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Manipur: मणिपुर में अफस्पा कानून का विरोध शुरू, हिंसा के बाद से छह इलाकों में लागू; जिरीबाम के एसपी का इस्तीफा
Mon, 25 Nov 2024 10:22 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 25 Nov 2024 10:22 PM IST
सार
संगठन की कार्यकर्ता बबीना माइबम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'मूल निवासियों के खिलाफ हो रहे शोषण के खिलाफ हम प्रदर्शन कर रहे हैं। हम अन्यायपूर्ण और निर्दयी अफस्पा कानून को फिर से राज्य में लागू नहीं होने दे सकते।
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Manipur
- फोटो : PTI
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विस्तार
मणिपुर के कई इलाकों में केंद्र सरकार द्वारा फिर से अफस्पा कानून लागू करने का विरोध शुरू हो गया है। सोमवार को इस फैसले के विरोध में हजारों की तादाद में महिलाओं ने विरोध मार्च निकाला। महिलाएं विरोध मार्च निकालते हुए इंफाल स्थित सचिवालय जाना चाहती थीं, लेकिन सुरक्षाबलों ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। गौरतलब है कि बीते दिनों जिरीबाम में हुई हिंसा के बाद मणिपुर के कई इलाकों में फिर से अफस्पा कानून लागू कर दिया गया है।
महिला संगठन ने किया रैली का आयोजन
सोमवार को मणिपुर में मानवाधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए काम करने वाले महिलाओं के संगठन मीरा पाइबिस ने रैली का आयोजन किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने हाथों में प्लेकार्ड और बैनर पकड़े हुए थे और वे राज्य से अफस्पा (Armed Forces Special Powers Act (AFSPA) 1958) कानून को हटाने की मांग कर रहीं थी। महिलाओं की रैली इंफाल के कोंगबा बाजार इलाके से शुरू हुई, लेकिन तीन किलोमीटर बाद ही रैली को सुरक्षा बलों ने रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी वापस कोंगबा बाजार पहुंचे और वहां एक सभा का आयोजन किया।
संगठन ने केंद्र सरकार पर लगाए आरोप
संगठन की कार्यकर्ता बबीना माइबम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'मूल निवासियों के खिलाफ हो रहे शोषण के खिलाफ हम प्रदर्शन कर रहे हैं। हम अन्यायपूर्ण और निर्दयी अफस्पा कानून को फिर से राज्य में लागू नहीं होने दे सकते। फर्जी मुठभेड़ के कई मामले अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। अब राज्य के छह पुलिस थानों में फिर से अफस्पा कानून लागू करके केंद्र सरकार राज्य के लोगों की परेशानी को सिर्फ बढ़ाना चाहती है।'
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इन इलाकों में लागू हुआ है अफस्पा कानून
अफस्पा कानून के तहत सुरक्षा बलों को अतिरिक्त अधिकार मिल जाते हैं, जिनमें कहीं भी तलाशी लेने, गिरफ्तार करने और जरूरत पड़ने पर फायरिंग करने जैसे अधिकार शामिल हैं। केंद्र सरकार ने बीते दिनों जिरीबाम जिले में हिंसा के बाद जिरीबाम समेत इंफाल पश्चिम के सेकमई और लामसांग, इंफाल पूर्व के लामलाई, कांगपोकपी जिले के लेईमाकहोंग और बिष्णुपुर जिले के मोइरंग पुलिस थानों में अफस्पा कानून फिर से लागू कर दिया है।
नौ जिलों में मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध दो दिन के लिए बढ़ा
मणिपुर सरकार ने नौ जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध को 27 नवंबर तक दो दिनों के लिए बढ़ा दिया। आदेश में कहा गया कि राज्य सरकार ने मौजूदा कानून और व्यवस्था की समीक्षा करने के बाद इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, काकचिंग, बिष्णुपुर, थौबल, चुराचांदपुर, कांगपोकपी, फेरजावल और जिरीबाम में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को दो दिनों के प्रतिबंधित किया है।
जिरीबाम में पुलिस अधिकारी का इस्तीफा स्वीकार
मणिपुर पुलिस ने जिरीबाम के प्रभारी अधिकारी सागापम इबोटोम्बी सिंह का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जिन्होंने कुछ दिन पहले अपनी नौकरी छोड़ने की मांग की थी। जिरीबाम में ही 11 नवंबर को तीन महिलाओं और तीन बच्चों के अपहरण और उसके बाद उनकी हत्या के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। इबोटोम्बी सिंह ने 14 नवंबर को जिरीबाम पुलिस स्टेशन से इंफाल पूर्वी जिले में मणिपुर पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में स्थानांतरित किए जाने के एक दिन बाद अपना इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सेवा छोड़ने के कारणों के रूप में 'मेरे परिवार की अपरिहार्य परिस्थितियों और अन्य कारणों' का हवाला दिया था। पुलिस महानिदेशक राजीव सिंह की तरफ से हस्ताक्षरित आदेश के अनुसार, जिरीबाम पुलिस थाने के तत्कालीन निरीक्षक सागापम इबोटोम्बी सिंह की तरफ से 15.11.2024 को दिए गए पत्र के माध्यम से दिया गया इस्तीफा स्वीकार किया जाता है और उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से इस्तीफा देने की अनुमति दी जाती है।
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महिला संगठन ने किया रैली का आयोजन
सोमवार को मणिपुर में मानवाधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए काम करने वाले महिलाओं के संगठन मीरा पाइबिस ने रैली का आयोजन किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने हाथों में प्लेकार्ड और बैनर पकड़े हुए थे और वे राज्य से अफस्पा (Armed Forces Special Powers Act (AFSPA) 1958) कानून को हटाने की मांग कर रहीं थी। महिलाओं की रैली इंफाल के कोंगबा बाजार इलाके से शुरू हुई, लेकिन तीन किलोमीटर बाद ही रैली को सुरक्षा बलों ने रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी वापस कोंगबा बाजार पहुंचे और वहां एक सभा का आयोजन किया।
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संगठन ने केंद्र सरकार पर लगाए आरोप
संगठन की कार्यकर्ता बबीना माइबम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'मूल निवासियों के खिलाफ हो रहे शोषण के खिलाफ हम प्रदर्शन कर रहे हैं। हम अन्यायपूर्ण और निर्दयी अफस्पा कानून को फिर से राज्य में लागू नहीं होने दे सकते। फर्जी मुठभेड़ के कई मामले अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। अब राज्य के छह पुलिस थानों में फिर से अफस्पा कानून लागू करके केंद्र सरकार राज्य के लोगों की परेशानी को सिर्फ बढ़ाना चाहती है।'
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इन इलाकों में लागू हुआ है अफस्पा कानून
अफस्पा कानून के तहत सुरक्षा बलों को अतिरिक्त अधिकार मिल जाते हैं, जिनमें कहीं भी तलाशी लेने, गिरफ्तार करने और जरूरत पड़ने पर फायरिंग करने जैसे अधिकार शामिल हैं। केंद्र सरकार ने बीते दिनों जिरीबाम जिले में हिंसा के बाद जिरीबाम समेत इंफाल पश्चिम के सेकमई और लामसांग, इंफाल पूर्व के लामलाई, कांगपोकपी जिले के लेईमाकहोंग और बिष्णुपुर जिले के मोइरंग पुलिस थानों में अफस्पा कानून फिर से लागू कर दिया है।
नौ जिलों में मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध दो दिन के लिए बढ़ा
मणिपुर सरकार ने नौ जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध को 27 नवंबर तक दो दिनों के लिए बढ़ा दिया। आदेश में कहा गया कि राज्य सरकार ने मौजूदा कानून और व्यवस्था की समीक्षा करने के बाद इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, काकचिंग, बिष्णुपुर, थौबल, चुराचांदपुर, कांगपोकपी, फेरजावल और जिरीबाम में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को दो दिनों के प्रतिबंधित किया है।
जिरीबाम में पुलिस अधिकारी का इस्तीफा स्वीकार
मणिपुर पुलिस ने जिरीबाम के प्रभारी अधिकारी सागापम इबोटोम्बी सिंह का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जिन्होंने कुछ दिन पहले अपनी नौकरी छोड़ने की मांग की थी। जिरीबाम में ही 11 नवंबर को तीन महिलाओं और तीन बच्चों के अपहरण और उसके बाद उनकी हत्या के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। इबोटोम्बी सिंह ने 14 नवंबर को जिरीबाम पुलिस स्टेशन से इंफाल पूर्वी जिले में मणिपुर पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में स्थानांतरित किए जाने के एक दिन बाद अपना इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सेवा छोड़ने के कारणों के रूप में 'मेरे परिवार की अपरिहार्य परिस्थितियों और अन्य कारणों' का हवाला दिया था। पुलिस महानिदेशक राजीव सिंह की तरफ से हस्ताक्षरित आदेश के अनुसार, जिरीबाम पुलिस थाने के तत्कालीन निरीक्षक सागापम इबोटोम्बी सिंह की तरफ से 15.11.2024 को दिए गए पत्र के माध्यम से दिया गया इस्तीफा स्वीकार किया जाता है और उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से इस्तीफा देने की अनुमति दी जाती है।
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