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Maharashtra: मनोज जरांगे ने 10 फरवरी को भूख हड़ताल की धमकी दी, शिंदे सरकार से कही ये बात
Mon, 05 Feb 2024 05:44 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: श्वेता महतो
Updated Mon, 05 Feb 2024 05:44 PM IST
सार
मनोज जरांगे ने कहा कि अगर राज्य सरकार 10 फरवरी तक 'रक्त संबंधियों' शब्द को समझाने में नाकाम रही तो वह फिर से भूख हड़ताल पर जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि आरक्षण को लेकर प्रदर्शन के कारण अबतक 34 लाख मराठों को लाभ मिला है।
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मनोज जारांगे
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मराठा आरक्षण के कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार को धमकी दी कि अगर सरकार पिछले महीने जारी अधिसूचना में उल्लिखित रक्त संबंधियों शब्द को समझाने में विफल रही तो वह 10 फरवरी से फिर से भूख हड़ताल शुरू करेंगे। दरअसल, राज्य सरकार ने कहा था कि किसी मराठा व्यक्ति के रक्त संबंधियों के पास यह दर्शाने के लिए रिकॉर्ड होगा कि वह कुनबी समुदाय से है, तो उसे भी कुनबी के रूप में मान्यता दी जाएगी। बता दें कि कुनबी एक कृषि समुदाय है जो ओबीसी के अंतर्गत आता है।
10 फरवरी से शुरू हो सकता है भूख हड़ताल
जरांगे ने महाराष्ट्र के सभी मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की मांग की है। जालना जिले में अंतरवाली सारती गांव में एक प्रेस कॉन्फेरेंस में जरांगे ने दावा किया कि कुनबी जाति से संबंधित अबतक 54 लाख दस्तावेज मिले हैं। उन्होंने आगे कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि मराठा कुनबी है।
जरांगे ने कहा कि अगर राज्य सरकार 10 फरवरी तक रक्त संबंधियों शब्द को समझाने में नाकाम रही तो वह फिर से भूख हड़ताल पर जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि आरक्षण को लेकर प्रदर्शन के कारण अबतक 34 लाख मराठों को लाभ मिला है। इस आंदोलन ने उस समुदाय को एकजूट कर दिया, जो ऐतिहासिक तौर पर विभाजित था। जरांगे ने बताया कि मराठा संगठन के कुछ नेता इस मुद्दे पर चर्चा करने के बजाय समुदाय को विभाजित करने के लिए सोशल मीडिया पर तरह-तरह के पोस्ट डाल रहे हैं।
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10 फरवरी से शुरू हो सकता है भूख हड़ताल
जरांगे ने महाराष्ट्र के सभी मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की मांग की है। जालना जिले में अंतरवाली सारती गांव में एक प्रेस कॉन्फेरेंस में जरांगे ने दावा किया कि कुनबी जाति से संबंधित अबतक 54 लाख दस्तावेज मिले हैं। उन्होंने आगे कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि मराठा कुनबी है।
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जरांगे ने कहा कि अगर राज्य सरकार 10 फरवरी तक रक्त संबंधियों शब्द को समझाने में नाकाम रही तो वह फिर से भूख हड़ताल पर जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि आरक्षण को लेकर प्रदर्शन के कारण अबतक 34 लाख मराठों को लाभ मिला है। इस आंदोलन ने उस समुदाय को एकजूट कर दिया, जो ऐतिहासिक तौर पर विभाजित था। जरांगे ने बताया कि मराठा संगठन के कुछ नेता इस मुद्दे पर चर्चा करने के बजाय समुदाय को विभाजित करने के लिए सोशल मीडिया पर तरह-तरह के पोस्ट डाल रहे हैं।
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