गोवा में भाजपा के 'संकट मोचक' माने जाते थे मनोहर परिकर
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देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक आईआईटी मुंबई से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बावजूद मनोहर परिकर ने राजनीतिक आसमान की बुलंदियों तक खुद को पहुंचाकर उदाहरण स्थापित किया। रविवार को लंबी बीमारी के बाद परिकर के निधन के साथ ही भाजपा ने अपना 'संकट मोचक' भी खो दिया। परिकर को गोवा में भाजपा के सामने आने वाली परेशानियों का एकमात्र हल माना जाता था।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से तीन साल तक देश के रक्षामंत्री और चार बार गोवा के मुख्यमंत्री भी बने, लेकिन उनकी ख्याति हमेशा आम आदमी जैसा सादगी भरा जीवन जीने के लिए मशहूर रही। देश के सभी राजनीतिक दलों से सम्मान पाने वाले परिकर ने गोवा में भाजपा को शीर्ष पार्टी बनाने में अहम योगदान दिया। इस दौरान उन्होंने राज्य में कई बार भाजपा को राजनीतिक संकट से उबारा।
मनोहर परिकर का पूरा प्रोफाइल यहां पढ़ें, देखें और डाउनलोड करें
संकट मोचक के तौर पर उनकी हैसियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2017 में विधानसभा चुनावों में भाजपा के खाते में महज 14 सीट आई थी, जबकि कांग्रेस ने 16 सीट हासिल की थी। इसके बावजूद परिकर के महज रक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्य में वापस लौटते ही क्षेत्रीय दलों ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी। इसे उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता की भी पुष्टि माना जाता है।
सर्जिकल स्ट्राइक में थी अहम भूमिका
कश्मीर के उड़ी में 18 सितंबर, 2016 को सैन्य बेस पर पाकिस्तानी आतंकियों के हमले में 19 जवानों की मौत के महज 12 दिन में भारत ने पाक कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी शिविरों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी थी। भारतीय इतिहास में पहली बार की गई इस सर्जिकल स्ट्राइक के पीछे उस समय रक्षा मंत्री पद पर मौजूद परिकर की भूमिका को बेहद अहम माना जाता है। इससे पहले 4 जून, 2015 को मणिपुर के चंदेल जिले में उग्रवादियों के हमला कर सेना के 18 जवानों की जान लेने के बाद म्यांमार सीमा में उग्रवादियों के दो कैंपों पर सर्जिकल स्ट्राइक में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। इस ऑपरेशन में तकरीबन 100 उग्रवादी मारे गए थे।