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महाराष्ट्रः उद्धव ठाकरे के मनोनयन का मसला अभी भी अधर में, 10 दिन बीते, राज्यपाल ने नहीं लिया फैसला

Sat, 18 Apr 2020 02:48 AM IST
योगेश साहू सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई।
सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 18 Apr 2020 02:48 AM IST
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Maharashtra: Uddhav Thackerays nomination For MLC issue still Pending, 10 days passed, Governor did not take decision
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

एक तरफ महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रसार को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर जबरदस्त दबाव है, वहीं, दूसरी ओर उनके विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) मनोनीत किए जाने को लेकर जारी असमंजस भी खत्म नहीं हो पा रहा है। राज्य मंत्रिमंडल ने उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत करने का प्रस्ताव 10 दिन पहले यानि 6 अप्रैल को ही राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के पास भेज दिया था। लेकिन राज्यपाल ने इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। 

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सूत्रों का कहना है कि उद्धव को एमएलसी मनोनीत करने के संबंध में राज्यपाल अभी कानूनी राय ले रहे हैं। लेकिन, राज्यपाल के निर्णय लेने में विलंब के चलते राज्य में तीन दलों (शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी) की महाविकास आघाड़ी सरकार के भविष्य पर सवाल बना हुआ है।
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कई दिनों से सोशल मीडिया पर पोस्ट देखने को मिल रही है कि उद्धव ठाकरे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। महाराष्ट्र एनसीपी के महासचिव रवीन्द्र पवार कहते हैं कि यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा देते हैं तो इसे पूरे मंत्रिमंडल का इस्तीफा माना जाएगा, लेकिन यह कोरी बकवास से ज्यादा कुछ भी नहीं है।
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पवार के मुताबिक महाविकास आघाड़ी सरकार स्थिर है और अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी। शिवसेना प्रवक्ता और सांसद संजय राउत भी कह चुके हैं कि किसी भी परिस्थिति में मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देंगे।   

मनोनयन के लिए तीन नाम पर भी है पेच
राज्य सरकार की ओर से जनवरी माह में ही दो नाम राज्यपाल के पास भेजे जा चुके हैं। इनमें एनसीपी नेता शिवाजीराव गर्जे और एनसीपी मीडिया सेल की प्रमुख अदिति नलावडे का नाम शामिल था। अब तीसरा उद्धव ठाकरे को मनोनीत करने का प्रस्ताव भेजा गया है।

पहले भेजे गए मनोनयन के दोनों नामों से संबंधित पत्र भी राज्यपाल के पास है। चर्चा है कि राज्यपाल कोश्यारी ने इन दोनों को इसलिए मनोनीत नहीं किया क्योंकि दोनों ही साहित्य, कला, विज्ञान, सहकारिता और समाजसेवा से संबंधित न होकर राजनीतिक व्यक्ति हैं और दूसरा यह कि दोनों रिक्त पद का कार्यकाल 6 जून को समाप्त हो रहा है। इसी के चलते तीन नामों के लेकर पेच बना हुआ है।

क्या है उद्धव के सामने संकट

28 नवंबर 2019 को उद्धव ठाकरे ने जब मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उसी समय राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा था कि छह महीने के अंदर विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य होना आवश्यक है। दरअसल संविधान के अनुच्छेद 164 (4) के तहत किसी भी मंत्री या मुख्यमंत्री को छह महीने के अंदर विधानसभा अथवा विधान परिषद का सदस्य बनना आवश्यक है।

आगामी 27 मई को उद्धव को मुख्यमंत्री बने 6 महीने पूरे हो जाएंगे। लेकिन वे अभी तक किसी सदन के सदस्य नहीं बन पाए हैं। मौजूदा समय में कोरोना महामारी के चलते चुनाव आयोग ने अनिश्चितकाल के लिए सभी तरह के चुनाव रद्द कर दिए हैं। ऐसी परिस्थिति में महाराष्ट्र में राजनीतिक असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

क्या है विकल्प

महाराष्ट्र में विधान परिषद के 9 पद रिक्त हैं। यदि 3 मई तक कोरोना वायरस का संकट थम जाता है और लॉकडाउन खत्म हो जाता है तो संभव है कि इन सीटों के लिए चुनाव हों। यदि 15 दिन में चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर 28 मई से पहले विधानपरिषद चुनाव के नतीजे घोषित हो जाएं तो उद्धव ठाकरे चुनाव जीतने पर मुख्यमंत्री पद पर बरकरार रह सकते हैं।

दूसरा विकल्प यह है कि राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाने वाले 12 सदस्यों में से रिक्त दो में से एक पद पर राज्यपाल उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनीनीत कर दें। तीसरा विकल्प है, उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर कुछ दिन बाद फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ लें।

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