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एनआरसी के पहले मसौदे से गायब हैं कई सांसद व विधायक
रीता तिवारी / गुवाहाटी
Updated Wed, 03 Jan 2018 03:13 AM IST
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असम
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क्या आप जानते हैं कि असम के गृह सचिव प्रतीक हाजेला, लोकसभा सांसद, इत्र कारोबारी और आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) प्रमुख बदरुद्दीन अजमल, अभिनेत्री से विधायक बनी अंगूरलता डेका और उग्रवादी संगठन अल्फा (आई) के स्वयंभू अध्यक्ष परेश बरुआ में क्या समानता है? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए आपको असम के राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के पहले मसौदे को खंगालना होगा।
इसकी वजह यह है कि राज्य के मूल नागरिकों की पहचान के लिए तैयार होने वाले एनआरसी के पहले मसौदे में इनके नाम शामिल नहीं हैं। वैसे, इस मसौदे में 3.3 करोड़ में से महज 1.9 करोड़ लोगों के ही नाम शामिल हैं। हालांकि मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल समेत एनआरसी को अपडेट करने की कवायद से जुडे़ अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि पहले मसौदे में शामिल नहीं होने वाले लोगों को आतंकित होने की कोई जरूरत नहीं है। उनके दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया जारी है। उसके पूरी होने के बाद दूसरा मसौदा प्रकाशित किया जाएगा।
पढ़ें- NRC की पहली लिस्ट में असम में सिर्फ 1.9 करोड़ लोग ही भारतीय नागरिक
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लेकिन सोमवार सुबह से ही राज्य के ढाई हजार सेवा केंद्रों पर जुट रही भीड़ को इस भरोसा पर भरोसा नहीं है। जिनके नाम पहले मसौदे में शामिल नहीं हो सके हैं उनके माथे पर चिंता की लकीरें लगातार गहरी होती जा रही हैं। कछार जिले में तो एक व्यक्ति ने अपना नाम इस सूची में नहीं पा कर आत्महत्या तक कर ली। अल्फा प्रमुख परेश बरुआ के परिवार के पांच सदस्यों के नाम इस सूची में शामिल हैं।
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इसकी वजह यह है कि राज्य के मूल नागरिकों की पहचान के लिए तैयार होने वाले एनआरसी के पहले मसौदे में इनके नाम शामिल नहीं हैं। वैसे, इस मसौदे में 3.3 करोड़ में से महज 1.9 करोड़ लोगों के ही नाम शामिल हैं। हालांकि मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल समेत एनआरसी को अपडेट करने की कवायद से जुडे़ अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि पहले मसौदे में शामिल नहीं होने वाले लोगों को आतंकित होने की कोई जरूरत नहीं है। उनके दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया जारी है। उसके पूरी होने के बाद दूसरा मसौदा प्रकाशित किया जाएगा।
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लेकिन सोमवार सुबह से ही राज्य के ढाई हजार सेवा केंद्रों पर जुट रही भीड़ को इस भरोसा पर भरोसा नहीं है। जिनके नाम पहले मसौदे में शामिल नहीं हो सके हैं उनके माथे पर चिंता की लकीरें लगातार गहरी होती जा रही हैं। कछार जिले में तो एक व्यक्ति ने अपना नाम इस सूची में नहीं पा कर आत्महत्या तक कर ली। अल्फा प्रमुख परेश बरुआ के परिवार के पांच सदस्यों के नाम इस सूची में शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पांच दिसंबर को हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया था
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लेकिन बरुआ, उनकी पत्नी बाबी भुइयां बरुआ और दोनों पुत्रों अंकुर व आकाश के नाम इस सूची में नहीं हैं। परेश की बहन रेणु का कहना है कि अगले दौर में बरुआ की पत्नी व दोनों बेटों के नाम एनआरसी में शामिल करने के लिए जरूर दस्तावेज मुहैया करा दिए जाएंगे। दूसरी ओर, परेश बरुआ ने इस पूरी कवायद को एक साजिश करार देते हुए एनआरसी को ही खारिज कर दिया है।
पहले मसौदे में उन 48 लाख लोगों के नाम बी शामिल नहीं हैं जिन्होंने आवासीय प्रमाणपत्र के तौर पर पंचायत प्रधान की ओर से जारी दस्तावेज जमा किए थे। गौहाटी हाईकोर्ट ने इस प्रमाणपत्र को नागरिकता का सबूत मानने से इंकार कर दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पांच दिसंबर को हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया था। सरकारी सूत्रों का कहना है कि समय कम होने की वजह से इन लोगों के नाम पहले मसौदे में शामिल नहीं हो सके।
पहले मसौदे में जिन प्रमुख लोगों के नाम नहीं हैं उनमें बदरुद्दीन अजमल के सांसद भाई सिराजुद्दीन के अलावा उनके दो बेटों के नाम भी नहीं हैं। एआईयूडीएफ के एक अन्य विधायक बशीर अहमद काशमी के अलावा होजाई के भाजपा विधायक शिलादित्या देब का नाम भी पहले मसौदे में नहीं है। देब के परिजनों के नाम इसमें शामिल हैं। कांग्रेस विधायक नुकुल हुदा का नाम भी पहले मसौदे से गायब है। लेकिन वे इससे परेशान नहीं हैं। हुदा कहते हैं कि यह एक जटिल प्रक्रिया है।
एनआरसी का पहला मसौदा जारी होने के बाद राज्य में हालात तनावपूर्ण तो हैं। लेकिन अब तक वैसा कुछ नहीं हुआ है जिसकी सरकार को आशंका थी। राज्य सरकार ने संवेदनशील इलाकों में अर्धसैनिक बलों की 85 कंपनियां तैनात की हैं। इसके अलावा बांग्लादेश से लगे सीमावर्ती इलाकों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
पहले मसौदे में उन 48 लाख लोगों के नाम बी शामिल नहीं हैं जिन्होंने आवासीय प्रमाणपत्र के तौर पर पंचायत प्रधान की ओर से जारी दस्तावेज जमा किए थे। गौहाटी हाईकोर्ट ने इस प्रमाणपत्र को नागरिकता का सबूत मानने से इंकार कर दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पांच दिसंबर को हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया था। सरकारी सूत्रों का कहना है कि समय कम होने की वजह से इन लोगों के नाम पहले मसौदे में शामिल नहीं हो सके।
पहले मसौदे में जिन प्रमुख लोगों के नाम नहीं हैं उनमें बदरुद्दीन अजमल के सांसद भाई सिराजुद्दीन के अलावा उनके दो बेटों के नाम भी नहीं हैं। एआईयूडीएफ के एक अन्य विधायक बशीर अहमद काशमी के अलावा होजाई के भाजपा विधायक शिलादित्या देब का नाम भी पहले मसौदे में नहीं है। देब के परिजनों के नाम इसमें शामिल हैं। कांग्रेस विधायक नुकुल हुदा का नाम भी पहले मसौदे से गायब है। लेकिन वे इससे परेशान नहीं हैं। हुदा कहते हैं कि यह एक जटिल प्रक्रिया है।
एनआरसी का पहला मसौदा जारी होने के बाद राज्य में हालात तनावपूर्ण तो हैं। लेकिन अब तक वैसा कुछ नहीं हुआ है जिसकी सरकार को आशंका थी। राज्य सरकार ने संवेदनशील इलाकों में अर्धसैनिक बलों की 85 कंपनियां तैनात की हैं। इसके अलावा बांग्लादेश से लगे सीमावर्ती इलाकों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।