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मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे की भूख हड़ताल फिर शुरू, मसौदा अधिसूचना को कानून में बदलने के लिए विशेष सत्र की मांग

Sat, 10 Feb 2024 10:40 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालना Published by: आदर्श शर्मा Updated Sat, 10 Feb 2024 10:40 PM IST
सार

कुनबी मराठों पर मसौदा अधिसूचना को कानून में बदलने के लिए विशेष सत्र बुलाने की मांग को लेकर एक बार फिर सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। 

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Maratha quota: Jarange on fast, wants legislature session to convert draft notification into law
मनोज जरांगे (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

विस्तार

मनोज जरांगे ने कुनबी मराठों पर मसौदा अधिसूचना को कानून में बदलने के लिए दो दिनों में राज्य विधानमंडल का एक विशेष सत्र बुलाने की मांग को लेकर शनिवार को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। एक साल से भी कम समय में यह चौथी बार है, जब जरांगे मराठा समुदाय को ओबीसी समूह में शामिल करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं।
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प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस हो- जरांगे
अंतरवाली सरती गांव में संबोधित करते हुए जरांगे ने कहा कि राज्य भर में मराठा समुदाय के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले तुरंत वापस लिए जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार को दो दिनों में राज्य विधानमंडल का एक विशेष सत्र बुलाना चाहिए और रक्त संबंधियों के संबंध में कानून लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को कुनबी रिकॉर्ड रखने वाले 57 लाख लोगों को ओबीसी) जाति प्रमाण पत्र जारी करना चाहिए। जरांगे ने कहा कि न्यायाधीश संदीप शिंदे समिति को उसे सौंपे गए काम में तेजी लानी चाहिए। समिति का गठन शुरू में मराठवाड़ा क्षेत्र के मराठों के कुनबी इतिहास पर गौर करने के लिए सरकार द्वारा किया गया था, बाद में इसका दायरा बढ़ाया गया।
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अधिसूचना को कानून में बदलें- जरांगे
सभा को संबोधित करते हुए मनोज जरांगे ने कहा कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, जिसने हाल ही में मराठा समुदाय के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन का निर्धारण करने के लिए एक सर्वेक्षण किया था, को अपनाया जाएगा और इसे कानून में परिवर्तित किया जाएगा। जरांगे ने यह भी दावा किया कि कुछ लोगों ने पहले भी उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी लेकिन उन्होंने चुप रहना बेहतर समझा क्योंकि वह सनसनी पैदा नहीं करना चाहते थे। जरांगे ने कहा कि वह इस बार अनिश्चितकालीन भूख के दौरान किसी भी प्रकार का चिकित्सा उपचार स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने पहले भी अनिश्चितकालीन उपवास किया था लेकिन सरकार के आश्वासन पर उन्हें वापस ले लिया था।
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