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मंजिलें और भी हैं: बच्चों से कोचिंग फीस के बदले पौधे लगवाता हूं

Mon, 27 May 2019 12:17 AM IST
गौरव द्विवेदी राजेश कुमार सुमन
राजेश कुमार सुमन Published by: गौरव द्विवेदी Updated Mon, 27 May 2019 12:17 AM IST
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manzilein aur bhi hai: Planting by students instead of coaching fees
राजेश कुमार सुमन (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

आप किसी को जो गुलदस्ता भेंट करते हैं, जो पेड़ की पत्ती और फूल से बनता है, जिससे पौधे का नुकसान होता है, लेकिन आप अगर गुलदस्ते के बदले फूल का पौधा भेंट करते हैं तो वह गुलदस्ते से सस्ता भी होगा और उसे लंबे समय तक याद भी रखा जाएगा। यही बात मेरे मन में बैठ गई, और यह अभियान शुरू हुआ। मैं बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला हूं। बचपन से ही प्रकृति प्रेमी होने के साथ मैं गरीब बच्चों को पढ़ाने में रुचि रखता था। मेरे पिता हमेशा मेरे जन्मदिन पर मुझसे पौधारोपण करवाते और हमेशा पर्यावरण को सहेजने के लिए प्रेरित करते थे। मैंने समस्तीपुर महाविद्यालय से स्नातकोत्तर किया। कुछ समय बाद मुझे विदेश मंत्रालय में नौकरी मिल गई। मैं अपनी नौकरी से खुश था, लेकिन, गरीब छात्रों के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की इच्छा अब भी मेरे मन में बाकी थी। समस्तीपुर बिहार का पिछड़ा हुआ इलाका है। यहां छात्रों को सही मार्गदर्शन नहीं मिल रहा था और होनहार छात्र भी छोटा-मोटा काम करके अपनी जिंदगी गुजारने पर मजबूर थे। इस स्थिति को बदलने के लिए मैंने सोचा कि समस्तीपुर में एक इंस्टीट्यूट खोलकर छात्रों को विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाए, ताकि उनका भविष्य सुधर सके। इसी सोच को साकार करने के लिए मैं नौकरी छोड़कर बिहार वापस आ गया। मैंने वर्ष 2008 में बीएसएस क्लब नि:शुल्क शैक्षणिक संस्थान की स्थापना की और इसे ग्रीन पाठशाला का नाम दिया। शुरुआत में इसमें केवल चार छात्र थे, जिन्हें मैंने मुफ्त में पढ़ाना शुरू किया। बाद में दूर-दूर से बच्चे आने लगे। इंस्टीट्यूट तो चल रहा था, मेरा अगला लक्ष्य पौधे लगवाना था। इसके लिए जो भी बच्चे मेरे पास आते हैं, उनसे मैं फीस की जगह 18 पौधे लगाने का संकल्प करवाता हूं। हर बच्चे को जहां भी वे चाहें, 18 पौधे लगाने होते हैं और लगातार तीन-चार साल तक उनकी देखभाल करनी होती है। इसके पीछे मेरा लक्ष्य सिर्फ यह है कि कि हमारा ग्रीन कवर बढ़े और किसी भी बहाने आने वाली पीढ़ी पौधारोपण का महत्व समझे। ग्रीन पाठशाला के माध्यम से लगभग 4, 000 बच्चे शिक्षित हो चुके हैं। इनमें से 350 से अधिक बच्चे अलग-अलग विभागों में सरकारी नौकरियां कर रहे हैं। मैं और मेरी टीम के सदस्य गांव-गांव जाकर लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करते हैं। समस्तीपुर के अलावा यह अभियान दरभंगा, खगड़िया और बेगूसराय जिले तक पहुंच चुका है। अभियान को और सक्रिय करने के लिए मैंने सेल्फी विद ट्री की शुरुआत की, जिसमें लोग जगह-जगह पौधे लगाते हैं और उसके साथ सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं। अब इस अभियान के प्रति जागरूकता बढ़ने के बाद लोग मुझे पौधे वाले गुरु जी के नाम से बुलाने लगे हैं। बच्चों से पौधारोपण करवाना, किसी भी समारोह में पौधे भेंट करना हो, या फिर गरीब बच्चों के लिए प्रतियोगिता की किताबों का बंदोबस्त करना हो, ये सारे काम मैं अपने वेतन से ही खर्च करता हूं। मुझे हमेशा लगता है कि, शिक्षा ही हर समस्या का समाधान है। और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का काम लगातार चलने वाला है। इस काम के लिए किसी से जबर्दस्ती नहीं कर सकते। जब तक लोग पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, वे इसे कभी नहीं बचा पाएंगे। पर्यावरण संरक्षण तब सफल होगा, जब हम इसे अपने जीवन, अपनी संस्कृति का हिस्सा बनाएंगे। यदि हम चाहते हैं कि आने वाले समय में पृथ्वी पर जीवन बचे, तो हमें पर्यावरण को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी खुद ही लेनी होगी।

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-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।  

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