तनाव घटाने को तैयार भारत-चीन, नेपाल के साथ संबंधों में आया सुधार : विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय की गुरुवार को हुई प्रेस वार्ता में कई मुद्दों पर बात की गई। मंत्रालय ने भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव से लेकर नेपाल के साथ संबंधों को लेकर जानकारियां दीं। इसके अलावा कराची में हुए आतंकी हमले में पाक द्वारा भारत का नाम लिए जाने के मामले के साथ भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए गए चीन के 59 एप्स को लेकर भी मंत्रालय ने बात की। जानिए इस प्रेस वार्ता की प्रमुख बातें...
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भारत और चीन संबंधों को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने इस संबंध में कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि चीनी पक्ष ईमानदारी से द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाली सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों के बीच कई स्तर की वार्ताओं का दौर जारी है। भारत और चीन दोनों ने ही चरणबद्ध तरीके से तनाव को कम करने पर जोर दिया है।
बता दें कि दोनों देशों के बीच सीमा तनाव इस समय चरम पर है। 15 जून की रात को पूर्वी लद्दाख के गलवां घाटी क्षेत्र में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे। झड़प में चीन के सैनिक भी मारे गए थे, लेकिन उसने इसकी कोई जानकारी साझा नहीं की है। इस समस्या के समाधान के लिए दोनों पक्षों में वार्ता के दौर जारी हैं। दोनों पक्षों ने टकराव वाली जगहों से सैनिकों की संख्या कम करने पर सहमति जताई है।
'भारत में काम करने वाली कंपनियों को मानने होंगे हमारे नियम'
चीनी एप्स पर प्रतिबंध के फैसले पर श्रीवास्तव ने कहा, भारत में कार्य करते हुए किसी कंपनी को हमारे नियम-कायदों का पालन करना होता है जो संबंधित मंत्रालयों या विभागों की ओर से जारी किए गए हैं। इनमें वह नियम भी शामलि हैं जो डाटा सुरक्षा और किसी व्यक्ति की निजता की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। भारत सरकार ने हाल ही में डाटा सुरक्षा के मुद्दे का हवाला देते हुए 59 चीनी एप्स प्रतिबंधित कर दिए थे। इनमें टिक टॉक और हेगो जैसे लोकप्रिय एप्स भी शामिल थे।
वहीं, चीन ने भारत सरकार के इस फैसलो को भेदभाव से परिपूर्ण और अस्पष्ट करार दिया था। चीन ने कहा था कि भारत सरकार का यह निर्णय निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रियाओं के खिलाफ है और राष्ट्रीय सुरक्षा अपवादों का दुरुपयोग करता है। चीन ने इस फैसले को विश्व व्यापार नियमों के खिलाफ भी बताया था। चीन की ओर से कहा गया था कि वह इस कदम का मजबूती से विरोध करेगा। साथ ही उसने भारत से इस फैसले को बदलने की अपील करने की बात भी कही थी।
नेपाल के साथ संबंधों में सुधार, जारी रहेगी वस्तुओं की आपूर्ति
हाल के दिनों में चीन के साथ-साथ नेपाल के साथ भी भारत के संबंधों में तनाव आया था। इसे लेकर श्रीवास्तव ने कहा कि नेपाल के साथ हमारे संबंधों में सुधार आया है। उन्होंने कहा नेपाल को वस्तुओं की आपूर्ति पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी और यह आपूर्ति निर्बाध तरीके से जारी रहेगी। बता दें कि नेपाल के साथ मानचित्र को लेकर विवाद है। नेपाल की संसद ने बीते दिनों देश के विवादित राजनीतिक नक्शे को मंजूरी दे दी थी।
नेपाल ने नए नक्शे में भारत के तीन इलाके लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपना हिस्सा बताया है। इसके अलावा नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का भारत विरोधी रुख भी इस दौरान स्पष्ट तौर पर सामने आया है। वहीं, नेपाल में अब ओली की पार्टी ने उन्हें पद से हटाने के लिए बगावती तेवर अपना लिए हैं। हाल ही में ओली ने इशारों-इशारों में ही कहा था कि भारत उन्हें पीएम के पद से हटाने की साजिश रच रहा है।
कराची हमला : पाक की घरेलू समस्याओं के लिए भारत जिम्मेदार नहीं
29 जून को कराची के स्टॉक एक्सचेंज पर हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान द्वारा भारत का नाम लिए जाने पर श्रीवास्तव ने कहा कि पाक के ये बयान बेबुनियाद हैं।उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी घरेलू समस्याओं के लिए भारत को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकता है। प्रवक्ता ने कहा, 'हम पाकिस्तान से कहेंगे कि वह अपनी सरकार की उस बात पर विचार करे जिसमें एक आतंकी को शहीद करार दिया गया था।'
कराची में हुए इस हमले को चार आतंकियों ने अंजाम दिया था, जिन्हें जिन्हें मुठभेड़ में मार गिराया गया था। इसमें 11 लोगों की मौत हुई थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसे लेकर संसद में कहा था कि हमें इस बात में कोई शक नहीं है कि इस हमले के पीछे भारत का हाथ था। इसके अलावा पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी इस हमले में भारत को घसीटने की नापाक कोशिश की थी।
एनरिका लेक्सी मामले में भारतीय अधिकारियों का आचरण बरकरार
वहीं, साल 2012 में इटली के टैंकर एनरिका लेक्सी और भारत के मछली पकड़े वाले जहाज सेंट एंथोनी से जुड़े विवाद के संबंध में श्रीवास्तव ने कहा कि इस मामले में आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल (मध्यस्थ न्यायाधिकरण) ने UNCLOS (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन) के प्रावधानों के तहत भारतीय अधिकारियों के आचरण को बरकरार रखा है। इस ट्रिब्यूनल को इटली के अनुरोध पर गठित किया गया था।
इस मामले में इटली के दौ नौसैनिकों पर 15 फरवरी 2012 को दो भारतीय मछुआरों की हत्या करने का आरोप है। ये दोनों नौसैनिक एनरिका लेक्सी नामक जहाज पर सवार थे। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में इटली ने कहा था कि जहाज के चालक दल के सदस्यों ने भारतीय मछुआरों पर गोली इसलिए चलाई थी क्योंकि उन्हें लगा था कि वे समुद्री लुटेरे हैं।