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महाराष्ट्रः आदित्य ठाकरे के काफिले पर पथराव, शिव संवाद यात्रा के दौरान औरंगाबाद में हुआ हंगामा
Wed, 08 Feb 2023 06:59 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 08 Feb 2023 06:59 PM IST
सार
जनसभा के दौरान भी पत्थर फेंके गए। जब आदित्य ठाकरे जनसभा को संबोधित कर जा रहे थे, तब भी उनके काफिले पर कुछ पत्थर फेंके गए।
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aditya thackeray
- फोटो : twitter
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विस्तार
महाराष्ट्र के औरंगाबाद में शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के काफिले पर पथराव के आरोप लगे हैं। आदित्य ठाकरे शिव संवाद यात्रा के दौरान वैजापुर के महलगांव में एक जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे। इस दौरान उनकी जनसभा के दौरान हंगामा हुआ और जब आदित्य ठाकरे कार्यक्रम से जा रहे थे तो उनके काफिले पर पथराव भी हुआ। कुछ लोगों ने आदित्य ठाकरे की गाड़ी के सामने आकर रास्ता रोकने की भी कोशिश की और नारेबाजी भी की।
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विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने बताया कि जनसभा के दौरान भी पत्थर फेंके गए। जब आदित्य ठाकरे जनसभा को संबोधित कर जा रहे थे, तब भी उनके काफिले पर कुछ पत्थर फेंके गए। लोगों की भीड़ स्थानीय विधायक रमेश बोरनारे के समर्थन में नारेबाजी कर रही थी। दानवे ने कहा कि यह दो गुटों के बीच झड़प कराने की असामाजिक तत्वों की कोशिश थी। अंबादास दानवे ने कहा कि उन्होंने महाराष्ट्र के डीजीपी को पत्र लिखकर आदित्य ठाकरे की सुरक्षा में हुई चूक की जानकारी दी है। दानवे ने मामले को गंभीर बताते हुए डीजीपी से औरंगाबाद की घटना की जांच कराने और जरूरी कदम उठाने की मांग की है। हालांकि पुलिस का कहना है कि कोई पथराव नहीं हुआ और सिर्फ नारेबाजी की घटना हुई।
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बताया जा रहा है कि मंगलवार को रमा माता की जयंती थी। इसके तहत महलगांव में एक रैली निकाली गई थी, जिसमें डीजे बज रहा था। जहां से रैली निकाली जा रही थी, वहां आदित्य ठाकरे की सभा का आयोजन हो रहा था। इसी दौरान कुछ लोगों ने आदित्य ठाकरे की सभा के बाहर पुलिस प्रशासन और आदित्य ठाकरे के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इस पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर किया। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने आदित्य ठाकरे के काफिले को रोकने की कोशिश की और इसी दौरान आरोप लगा कि काफिले पर पथराव भी किया गया।
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महाराष्ट्र की असंवैधानिक सरकार जल्दी ही गिर जाएगी- आदित्य ठाकरे
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली 'असंवैधानिक' राज्य सरकार लंबे समय तक नहीं चलेगी। ये सरकार बहुत जल्द गिर जाएगी। शिवसेना (यूबीटी) नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने बुधवार को जालना में एक रैली को संबोधित करते हुए ये दावा किया।
अपनी 'शिव संवाद यात्रा' के तहत जालना जिले के बदनापुर में एक रैली को संबोधित करते हुए शिवसेना अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ने कहा कि महाराष्ट्र के लोग जानते हैं कि यह सरकार कैसे चलाई जा रही है। यह असंवैधानिक सरकार ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगी। यह बहुत जल्द गिर जाएगी।
आदित्य की यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिवसेना के 16 बागी विधायकों की अयोग्यता से संबंधित मामले की सुनवाई 14 फरवरी से शुरू होने से पहले आई है। आदित्य ठाकरे ने आगे आरोप लगाया कि मैंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से कहा था और महान हस्तियों का अपमान करने के लिए राज्य के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को हटाने की चुनौती दी थी। आरोप लगाते हुए आदित्य ने कहा राज्यपाल ने सार्वजनिक आइकन और महाराष्ट्र का अपमान किया था, लेकिन शिंदे ने एक शब्द भी नहीं कहा।
विधायकों की अयोग्यता पर पहले फैसला आना चाहिए- उद्धव ठाकरे
चुनाव आयोग के निर्णय से पहले विधायकों की अयोग्यता पर न्यायालय का फैसला आना चाहिए। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुधवार को ये बयान दिया है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना के बागी विधायकों की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पहले आना चाहिए और उसके बाद निर्वाचन आयोग को इस पर निर्णय लेना चाहिए कि मूल पार्टी किसकी है।
उद्धव ठाकरे ने क्यों दिया ये जवाब?
दरअसल, उद्धव ठाकरे से सवाल किया गया था कि निर्वाचन आयोग ने शिवसेना के नाम और उसके चिह्न ‘धनुष-बाण’ पर रोक क्यों लगा दी, जबकि प्रतिद्वंद्वी एकनाथ शिंदे गुट ने अभी तक इसका इस्तेमाल नहीं किया है। इसी का जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने यह बयान दिया।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि शीर्ष अदालत बागी विधायकों की अयोग्यता संबंधी मामले पर 14 फरवरी से दैनिक आधार पर सुनवाई शुरू करेगी। उन्होंने आगे कहा, 'विधायकों ने जून में बगावत की, जिसके बाद शिवसेना ने उन्हें अयोग्य घोषित कराने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था जबकि बागियों ने जुलाई में पार्टी पर अपना दावा किया।
एकनाथ शिंदे पर भी साधा निशाना
इस दौरान उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा खुद को पर भी कटाक्ष किया। उद्धव ने कहा कि ‘शिवसेना प्रमुख’ शब्द का उपयोग उनके पिता और पार्टी के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे द्वारा किया गया था। अपने पिता के निधन के बाद उन्होंने पार्टी प्रमुख की भूमिका संभाली। शिवसेना के संविधान में 'प्रमुख नेता' का कोई पद नहीं है।