{"_id":"6499ba0cfd6adab6020cf834","slug":"mallikarjun-kharge-shimla-plan-challenge-to-increase-opposition-parties-number-know-all-about-opposition-meet-2023-06-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Politics: शिमला में खरगे के सामने विपक्षी दलों की संख्या बढ़ाने की चुनौती; 14 दलों के साथ आने के आसार","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Politics: शिमला में खरगे के सामने विपक्षी दलों की संख्या बढ़ाने की चुनौती; 14 दलों के साथ आने के आसार
विज्ञापन
विपक्षी एकता।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पटना से लौटकर विपक्ष के नेता अब 14 दिन बाद शिमला में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में दूसरी बैठक की तैयारी में हैं। बैठक में विपक्षी दलों से एकजुटता बनाए रखने में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कोशिश जारी रखेंगे। मल्लिकार्जुन खरगे ने इस बैठक के 10 से 12 जुलाई के बीच होने की घोषणा की है। विश्वस्त सूत्रों को लग रहा है कि अगली बैठक में 13-14 दलों के नेता जुट सकते हैं। बताते हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अपनी 'शर्त' के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के समर्थन के बहाने जहां विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं, वहीं दिल्ली के वरिष्ठ नेता अजय माकन भी नहीं चाहते कि अरविंद केजरीवाल को बहुत भाव दिया जाए। माकन ने तो बाकायदा प्रेस वार्ता में कह दिया कि केजरीवाल ने पटना में विपक्षी एकता को खंडित करने के लिए जो किया, इसके पीछे की उनकी (केजरीवाल) सोच जेल जाने से बचने की थी।
विज्ञापन
माकन का यह आरोप केजरीवाल के उस आरोप का सीधा जवाब था, जिसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली में ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े आध्यादेश के मामले में भाजपा और कांग्रेस के बीच गुप्त समझौता है। सवाल केवल अजय माकन का नहीं है। कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल इस समय पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की आवाज समझे जाते हैं।
विज्ञापन
वेणुगोपाल ने भी पटना और पटना के बाद केजरीवाल की राजनीतिक शैली पर बड़ा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कनपटी पर बंदूक रखकर आप (केजरीवाल) अपनी बात नहीं मनवा सकते। दोनों दलों में अभी आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ऐसे तमाम बयानों की याद दिलाई है, जिसमें आम आदमी पार्टी के नेता ने कांग्रेस को निशाने पर लिया है।
मुश्किल है AAP और कांग्रेस की भूमिका वाले विपक्षी दलों का तालमेल
कांग्रेस के नेता यही संकेत दे रहे हैं कि सत्तारूढ़ दल भाजपा को हराने के लिए विपक्षी एकता जरूरी है, लेकिन यह आम आदमी पार्टी की दबाव की राजनीति के तर्ज पर नहीं हो सकती। पार्टी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि राजस्थान में केजरीवाल जाकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट की आलोचना करते हैं और उन्हें कांग्रेस का सहयोग भी चाहिए।
कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय में नेताओं का कहना है कि गोवा विधानसभा चुनाव के राजनीतिक परिणाम कुछ और होते। सच्चाई यह है कि आम आदमी पार्टी ने कुछ चुनाव तो केवल कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने के लिए लड़ा है। अभी भी वह इसी राजनीति का सहारा लेकर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी का सचिवालय इस मामले में फूंक-फूंककर कदम रख रहा है।
कांग्रेस पार्टी के सूत्र कहते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष ने अध्यादेश वाले मामले में स्थिति स्पष्ट कर दी है। इस पर निर्णय संसद के मानसून सत्र के दौरान सहयोगी दलों के साथ चर्चा में होगा। वैसे भी मानसून सत्र जुलाई के तीसरे सप्ताह के आस-पास आरंभ होकर एक महीने चलता है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि शिमला और पटना में फर्क है। वहां होने वाली बैठक में भी फर्क दिखाई दे सकता है।
कांग्रेस के साथ हैं जदयू-राजद, एनसीपी समेत प्रमुख विपक्षी दल
विपक्ष की प्रयोगशाला में कई परीक्षण हुए। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजनीतिक गंभीरता और परिपक्वता की पूरी चतुराई दिखाई। वह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की छाया बने रहे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहते थे कि वह मुख्यमंत्री आवास पर पहले आएं। फिर सदाकत आश्रम जाएं, लेकिन कांग्रेस के नेता पहले सदाकत आश्रम गए और कांग्रेस नेताओं की भीड़ ने उन्हें उत्साहित किया। जब राहुल गांधी को नीतीश कुमार ने पक्ष रखने के लिए आमंत्रित किया, तो राहुल ने माइक मल्लिकार्जुन खरगे की तरफ बढ़ा दिया। बैठक में लालू प्रसाद यादव ने राहुल गांधी को दूल्हा बनाने का अपने अंदाज में जिक्र छेड़ा। राजनीति में इसे 2024 के दूल्हे के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन कांग्रेस के नेता ने खुद को संतुलित बयान तक सीमित रखा और भाजपा को भी कोई अवसर नहीं दिया।
जद(यू) और नीतीश कुमार के बेहद करीबी सूत्र का कहना है कि पटना की बैठक तृणमूल कांग्रेस की सलाह पर हुई। लेकिन शिमला की बैठक कांग्रेस के वीटो पर हो रही है। यह पटना में बैठक में आए 14 दलों के नेताओं की सहमति से हो रही है। इसमें एनसीपी, राजद, जद(यू), झामुमो, शिवसेना(यूटीबी), डीएमके, वामदल, समाजवादी पार्टी, एनसी, पीडीपी, तृणमूल समेत अन्य की सहमति है। माना जा रहा है कि इस बैठक में विपक्षी एकता का भविष्य का फार्मूला एक आकार ले लेगा।
शिमला में जुलाई की बैठक खरगे के लिए चुनौती
पटना में विपक्षी एकता की बैठक में गए तमाम नेताओं को इसका पूरा अनुमान है। उन्हें लग रहा है कि जुलाई में होने वाली बैठक कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकती है। पटना में भी कुछ ऐसा हुआ था। ममता बनर्जी उस समय असहज हो गई थीं, जब उनसे पहले भाकपा के डी. राजा को अपनी बात रखने का अवसर मिला। ममता बनर्जी की परेशानी तब और बढ़ गई, जब उन्हें मालूम हुआ कि इसके बाद माकपा के सीताराम येचुरी को पक्ष रखने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी दोनों इस समय विपक्षी एकता के धुर समर्थक हैं।
ममता ने इसी का संकेत देते हुए पहले लालू प्रसाद के घर जाकर उनका आशीर्वाद लेना जरूरी समझा। बैठक वाले दिन भी वह बड़ी गर्मजोशी के साथ शरीक हुईं। आम आदमी पार्टी के नेता और मुख्यमंत्री केजरीवाल को शांत कराने, बीच का रास्ता निकालकर नसीहत देने में भी उन्होंने एनसीपी के शरद पवार के साथ अहम भूमिका निभाई। उन्हें बस वामदलों से परहेज है। लेकिन फिलहाल वाम दल से भी वह भाजपा के खिलाफ बड़े मोर्चे के मामले में परहेज नहीं कर रही हैं। इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पटना में इकट्ठा हुए राजनीतिक दलों की संख्या बढ़ाने और बैठक के एजेंडे को अंतिम रूप देने में खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है।