुए थे। इनमें मैतेई, कुकी, नगा, मुस्लिम और अन्य समुदायों के रंगरूट शामिल थे।
एजेंसी से बात करते हुए मैतेई समुदाय के एक कैडेट चिरोम शेखरजीत सिंह ने कहा कि सभी सदस्य एक साथ खाते-पीते, सोते और नहाते थे। हमें न तो कुकी रंगरूटों से किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत हुई और ना ही उन्हें मैतेई रंगरूटों से कोई शिकायत रही। प्रशिक्षण के दौरान हमारे घर की समस्याओं का हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। ब्यूरो
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मिलकर करेंगे सेवा: किपगेन
इंडिया रिजर्व बटालियन के कुकी कर्मी पी किपगेन ने कहा कि सभी समुदायों के रंगरूटों ने एक साथ प्रशिक्षण लिया है और मणिपुर लौटने पर वे एक साथ मिलकर सेवा करेंगे। किपगेन ने कहा, हमने मैतेई रंगरूटों के साथ प्रशिक्षण लिया। कोई परेशानी नहीं हुई।
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पिछले वर्ष मई से इंफाल घाटी स्थित मैतेई और समीपवर्ती पहाड़ियों पर स्थित कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। एलबीपीए से 44 सप्ताह के कड़े प्रशिक्षण के बाद सोमवार को कुल 1,946 रंगरूट स्नातक हुए थे। इनमें मैतेई, कुकी, नगा, मुस्लिम और अन्य समुदायों के रंगरूट शामिल थे।
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एजेंसी से बात करते हुए मैतेई समुदाय के एक कैडेट चिरोम शेखरजीत सिंह ने कहा कि सभी सदस्य एक साथ खाते-पीते, सोते और नहाते थे। हमें न तो कुकी रंगरूटों से किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत हुई और ना ही उन्हें मैतेई रंगरूटों से कोई शिकायत रही। प्रशिक्षण के दौरान हमारे घर की समस्याओं का हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। ब्यूरो
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मिलकर करेंगे सेवा: किपगेन
इंडिया रिजर्व बटालियन के कुकी कर्मी पी किपगेन ने कहा कि सभी समुदायों के रंगरूटों ने एक साथ प्रशिक्षण लिया है और मणिपुर लौटने पर वे एक साथ मिलकर सेवा करेंगे। किपगेन ने कहा, हमने मैतेई रंगरूटों के साथ प्रशिक्षण लिया। कोई परेशानी नहीं हुई।