Maharashtra: किसके सिर सजेगा सीएम का ताज, फडणवीस होंगे मुख्यमंत्री या शिंदे को मिलेगा वफा का इनाम?
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विस्तार
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में वोटों की गिनती ने खासतौर से महाविकास अघाड़ी 'एमवीए' को चौंका दिया है। एमवीए का आंकड़ा 50 और 60 सीटों के बीच में झूल रहा है, जबकि एनडीए गठबंधन 'महायुति' 288 में से 220 सीटों पर आगे चल रहा है। हालांकि चुनाव आयोग के फाइनल नतीजों का इंतजार है। भाजपा अकेले ही 126 सीटों के पार जाती हुई दिख रही है। ऐसे में महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री कौन होगा, इस बाबत नई आवाज सुनाई देने लगी है। भाजपा नेता प्रवीण दारेकर ने बयान दिया है कि जिस पार्टी के पास ज्यादा विधायक होंगे यानी जो बड़ी पार्टी होगी, मुख्यमंत्री भी उसी दल का होना चाहिए। दूसरी तरफ शिवसेना के नेताओं को भरोसा है कि एकनाथ शिंदे ही मुख्यमंत्री का पद संभालेंगे। वजह, भाजपा शिंदे से वफा का इनाम नहीं छीनेगी। शिंदे ने शिवसेना को दोफाड़ कर राज्य में भाजपा के लिए एक मजबूत प्लेटफार्म तैयार किया था।
वोटों की गिनती के रूझानों में शिवसेना 56 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि एनसीपी 38 सीटों पर आगे है। शनिवार को जब वोटों की गिनती शुरु हुई तो एनसीपी नेता अजीत पवार के नाम के पोस्टर लग गए थे। उन पर लिखा था, अजीत दादा मुख्यमंत्री होंगे। दूसरी तरफ निवर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के समर्थक भी उन्हें दोबारा सीएम बनते हुए देखना चाहते हैं। दोपहर 12 बजे देवेंद्र फडणवीस के आवास पर लड्डुओं के डिब्बे पहुंचने शुरु हो गए। शिंदे के आवास पर भी मिठाई पहुंचने लगी। वोटों की गिनती के बीच भाजपा नेता प्रवीण दारेकर के बयान को बड़ा माना जा रहा है। उनके बयान के बाद ही भाजपा खेमे में यह चर्चा शुरु हो गई कि बड़ी पार्टी होने के नाते सीएम पद भाजपा के पास जाना चाहिए।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि महाराष्ट्र का सीएम कौन होगा, इस बाबत भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अपने सहयोगी दलों के साथ बैठक करने के बाद ही कोई निर्णय लेगा। संभव है कि मुख्यमंत्री का पद दोबारा से शिंदे के पास ही चला जाए। इसके पीछे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि शिंदे पर पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भरोसा बरकरार है। चुनाव से सीट बंटवारे के दौरान जब टकराहट की बात सामने आई तो शिंदे ने चुपचाप भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की बात मान ली। दूसरा, शिंदे ने ऐसे वक्त में भाजपा का साथ दिया था, जब पार्टी का ग्राफ आगे नहीं जा रहा था। भाजपा को सबसे बड़ा फायदा उस वक्त हुआ, जब शिवसेना दोफाड़ हुई थी। शिवसेना को दोफाड़ करने का काम एकनाथ शिंदे ने ही किया था।
भाजपा ने बतौर इनाम, शिंदे को मुख्यमंत्री का पद सौंप दिया। इतना ही नहीं, भाजपा ने अपने पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस को डिप्टी सीएम बना दिया। ऐसे में संभव है कि भाजपा नेतृत्व अब शिंदे पर भरोसा बनाए रखेगा। वे दोबारा से सीएम पद पर काबिज हो सकते हैं। भाजपा को यह बात मालूम है कि पिछले ढाई वर्ष के दौरान शिंदे ने उस पॉलिसी को बखूबी जमीन पर उतारा, जिसके तैयार होने में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की अहम भूमिका रही थी। चुनाव में 'लाडली' शब्द से शुरु होने वाली योजनाओं के पीछे भाजपा का दिमाग रहा है। एकनाथ शिंदे ने कहा, चुनाव के पूरे नतीजे आने के बाद मिल बैठकर सरकार के गठन का निर्णय करेंगे। उन्होंने कहा, तीनोंं दलों के लोग, जिनमें मोदी जी व अमित भाई शामिल हैं, बात करेंगे। हालांकि शिंदे ने उस सवाल का जवाब कि भाजपा कह रही है कि जो बड़ी पार्टी होगी, सीएम उसी का होगा, यह कहते हुए टाल दिया कि सभी दल आपस में तय करेंगे।