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MEA On Pakistan Flood: भारत ने मानवीय आधार पर पाकिस्तान को दी बाढ़ संबंधी जानकारी, सिंधु जल संधि अब भी निलंबित
Fri, 05 Sep 2025 10:11 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 05 Sep 2025 10:11 PM IST
सार
India Helping Pakistan On Humanitarian Ground: भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर रखा है, लेकिन बाढ़ जैसी आपात स्थितियों में मानवीय दृष्टिकोण से मदद कर रहा है। भारत का यह कदम अंतरराष्ट्रीय मानवीय जिम्मेदारी को दर्शाता है।
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रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह मानवीय आधार पर पाकिस्तान को बाढ़ से जुड़ा महत्वपूर्ण डाटा साझा कर रहा है, जबकि सिंधु जल संधि अब भी निलंबित है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान दी। उन्होंने बताया कि यह डाटा भारत के इस्लामाबाद स्थित उच्चायोग के माध्यम से पाकिस्तान को भेजा जा रहा है।
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भारी बारिश के कारण बढ़ी जरूरत
विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस समय भारत और आसपास के क्षेत्र में भारी बारिश हो रही है, जिससे नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में समय पर जानकारी साझा करना बेहद जरूरी है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जनहानि को कम किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल मानवीय कारणों से उठाया गया है और इसका सिंधु जल संधि से कोई सीधा संबंध नहीं है।
पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि निलंबित
भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के अगले दिन पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इन्हीं कदमों में सिंधु जल संधि का निलंबन भी शामिल था। भारत ने उस समय साफ कहा था कि, 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।' भारत का रुख है कि यह संधि तभी दोबारा लागू होगी जब पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से खत्म कर देगा।
ऑपरेशन सिंदूर और सीमा पर तनाव
पहलगाम हमले के बाद भारत ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। इसका लक्ष्य पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में मौजूद आतंकी ढांचे को नष्ट करना था। इन हमलों के बाद दोनों देशों के बीच चार दिनों तक तीव्र झड़पें हुईं। आखिरकार 10 मई को एक समझौते के बाद सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी, जिससे हालात कुछ हद तक शांत हुए।
यह भी पढ़ें - MEA: ट्रंप के करीबी पीटर नवारो के बयान पर भारत का पलटवार, विदेश मंत्रालय ने उनके दावों को बताया गलत और भ्रामक
SCO सदस्यता को लेकर स्थिति
वहीं पत्रकारों की तरफ से पूछे गए एक अन्य सवाल पर रणधीर जायसवाल ने बताया कि शंघाई सहयोग संगठन का विस्तार एक निरंतर प्रक्रिया है। इस वर्ष आर्मेनिया और अजरबैजान ने सदस्यता के लिए आवेदन दिया था। हालांकि, 31 अगस्त और 1 सितंबर को चीन के तियानजिन में हुई वार्षिक एससीओ बैठक में समय की कमी के कारण इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका। रणधीर जायसवाल ने कहा, 'यह मामला अभी सदस्य देशों के विचार-विमर्श में है।'
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VIDEO | MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "We have been sharing high-flood data with Pakistan through our diplomatic channels as and when it is required. This sharing of data is happening through our High Commission in Islamabad."
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(Full video available on PTI Videos -… pic.twitter.com/YIFr8WeMsr — Press Trust of India (@PTI_News) September 5, 2025
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भारी बारिश के कारण बढ़ी जरूरत
विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस समय भारत और आसपास के क्षेत्र में भारी बारिश हो रही है, जिससे नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में समय पर जानकारी साझा करना बेहद जरूरी है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जनहानि को कम किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल मानवीय कारणों से उठाया गया है और इसका सिंधु जल संधि से कोई सीधा संबंध नहीं है।
पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि निलंबित
भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के अगले दिन पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इन्हीं कदमों में सिंधु जल संधि का निलंबन भी शामिल था। भारत ने उस समय साफ कहा था कि, 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।' भारत का रुख है कि यह संधि तभी दोबारा लागू होगी जब पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से खत्म कर देगा।
ऑपरेशन सिंदूर और सीमा पर तनाव
पहलगाम हमले के बाद भारत ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। इसका लक्ष्य पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में मौजूद आतंकी ढांचे को नष्ट करना था। इन हमलों के बाद दोनों देशों के बीच चार दिनों तक तीव्र झड़पें हुईं। आखिरकार 10 मई को एक समझौते के बाद सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी, जिससे हालात कुछ हद तक शांत हुए।
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SCO सदस्यता को लेकर स्थिति
वहीं पत्रकारों की तरफ से पूछे गए एक अन्य सवाल पर रणधीर जायसवाल ने बताया कि शंघाई सहयोग संगठन का विस्तार एक निरंतर प्रक्रिया है। इस वर्ष आर्मेनिया और अजरबैजान ने सदस्यता के लिए आवेदन दिया था। हालांकि, 31 अगस्त और 1 सितंबर को चीन के तियानजिन में हुई वार्षिक एससीओ बैठक में समय की कमी के कारण इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका। रणधीर जायसवाल ने कहा, 'यह मामला अभी सदस्य देशों के विचार-विमर्श में है।'