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सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने कहा- पिछले युद्ध की तरह नहीं होगा आने वाला युद्ध
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 23 Oct 2018 11:40 AM IST
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मेजर जनरल बिपिन रावत
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सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने कहा, 'मैं आपको यह साफ कर देना चाहता हूं कि जो अगली लड़ाई हम लड़ेंगे वह पिछली वाली की तरह बिलकुल नहीं होगी।' उन्होंने यह बातें एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे बड़े अभ्यास का महत्व और सेनाध्यक्ष के तौर पर उनकी प्राथमिकताओं के बारे में कहीं। उन्होंने कहा कि हमें बदलना होगा क्योंकि युद्ध की प्रकृति बदल रही है। आधुनिक संरचना को शामिल करने के लिए नई संरचनाएं बनाईं जानी चाहिए। यह बदलाव एक रात में नहीं होंगे लेकिन यह जरूर होगा।
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ममूथ ड्रिल, जोकि चार व्यापक अध्ययनों पर आधारित है और जिसे सेना के उच्च जनरलों ने मिलकर तैयार किया है, वह 1.2 मिलियन जवानों की दिशा बदल देगी। इससे उनमें परिवर्तन लाकर उन्हें भविष्य के युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा यह चारों अध्ययन सेनाध्यक्ष तक पहुंच गए हैं और सेना मुख्यालय के पुनर्गठन की फाइल को जल्द ही मंजूरी के लिए रक्षा मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। अगले साल की शुरुआत से पुनर्गठन शुरू हो जाएगा।
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बिपिन रावत ने कहा कि भारतीय सेना आने वाले तीन से पांच सालों में एक लाख सैनिकों की छंटनी करेगी। इनमें से कुछ को नई भूमिका जैसे- सायबर, सूचना और फिजियोलॉजिकल युद्ध की दी जाएगी। इससे सेना को पैसा बचाने में मदद मिलेगी जिसका इस्तेमाल उन्नयन क्षमताओं में किया जाएगा। सेना एक जवान पर सालाना 6-8 लाख रुपये खर्च करती है। इसकी तुलना में एक अधिकारी सालाना 20-22 लाख रुपये कमाता है। इसलिए चार-पांच अधिकारियों को छांटने से हमें एक करोड़ रुपये बचाने में मदद मिलेगी।
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उन्होंने आगे कहा, यदि भारतीय सेना इस पैसे को बचाती है तो यह आधुनिकीकरण परियोजनाओं पर वापस जा सकते हैं। हमारे पास सीमित संसाधन हैं। मैं इसे अपनी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सेना का राइटसाइजिंग कहूंगा। बता दें कि 2007-10 तक सेनाध्यक्ष रहे दीपक कपूर ने कहा था, आधुनिक सेना बड़े आकार के गठनों से दूर हो रही हैं क्योंकि भविष्य के युद्ध अलग तरह से लड़े जाएंगे। हम अतंरिक्ष युग के हथियार, परिशुद्धता लक्ष्यीकरण, युद्धक्षेत्र पारदर्शिता और युद्ध के महत्वपूर्ण दूसरे आयाम के बारे में बात कर रहे हैं। इसी वजह से हमें पुनर्गठन के मामलों की विस्तार से जांच करनी चाहिए।