{"_id":"62447b3808d74c114a41fc0b","slug":"malegaon-blast-case-2008-another-witness-turns-hostile","type":"story","status":"publish","title_hn":"मालेगांव ब्लास्ट मामला: अदालत में एक और गवाह मुकरा,आरोपी प्रसाद पुरोहित को पहचानने से किया मना","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
मालेगांव ब्लास्ट मामला: अदालत में एक और गवाह मुकरा,आरोपी प्रसाद पुरोहित को पहचानने से किया मना
Wed, 30 Mar 2022 09:18 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 30 Mar 2022 09:18 PM IST
सार
मालेगांव विस्फोट मामले में अब तक 19 गवाह मुकर चुके हैं। इस धमाके में छह लोगों की मौत हो गई थी और 101 लोग घायल हो गए थे।
विज्ञापन
मालेगांव ब्लास्ट केस
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
साल 2008 में हुए मालेगांव विस्फोट मामले में गवाही से मुकरने वाले गवाहों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में एक और गवाह अदालत में मुकर गया। अपने पहले दिए गए बयान से पलटते हुए बुधवार को गवाह ने आरोपी प्रसाद पुरोहित की पहचान करने से मना कर दिया। इस मामले की अगली सुनवाई अब 31 मार्च को होगी। इस मामले में अब तक सुनवाई के दौरान 19 गवाहों ने अपने बयान से पलट चुके हैं और आरोपियों की पहचान से इंकार कर चुके हैं। इस मामले की सुनवाई एनआईए के जज पीआर कर रहे हैं।
विज्ञापन
धमाके में छह लोगों की मौत हुई थी, 101 लोग घायल हुए थे
साल 2008 में 29 सितंबर की रात नौ बजकर 35 मिनट पर मालेगांव में शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के ठीक सामने एक बम धमाका हुआ था। यह धमाका एलएमएल मोटरसाइकिल में हुआ था। इस धमाके में छह लोगों की मौत हो गई थी और 101 लोग घायल हो गए थे।
विज्ञापन
जांच की जिम्मेदारी महाराष्ट्र एटीएस को दी गई थी
धमाके के बाद 30 सितंबर 2008 को मालेगांव के आजाद नगर पुलिस थाने में मामले दर्ज किए गए। चूंकि यह मामला आतंक से जुड़ा हुआ था, इसलिए इसकी जांच की जिम्मेदारी महाराष्ट्र एटीएस को दी गई। 21 अक्तूबर 2008 को एफआईआर में यूएपीए (UAPA) और मकोका (MCOCA) की धारा लगाई गईं।
विज्ञापन
ले. कर्नल पुरोहित ने की थी बंद कमरे में सुनवाई की मांग
इससे पहले मालेगांव धमाका मामले में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने विशेष अदालत में आवेदन दायर कर मामले की सुनवाई बंद कमरे में करने की अपील की थी। पुरोहित ने कहा कि न्याय के हित में मामला अदालत के कक्ष तक ही सीमित रहना चाहिए।
अपने आवेदन में पुरोहित ने कहा कि अदालत के 2019 के आदेश का मीडिया उल्लंघन कर रहा है। इसलिए मुकदमे को कवर करने की अनुमति को पूरी तरह से वापस लिया जाए। आवेदन में कहा गया है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने 2019 में अदालत के समक्ष दिए गए ऐसे ही एक आवेदन में मुकदमे की सुनवाई बंद कमरे में आयोजित करने और मीडिया को रिपोर्टिंग की इजाजत नहीं देने का अनुरोध किया था।