महाराष्ट्र: पढ़ें सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र भाजपा के वकील रोहतगी ने क्या तर्क दिए
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महाराष्ट्र में शनिवार सुबह जो उलटफेर हुआ उसने सरकार बनाने की तैयारी कर रही शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी को जोर का झटका दिया। जिसके बाद पूरे दिन सियासी ड्रामा चला और शाम को तीनों दलों ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। रविवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं ने जल्द से जल्द बहुमत परीक्षण कराने की मांग की। वहीं महाराष्ट्र भाजपा की तरफ से अदालत में पेश हुए मुकुल रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल को अधिकार है कि वो मुख्यमंत्री के तौर पर किसे चुनते हैं। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। अब मामले की दोबारा सुनवाई सोमवार को होगी।
सदन कोर्ट का, कोर्ट सदन का करता है सम्मान
महाराष्ट्र भाजपा निर्दलीय विधायकों की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी न्यायालय में पेश हुए। उन्होंने कहा कि सदन अदालत का और अदालत सदन का सम्मान करता है। यही सच है वरना कल को विधानसभा ऐसा विधेयक पास कर सकती है कि शीर्ष अदालत दो साल में सारे मामले निपटाए। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इसमें दो राय नहीं है कि शक्ति परीक्षण बहुमत साबित करने का सबसे अच्छा तरीका है।
राजनीतिक पार्टी के पास नहीं है अपील का अधिकार
रोहतगी ने कहा, 'मैं भाजपा के कुछ विधायकों की तरफ से पेश हुआ हूं। यह राज्यपाल का विशेषाधिकार है। इसकी सुनवाई पहले उच्च न्यायालय में होनी चाहिए। रविवार को सुनवाई की जरुरत नहीं थी। किसी भी राजनीतिक पार्टी को अपील करने का अधिकार नहीं है। यहां सभी अपीलकर्ता पार्टियां हैं। पहले किसी भी केस में ऐसा नहीं हुआ है। कल प्रोटेम स्पीकर की शपथ, विधायकों की शपथ और फिर राज्यपाल के संक्षिप्त भाषण के बाद बहुमत परीक्षण करवाया जा सकता है।'
क्या और किस प्रक्रिया के तहत हुआ
उन्होंने आगे कहा, 'दो-तीन दिनों का समय दिया जा सकता है। सभी को अपने हलफनामें अदालत के सामने रखने चाहिए। राज्यपाल के पास किसी को मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार है। अब बहुमत परीक्षण होगा।' इसपर जस्टिस रमन्ना ने कहा कि हर प्रक्रिया के लिए नियम तय हैं। जिसपर रोहतगी ने कहा कि सवाल यह उठता है कि अदालत क्या करे और क्या कर सकती है। इसपर जस्टिस भूषण ने कहा कि हमें तो यह भी नहीं पता है कि क्या और किस प्रक्रिया के तहत हुआ है?
शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस के पास नहीं है सरकार बनाने का अधिकार
केंद्र सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के पास सरकार बनाने का मौलिक अधिकार नहीं है और उनकी याचिका को मंजूरी नहीं दी जा सकती है। पीठ ने आदेश पारित करने के लिए सॉलिसिटर जनरल से सोमवार सुबह साढ़े दस बजे राज्यपाल के पत्र को पेश करने के लिए कहा है।