ममता बनर्जी ने कहा: कश्मीर में हो रहा मानवाधिकारों का उल्लंघन
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विश्व मानवतावादी दिवस के मौके पर ट्वीट करते हुए कहा कि कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने कहा कि आइए हम सभी कश्मीर के मानवाधिकारों और शांति के लिए प्रार्थना करें।
बनर्जी ने पहले ट्वीट में कहा, 'आज विश्व मानवतावादी दिवस है। कश्मीर में मानवाधिकारों का पूरी तरह से उल्लंघन हो रहा है। आइए हम सभी वहां मानवाधिकारों और शांति के लिए प्रार्थना करें।' उन्होंने दूसरे ट्वीट में कहा, 'मानवाधिकार एक ऐसा विषय है जो मेरे दिल के बहुत करीब है। 1995 में मैं लॉक-अप में हुई मौतों के मामले में मानवाधिकार उल्लंघन को बचाने के लिए 21 दिनों तक सड़क पर थी।'
Human rights is a subject very close to my heart. In 1995, I was on the road for 21 days to protect human rights violations against deaths in lock-ups 2/2
विज्ञापन विज्ञापन— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) August 19, 2019
कश्मीर की बात करें तो वहां हालात सामान्य हो रहे हैं। धीरे-धीरे जनजीवन पटरी पर लौट रहा है। आज से घाटी के स्कूल और कॉलेज खुल रहे हैं। प्रधान सचिव रोहित कंसल का कहना है कि सोमवार से नया हफ्ता शुरू हो रहा है और हम इसे नई आशा के साथ देख रहे हैं। अकेले श्रीनगर में सोमवार से 190 से ज्यादा प्राथमिक स्कूल खुल रहे हैं और इसके बाद हम दूसरे क्षेत्रों की तरफ देख रहे हैं। हम विकास से संबंधित गतिविधियां शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रतिबंधों में दी गई ढील
रविवार को घाटी के 50 और थाना क्षेत्रों में प्रतिबंधों में ढील दे दी गई। शुक्रवार रात को प्रतिबंधों में कुछ ढील दिए जाने के बाद श्रीनगर के कुछ क्षेत्रों सहित घाटी के 12 स्थानों पर सुरक्षाबलों और युवकों के बीच झड़प हुई। जिसमें कुछ लोग घायल हो गए हैं। इसके बाद श्रीनगर के कुछ इलाकों और जम्मू क्षेत्र के पांच जिलों- जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी और ऊधमपुर में 2जी इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया। प्रशासन ने एहतियातन श्रीनगर के कुछ हिस्सों में फिर से कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।
आज से खुलेंगे 190 प्राइमरी स्कूल
सोमवार से श्रीनगर के 190 प्राइमरी स्कूल खुल रहे हैं। उम्मीद है कि आगे पाबंदियों में और ढील दी जा सकती है। सरकार के प्रवक्ता तथा प्रमुख सचिव रोहित कंसल ने पत्रकारों को बताया कि रविवार को 50 थाना क्षेत्रों में ढील दी गई। ढील की अवधि भी छह घंटे से बढ़ाकर आठ घंटे कर दी गई।