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Vehicle Fraud: अरुणाचल से महाराष्ट्र आए 60 वाहन नकली, फर्जी इंजन और चेचिस नंबर का भंडाफोड़; वसई RTO का बयान

Thu, 11 Jan 2024 04:53 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 11 Jan 2024 04:53 PM IST
सार

महाराष्ट्र में वाहनों को लेकर बड़े घोटाले या फर्जीवाड़े की बात सामने आई है। वसई RTO की तरफ से जारी बयान में कहा गया, फर्जी चेसिस, इंजन नंबर वाले अरुणाचल प्रदेश के 60 वाहन जब्त किए गए हैं। इसे बड़े पैमाने पर वाहन घोटाला माना जा रहा है।

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Maharashtra Vasai RTO 60 vehicles Arunachal fake chassis engine activists huge scam
वसई RTO ने 60 नकली वाहनों का पता लगाया (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाराष्ट्र के परिवहन अधिकारियों ने पिछले तीन साल में पंजीकृत अरुणाचल प्रदेश के 60 ऐसे वाहनों का पता लगाया है, जो असली नहीं हैं। पालघर जिले के वसई क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में दोबारा पंजीकृत 60 वाहनों पर फर्जी इंजन और चेसिस नंबर पाए हैं। अरुणाचल प्रदेश से आई इन गाड़ियों में अधिकांश वाहन- बस और ट्रक हैं। ट्रांसपोर्टर और वाहनों से जुड़े कार्यकर्ता इसे बहुत बड़ा 'घोटाला' बता रहे हैं।
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वसई आरटीओ कार्यालय का क्षेत्राधिकार पालघर जिले पर है। RTO का दावा है कि इन वाहनों को महाराष्ट्र में ट्रांसफर कराने से पहले अरुणाचल प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के साथ पंजीकृत किया गया होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इंजन और चेसिस नंबर वाहन निर्माताओं के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक आधिकारिक दस्तावेजों से वाहनों से जुड़े फर्जीवाड़े का संकेत मिलता है।
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34 बसों और 26 ट्रकों का मामला
दस्तावेजों से पता चलता है कि वसई आरटीओ ने संबंधित ऑटोमोबाइल निर्माताओं के अधिकृत डीलरों से संपर्क कर वाहन रिकॉर्ड का सत्यापन कराया। गड़बड़ी का पता लगने के बाद RTO ने पिछले महीने पुलिस के पास मामला दर्ज कराया। महाराष्ट्र के अन्य जिलों और आरटीओ को भी इस संबंध में आगाह किया गया है। वसई आरटीओ ने इन 60 वाहनों में शामिल, 34 बसों और 26 ट्रकों को ट्रैक करने की जरूरत पर जोर दिया है।
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नकली चेसिस के साथ इंजन पर भी गलत नंबर
बड़े पैमाने पर वाहनों के कथित फर्जीवाड़े को लेकर पिछले साल, वाशी आरटीओ ने मामला दर्ज किया था। अरुणाचल में पंजीकृत लगभग आधा दर्जन बसों के संबंध में नकली कागजातों के आरोप में यह मामला दर्ज किया गया था। ट्रांसपोर्टरों और कार्यकर्ताओं के मुताबिक आरटीओ के अधिकारियों और कर्मचारियों को वाहन के चेसिस और इंजन नंबर से छेड़छाड़ के मामले पकड़ने की ट्रेनिंग दी जाती है। केवल एक नजर में छेड़छाड़ पकड़े जा सकते हैं। उन्होंने हैरानी जताई है कि वसई आरटीओ के अधिकारी इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के नकली चेसिस और इंजन नंबरों को पकड़ने में कैसे नाकाम रहे? 

तीन वर्षों में पकड़े गए 60 नकली वाहन
अधिकारियों को संदेह है कि टैक्स से बचने या कानून के अनुपालन से बचने के लिए वाहनों को पूर्वोत्तर राज्य से बाहर भेजे जाने की आशंका है। वसई आरटीओ के उप क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी दशरथ वाघुले ने कहा कि परिवहन आयुक्त कार्यालय के निर्देश पर, उन्होंने पिछले तीन वर्षों में इन 60 वाहनों के बारे में पता चला। इनका अरुणाचल प्रदेश में पंजीकरण हुआ है। वाघुले ने कहा, पुलिस इस मामले में गहन जांच कर रही है। प्रथम दृष्टया लगता है कि वाहनों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे अरुणाचल प्रदेश में पंजीकृत कराया गया। आम तौर पर वाहन खरीदने-बेचने या मालिक का पता बदलने पर वाहन पंजीकरण दूसरे राज्यों में कराए जाते हैं।

क्या RTO के वरिष्ठ अधिकारियों को कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला?
वाहनों से जुड़े कार्यकर्ता शिरकांत कर्वे ने सवाल किया, एक विशेष राज्य से फर्जी चेसिस और इंजन नंबर वाले इतने सारे वाहन वसई आरटीओ में कैसे पंजीकृत करा लिए गए। हर वाहन का फिटनेस रिन्यू कराना पड़ता है। महाराष्ट्र स्थानांतरित होने पर मोटर वाहन कानून के कई प्रावधानों का पालन करना होता है। आरटीओ निरीक्षकों को पूरी जांच करनी होती है। उन्होंने सवाल किया कि 60 वाहनों के कागज नकली पाए गए हैं, ऐसे में क्या वसई आरटीओ के वरिष्ठ अधिकारियों को कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला?

कई चरणों पर सत्यापन के बाद पंजीकरण, लेकिन...
गोपनीयता की शर्त पर एक वरिष्ठ आरटीओ निरीक्षक ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, वाहन मालिक पहले उस कार्यालय के सहायक आरटीओ के पास आवेदन करता है जहां दोबारा पंजीकरण कराना है। पहले से जिस आरटीओ के पास पंजीकरण है, वहां से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) सहित दूसरे जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाता है। सहायक आरटीओ निरीक्षक वाहन की फिटनेस की जांच करते हैं। चेसिस और इंजन नंबर का सत्यापन भी होता है। इतने चरणों के बाद ही दोबारा पंजीकरण का नियम है।

बसों के बैंक लोन, जबकि ट्रकों में बीएस-IV इंजन का मामला
आरटीओ अधिकारियों और एजेंटों के अनुसार, जिन बसों की बात हो रही है, फाइनांस के बाद बैंक लोन का भुगतान न होने की सूरत में, बैंकों ने इनकी नीलामी कराई होगी। ट्रक बीएस-IV इंजन वाले हैं। डीलर सरकार की तरफ से समय सीमा से पहले इन्हें बेचने में विफल रहे होंगे। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वाहनों को पहले अरुणाचल प्रदेश में पंजीकृत कराया गया। इसके बाद महाराष्ट्र में वाहनों के दोबारा रजिस्ट्रेशन के लिए वहां से एनओसी का जुगाड़ किया गया। इस समय राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन वाहन पंजीकरण प्रणाली की शुरुआत नहीं हुई थी।

अधिकारियों ने सूचना मिलने के बाद अनदेखी की
बस ऑपरेटरों के अनुसार, वसई आरटीओ में अरुणाचल प्रदेश-पंजीकृत बसों की सूची और भी लंबी हो सकती है। अभी उन वाहनों का डेटा उपलब्ध नहीं होने की आशंका है, जिनका महाराष्ट्र या पड़ोसी राज्यों के दूसरे आरटीओ में ट्रांसफर करा लिया गया है। बस ऑपरेटरों के नेता केवी शेट्टी ने दावा किया, 'उन्होंने अरुणाचल-पंजीकृत बसों के बारे में वसई आरटीओ सहित परिवहन अधिकारियों को सचेत किया था, लेकिन अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया।

CBI जांच का आदेश देने की मांग
शेट्टी के मुताबिक, यह बड़ा घोटाला है जिसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब आरटीओ बसों के मौजूदा मालिकों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। सबसे पहले उचित सत्यापन के बिना वाहनों का दोबारा पंजीकरण करने वाले निरीक्षकों और एआरटीओ के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

कोरोना महामारी में हुई कागज से छेड़छाड़
इस मामले में एक आरटीओ एजेंट ने कहा, कोविड-19 महामारी के दौरान, बैंकों ने मासिक किश्त का भुगतान न होने पर बसें जब्त कर लीं। बैंकों ने वाहनों की नीलामी कराई, लेकिन उन पर सरकारी टैक्स बकाया था। बसों को खरीदने वाले लोगों ने टैक्स चुकाने के बजाय चेसिस और इंजन नंबर के साथ छेड़छाड़ कर इन्हें दूसरे राज्यों में पंजीकृत करा लिया। अरुणाचल प्रदेश में पंजीकरण से पहले, नीलाम की गई बसों के पंजीकरण आधिकारिक तौर पर रद्द नहीं किए गए थे, क्योंकि उन पर टैक्स बकाया थे। इस सूरत में एक ही बस दो चेसिस और इंजन नंबरों के साथ दो आरटीओ में पंजीकृत है।


मुंबई में आठ साल से पुराने वाहनों पर पाबंदी
आरटीओ अधिकारियों के अनुसार, 8 साल से अधिक पुराने वाहनों को मुंबई में चलने की अनुमति नहीं है। ऐसे में आठ साल से अधिक समय पहले खरीदे गए वाहनों के फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए। खरीदने की तारीख से छेड़छाड़ के बाद इन्हें अरुणाचल प्रदेश में पंजीकृत कराया गया। महाराष्ट्र में फिर से पंजीकृत कराने के लिए कागजात से फिर छेड़छाड़ की गई।
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