ममता के 'दिल्ली दंगल' में शामिल होंगे राहुल गांधी समेत 21 दलों के नेता, मायावती पर सस्पेंस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोलकाता में धरना खत्म करने के बाद मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने 'दिल्ली दंगल' का ऐलान कर दिया है। दिल्ली में चूंकि संसद सत्र चल रहा है, इसलिए ममता ने 12 फरवरी को सत्र खत्म होने से एक दिन पहले एनडीए-भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों का प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस प्रदर्शन में राहुल गांधी समेत 21 दलों के नेता दीदी के साथ होंगे।
वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर संशय है कि वे खुद आएंगी या अपने किसी प्रतिनिधि को 'दिल्ली दंगल' में भेजेंगी। बता दें कि इससे पहले कोलकाता में जब ममता ने रैली की थी तो उसमें भी मायावती नहीं पहुंची थी। उनके प्रतिनिधि ही रैली में शिरकत करने आए थे। नेताओं का कहना है कि पीएम पद को लेकर ममता और मायावती के बीच कोई साफ तस्वीर नहीं है।
पश्चिम बंगाल में धरने पर बैठने के बाद ममता बैनर्जी इसे अपनी पार्टी के लिए मजबूती भरा कदम मान रही हैं। टीएमसी नेताओं का कहना है कि यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज चौहान के हेलीकॉप्टर को पश्चिम बंगाल में उतरने की इजाजत न देना, इसका दीदी को राजनीतिक फायदा मिलेगा।
2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की 42 में से 34 सीटों पर टीएमसी ने जीत दर्ज कराई थी। ममता ने अपनी जीत से विपक्षी दलों खासतौर पर भाजपा और कांग्रेस को यह अहसास करा दिया था कि उनके लिए यहां पांव जमाना इतना आसान नहीं होगा।
इस बार भी लोकसभा चुनाव में ममता अपने बलबूते पश्चिम बंगाल में टीएमसी की बड़ी जीत की उम्मीद लेकर चल रही हैं। यही वजह है कि उन्होंने पहले कोलकाता में रैली कर सत्तापक्ष और विपक्ष के साथियों को अपनी ताकत का अहसास कराया।
सीबीआई छापे के खिलाफ अब तीन दिन तक धरना-प्रदर्शन पर बैठना और इसके बाद 12 फरवरी को संसद सत्र खत्म होने से एक दिन पहले विपक्षी दलों का 'दिल्ली दंगल' आयोजित कर दिया है। इसमें विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं और गैर-भाजपा प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को भी बुलावा भेजा जा रहा है।
चंद्रबाबू नायडू निभा रहे हैं मध्यस्थ की भूमिका
विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले गैर-एनडीए दलों की एकता प्रदर्शित करने की दिशा में 'दिल्ली दंगल' अहम होगा। यही वजह है कि इसे लेकर ममता बैनर्जी खुद रणनीति तैयार कर रही हैं। विपक्ष के जो नेता किसी वजह से ममता के साथ थोड़ी-बहुत दूरी रखते हैं, उन्हें मनाने की जिम्मेदारी आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को सौंपी गई है।
दिल्ली दंगल' में मायावती भी शामिल हों, इसके लिए वे बसपा सुप्रीमो से बातचीत करेंगे। साथ ही नायडू अन्य क्षेत्रीय दलों के नेताओं से मिलकर उन्हें दिल्ली दंगल का न्यौता देंगे। कई विपक्षी नेताओं को यह लग रहा है कि ममता बनर्जी खुद को विपक्ष का ‘केंद्र’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। चंद्रबाबू नायडू के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती होगी कि वे उन नेताओं को अपने साथ कैसे लेकर आते हैं जो ममता बनर्जी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर परेशान हैं।
क्षेत्रीय नेताओं में एक तरह का डर है कि अगर ममता के साथ ऐसा हो गया है तो कल को वे भी भाजपा का निशाना बन सकते हैं। यह बात भी देखने को मिल रही है कि छोटे दल राहुल गांधी की अपेक्षा ख़ुद को ममता बनर्जी के साथ खड़े होने में ज़्यादा आरामदायक समझते हैं।
जांच एजेंसियों की मार विपक्ष को कर रही है एकजुट
कोलकाता रैली और उसके बाद सीबीआई छापे को लेकर हुए धरने-प्रदर्शन में दीदी के मंच पर विराजमान रहे विपक्षी दलों के अधिकांश नेता जांच एजेंसियों की मार झेल रहे हैं। कुछ नेता जांच एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं तो अन्य को लोकसभा चुनाव से पहले जांच में शामिल होना पड़ सकता है।
भाजपा तो कई बार सार्वजनिक तौर से यह बात कह चुकी है कि विपक्षी दलों के गठबंधन में शामिल कई दलों के नेता किसी न किसी जांच एजेंसी के सवालों का सामना कर रहे हैं। कोलकाता रैली की संयोजक, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ भी पेंटिंग और चिट फंड मामले को लेकर सीबीआई जांच चल रही है।
हालांकि ममता बैनर्जी ने आंधप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तर्ज पर सीबीआई को अपने राज्य में दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेबलिसमेंट एक्ट के तहत जांच करने की अनुमति देने वाली सहमति वापस ले ली है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ भी कथित माइनिंग घोटाले में जांच एजेंसी किसी भी वक्त दस्तक दे सकती है।
राजद अध्यक्ष लालू यादव पहले से ही जेल में बंद हैं। अब तेजस्वी यादव और उनकी बहन मीसा भारती प्रवर्तन निदेशालय के रडॉर पर हैं। डीएमके नेता एमके स्टालिन भी कई विवादों में घिरे रहे हैं।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के खिलाफ जांच एजेंसी अपने घोड़े दौड़ा चुकी हैं। उनकी पार्टी के छगन भुजबल और समीर भुजबल के खिलाफ ईडी की जांच चल रही है। धनंजय मुंडे भी टारगेट पर रहे हैं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ही नहीं, बल्कि उनके मंत्रियों के घर-दफ़्तर तक को सीबीआई खंगाल चुकी है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी पर भी कथित माइनिंग स्कैम के आरोप लगे थे।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व झामुमो प्रमुख हेमंत सोरेन का नाम भी जमीन विवाद और ईसीआई के नियमों का उल्लंघन करने में सामने आ चुका है।असम से एआईडीयूएफ के प्रमुख और सांसद बदरुद्दीन अजमल भी कई मामलों में विवादित रहे हैं।ये सभी नेता दिल्ली दंगल में शामिल होंगे।