फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Mahatma gandhi 150th birth anniversary gandhiji was also known as mohan and bapu

मोहन नाम से जाने जाते थे गांधीजी, फिर ऐसे बने बापू, महात्मा और राष्ट्रपिता

Tue, 02 Oct 2018 02:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 02 Oct 2018 02:21 PM IST
विज्ञापन
Mahatma gandhi 150th birth anniversary gandhiji was also known as mohan and bapu
mahatma gandhi

अहिंसा की राह पर चलते हुए मोहनदास करमचंद गांधी ने अपने आंदोलनों और महज एक लाठी के दम पर देश से अंग्रेजों को भागने पर मजबूर कर दिया। आम तौर पर दुनिया उन्हें महात्मा गांधी के नाम से जानती है, लेकिन इसके अलावा भी उन्हें कई और नामों से पुकारा जाता था, जिनमें मोहन, मिस्टर गांधी, बापू, राष्ट्रपिता आदि शामिल हैं। 

विज्ञापन


आज हम आपको बताते हैं कि आखिर महात्मा गांधी का नाम मोहन से मिस्टर गांधी, बापू और राष्ट्रपिता कैसे और कब पड़ा? 

2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे महात्मा गांधी 19 साल की उम्र तक गुजरात में ही रहे। तब तक लोग उन्हें मोहनदास के नाम से ही जानते थे और पुकारा करते थे। महज साढ़े 13 साल की उम्र में ही उनकी शादी कस्तूरबा गांधी से हो गई थी। जब गांधीजी 16 वर्ष के हुए तो उनके पिता करमचंद गांधी का देहांत हो गया। 
विज्ञापन


गांधीजी चाहते थे कि वो आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाएं, लेकिन उनकी मां उन्हें खुद से दूर जाने देना नहीं चाहती थीं। हालांकि बाद में वो तैयार हो गईं। 

दक्षिण अफ्रीका से मिली 'मिस्टर गांधी' को पहचान 

अपने 19वें जन्मदिन से लगभग एक महीने पहले ही 4 सितम्बर, 1888 को गांधीजी यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में कानून की पढ़ाई करने और बैरिस्टर बनने के लिये इंग्लैंड चले गये। वहां से पढ़ाई करने के बाद 1891 में वो फिर भारत आ गए और लगभग दो सालों तक बांबे (अब मुंबई) और राजकोट में काम किया, लेकिन यहां उनका मन नहीं लगा और 1893 में वो दक्षिण अफ्रीका चले गए। वहां उन्होंने कई दोस्त भी बनाए जो उन्हें मिस्टर गांधी कहकर पुकारते थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन


चंपारण से मिला था 'बापू' का संबोधन  

गांधीजी ने सबसे पहले आंदोलन की शुरुआत बिहार के चंपारण से की थी। वहां पर गांधीजी ने जमींदारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और हड़तालों का नेतृत्व किया जिन्होंने अंग्रेजी सरकार के मार्गदर्शन में उस क्षेत्र के गरीब किसानों को अधिक क्षतिपूर्ति मंजूर करने और खेती पर नियंत्रण, राजस्व में बढ़ोतरी को रद्द करना और इसे संग्रहित करने वाले एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस संघर्ष के दौरान ही गांधीजी को जनता ने बापू के नाम से संबोधित किया। 

रवींद्रनाथ टैगोर ने बापू का नाम दिया था 'महात्मा' 

Mahatma gandhi 150th birth anniversary gandhiji was also known as mohan and bapu
mahatma gandhi

12 अप्रैल, 1919 को रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने बापू को 'महात्मा' कहकर संबोधित किया था। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि 1915 में राजवैद्य जीवराम शास्त्री ने सबसे पहले गांधीजी को 'महात्मा' कहा था। 

गांधीजी ऐसे बने थे राष्ट्रपिता 

4 जून, 1944 को नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने सिंगापुर से रेडियो पर बापू के नाम एक संदेश दिया था, जिसमें उन्होंने गांधीजी को सबसे पहले राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था। इसके बाद 1948 में भी बापू के देहांत के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी रेडियो पर देश को संबोधित करते हुए कहा था 'राष्ट्रपिता अब नहीं रहे।'

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed