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भीमा कोरेगांव हिंसा में महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस से तलब की समीक्षा रिपोर्ट

Fri, 24 Jan 2020 12:31 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Sneha Baluni Updated Fri, 24 Jan 2020 12:31 AM IST
सार

  • उप मुख्यमंत्री अजित पवार व राज्य गृहमंत्री अनिल देशमुख ने पुलिस से ली पूरी जानकारी 
  • एक और समीक्षा बैठक होगी जिसके बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी
  • राज्य की महा विकास अघाड़ी सरकार जानना चाहती है कि हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार

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Meeting underway between Ajit Pawar, Anil Deshmukh with Police officers on review of Bhima Koregaon
सचिवालय में भीमा कोरेगांव मामलों को लेकर समीक्षा बैठक हो रही है - फोटो : एएनआई

विस्तार

महाराष्ट्र सरकार ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में अब तक हुई जांच का पूरा जायजा बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र पुलिस से तलब किया। उप मुख्यमंत्री अजीत पवार और राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने मंत्रालय में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे चली समीक्षा बैठक में पूरी जानकारी ली।

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समीक्षा बैठक के बाद अनिल देशमुख ने कहा, अभी एक और समीक्षा बैठक होगी जिसके बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। राज्य की नई महा विकास अघाड़ी सरकार जानना चाहती है कि हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार है? जांच में कौन अधिकारी सरकार के दबाव में था? 
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दरअसल देशमुख के पास शिकायत आई है कि इस प्रकरण में सरकार विरोधी विचारधारा वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के फोन टेप किए गए। अब इसकी गहनता से समीक्षा की जा रही है कि वह पुलिस अधिकारी कौन था जिसने इस्राइल का दौरा कर फोन टेपिंग का विशेष प्रशिक्षण हासिल किया था। 
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ऐसी चर्चा है कि अनिल देशमुख ने ऐसे अधिकारी की जांच के आदेश दिए हैं। यह भी जांच का हिस्सा है कि क्या तत्कालीन भाजपा सरकार ने सत्ता का दुरुपयोग किया। गृह मंत्री ने कहा कि यह जांच का विषय है। सच्चाई सामने आने पर इसका खुलासा किया जाएगा। 

गौरतलब है कि पुणे पुलिस ने 31 दिसंबर 2017 को हुई एल्गार परिषद के अगले दिन पुणे जिले के भीमा कोरेगांव में जातीय हिंसा की कथित जांच के बाद अर्बन नक्सलियों का हाथ होने की बात कही थी। हिंदुवादी नेता मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिडे़ के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ था। 


एकबोटे को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद माओवादियों से कथित संबंध रखने के आरोप में कवि वरवरा राव, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा आदि के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। 

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