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कांग्रेस मणिपुर में भाजपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी : इबोबी सिंह

Thu, 18 Jun 2020 11:07 PM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: Rohit Ojha Updated Thu, 18 Jun 2020 11:07 PM IST
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Manipur government on sticky wicket after 3 BJP MLAs resign
मणिपुर में भी भाजपा के लिए सियासी संकट - फोटो : ANI

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मणिपुर में चार मंत्रियों सहित भाजपा नीत गठबंधन के नौ सदस्यों के इस्तीफे के बाद तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कांग्रेस विधायक दल के नेता ओ इबोबी सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में सरकार बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही एन बिरेन सिंह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। वहीं, मणिपुर हाई कोर्ट ने स्पीकर को निर्देश दिया है कि शुक्रवार तक वह कांग्रेस के सात विधायकों के भाजपा में शामिल होने को लेकर अयोग्यता पर कोई फैसला न दें।   

इबोबी सिंह ने कहा कि विधानसभा और पार्टी से इस्तीफा देने वाले भाजपा के तीन विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। सिंह ने बताया कि उन्होंने भाजपा नीत गठबंधन सरकार से इस्तीफा देने वाले नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के सभी चारों मंत्रियों से राज्य के ताजा राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा करने के लिए संपर्क किया।

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चारों मंत्रियों ने दावा किया कि सरकार उनके और उनकी पार्टी के साथ अच्छा बर्ताव नहीं कर रही थी, इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया। पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी और विधानसभा का विशेष सत्र जल्द से जल्द बुलाने के लिए वह विधानसभाध्यक्ष युमनाम खेमचंद सिंह से संपर्क करेंगे।
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उपमुख्यमंत्री वाई जॉयकुमार सिंह, आदिवासी एवं पर्वतीय क्षेत्र विकास मंत्री एन कायिशी, युवा मामलों और खेल मंत्री लेतपाओ हाओकिप और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री एल जयंत कुमार सिंह ने बुधवार को मंत्री पदों से इस्तीफा दे दिया था।

भाजपा विधायक एस सुभाषचंद्र सिंह, टीटी हाओकिप और सैमुअल जेंदई ने विधानसभा तथा पार्टी से इस्तीफा दे दिया। समर्थन वापस लेने वाले बाकी सदस्यों में तृणमूल कांग्रेस के विधायक टी रबिंद्र सिंह और निर्दलीय विधायक शहाबुद्दीन शामिल हैं।

मुख्यमंत्री के खिलाफ विधायकों की कुल संख्या अब 29 हो गई है जिनमें कांग्रेस के 20, एनपीपी के चार विधायक शामिल हैं। इसके अलावा भाजपा छोड़कर आए तीन विधायक, एक तृणमूल विधायक और एक निर्दलीय विधायक भी हैं।

बिरेन सिंह का समर्थन कर रहे विधायकों की संख्या 23 है जिनमें भाजपा के 18 विधायक, नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के चार और लोजपा के एक विधायक शामिल हैं।

कांग्रेस के सात विधायकों, जो भाजपा में शामिल हो गए थे, उनके खिलाफ विधानसभाध्यक्ष न्यायाधिकरण और मणिपुर के उच्च न्यायालय में दलबदल-विरोधी कानून के तहत मामले लंबित हैं।

सियासी उठापटक 

2017  के विधानसभा चुनाव में मणिपुर की जनता ने किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत नहीं दिया था। राज्य की कुल 60 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस 28 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। भाजपा के खाते में 21 सीटें गई थीं। नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) को चार-चार सीटें मिली थीं। लोकजनशक्ति पार्टी और तृणमूल कांग्रेस को एक-एक और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी।

भाजपा ने 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में 32 विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया। बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत थी। अब भाजपा और सहयोगी विधायकों के इस्तीफे के बाद भाजपा की सरकार पर संकट बादल छा गए हैं।

मणिपुर में कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने बृहस्पतिवार को राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला से भाजपा नीत सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए जल्द ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का अनुरोध किया।

कांग्रेस विधायक दल के नेता ओ इबोबी सिंह अपनी पार्टी के अन्य विधायकों और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा।

पत्र सौंपने के बाद एनपीपी प्रमुख थांगमिलेन किपगेन ने पत्रकारों से कहा कि एन बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए हमने राज्यपाल से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का अनुरोध किया है। 

इससे पहले दिन में इबोबी सिंह ने कहा था कि उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार से इस्तीफा देने वाले नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के सभी चारों मंत्रियों से राज्य में ताजा राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा करने के लिए संपर्क किया।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद किपगेन ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से राज्य में इबोबी सिंह के नेतृत्व में सरकार गठन के लिए नवगठित 'सेक्युलर प्रोग्रेसिव फ्रंट' (एसपीएफ) को बुलावा देने का भी अनुरोध किया।
 
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