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26/11 के बाद ही मिट जाता बालाकोट, मनमोहन सरकार ने नहीं दी थी इजाजत

Sat, 09 Mar 2019 04:02 AM IST
गौरव द्विवेदी गुंजन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
गुंजन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Sat, 09 Mar 2019 04:02 AM IST
सार

  • मुंबई हमले के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए सेना ने तैयार की थी व्यापक योजना
  • 2008 में अमेरिका के साथ ऐतिहासिक परमाणु करार पर वार्ता के चलते तत्कालीन यूपीए सरकार हट गई थी सैन्य कार्रवाई से पीछे

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Manmohan Singh did not give permission after 26/11 to Balakot Attack
manmohan singh - फोटो : PTI

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट के जिस आतंकी शिविर पर कहर बरपाया था, उसका नामोनिशान 10 साल पहले ही मिट सकता था। मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले के बाद ही भारतीय सेना के तीनों अंगों ने मिलकर पाकिस्तान को सबक सिखाने की व्यापक योजना भी बना ली थी, जिसमें बालाकोट को लड़ाकू विमान से उड़ाना भी शामिल था। लेकिन मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन यूपीए सरकार ने सेना को इस कार्रवाई की इजाजत ही नहीं दी थी।

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सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि पुलवामा के बाद करीब दस साल पहले बनी तकरीबन यही योजना नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा एनडीए सरकार के सामने रखी गई थी, जिसे पूरा करने की इजाजत देकर मोदी सरकार ने आतंक के खिलाफ लड़ाई का नया मापदंड तैयार कर दिया है। सेना की खुफिया इकाई के मुताबिक, दस साल पहले मुंबई हमले के समय भी बालाकोट का आतंकी ठिकाना पाकिस्तानी एजेंसियों की सरपरस्ती में पूरी तरह सक्रिय था। 
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हालांकि मुंबई हमले में लश्कर-ए-ताइबा का हाथ था और बालाकोट का यह ठिकाना जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा है। लेकिन सेना ने उस समय पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए बनाई व्यापक योजना के तहत उसकी सरपरस्ती वाले सभी आतंकी संगठनों के खिलाफ एक साथ मोर्चा खोलने का निर्णय लिया था। इस योजना को परवान चढ़ाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) एमके नारायणन के साथ तीनों तत्कालीन सेना प्रमुखों की कई बैठकें भी हुईं। 
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इन बैठकों में हमले का अंतिम खाका भी तैयार कर लिया गया था। लेकिन उस दौरान भारत और अमेरिका के बीच परवान चढ़ रही ऐतिहासिक सिविल परमाणु करार की कवायद आड़े आ गई। तत्काीन यूपीए सरकार ने देश को ऊर्जा के क्षेत्र में स्वावलंबी बनाने के मकसद से अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश के साथ यह कवायद शुरू की थी। अमेरिका ने भी भारत को परमाणु ईंधन व तकनीक मुहैया कराने के लिए अपनी संसद में कई बिलों में संशोधन किया था। 

माना जा रहा है कि संभवत: अमेरिका ने ही भारत को इस कूटनीतिक प्रगति के दौरान युद्ध से दूर रहने की सलाह दी थी। इसी वजह से लंबी मंत्रणा के बाद तत्कालीन सरकार ने कूटनीतिक नजरिया अपनाकर बड़ी सैन्य कार्रवाई से हाथ खींच लिए थे और पाकिस्तान को दूसरे तरीके से घेरे में लेने का निर्णय लिया था।
 

पाक को पोल खुलने का डर, 9 दिन में तीसरी बार मीडिया को बालाकोट जाने से रोका

पाकिस्तान बालाकोट में भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक के सच को दुनिया से छिपाने की कोशिश में लगा है। इसके चलते पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारी मीडिया को उस पहाड़ी पर जाने से रोक रहे हैं, जहां भारतीय वायुसेना ने हमला किया था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की टीम को इलाके में आम जनता से तो मिलने दिया गया, लेकिन बृहस्पतिवार को 9 दिन में तीसरी बार पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों ने सुरक्षा का बहाना बनाकर उन्हें घटनास्थल तक जाने से रोक दिया। 

मीडिया टीम को मदरसे से करीब 100 मीटर नीचे ही रोक दिया गया है। लेकिन वहां से कुछ भी नहीं दिख पा रहा। दरअसल, जिन इमारतों में भारतीय वायुसेना ने मिसाइलें दागीं थीं, वे पेड़ों से घिरी हैं। बता दें कि पहले पाकिस्तान सरकार ने कहा था कि वह अंतरराष्ट्रीय मीडिया को एयर स्ट्राइक की जगह पर ले जाकर भारतीय दावों का झूठ दिखाएगी। हालांकि बाद में मीडिया को ले जाने की बात टाल दी गई थी।

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