शशिकांत शिंदे का बड़ा दावा: NCP से मजबूर होकर अलग हुए थे अजित पवार, विलय के बाद संभालने वाले थे पार्टी की कमान
एनसीपी (एसपी) के महाराष्ट्र अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने दावा किया कि अदृश्य ताकतों और दबाव के कारण अजित पवार को मूल एनसीपी छोड़नी पड़ी। फरवरी 12 को दोनों गुटों के विलय की घोषणा होनी थी और अजित पवार को संयुक्त पार्टी का नेतृत्व सौंपा जाना था।
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के महाराष्ट्र अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दिवंगत अजित पवार को अदृश्य ताकतों, धमकियों और झूठे आरोपों के जाल के कारण मूल एनसीपी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। फरवरी 2026 के पार्टी मुखपत्र राष्ट्रवादी में प्रकाशित श्रद्धांजलि लेख में शिंदे ने कहा कि बीते चार-पांच महीनों से पिछली गलतियों को सुधारने की प्रक्रिया शांतिपूर्वक चल रही थी और दोनों गुटों के विलय की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी थी।
बयान पर उठा विवाद
शिंदे ने दावा किया कि हाल के नगर निगम और जिला परिषद चुनाव अभियानों में अजित पवार की सक्रिय भूमिका उनके घर वापसी के संकेत के रूप में देखी जा रही थी। हालांकि, शिंदे के अदृश्य ताकतों वाले बयान पर एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने आपत्ति जताई। तटकरे ने कहा कि अजित पवार 2014 से ही भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन के पक्ष में थे और उनका मानना था कि इससे राजनीतिक स्थिरता और बेहतर शासन संभव होगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि एनसीपी, एनडीए गठबंधन का हिस्सा है और आगे भी रहेगा। वहीं, पार्टी नेता सुरज चव्हाण ने बताया कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्र पवार को दोनों गुटों के विलय पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है।
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12 फरवरी को होना था औपचारिक विलय
शिंदे के अनुसार, 12 फरवरी को पार्टी प्रमुख शरद पवार की मौजूदगी में दोनों गुटों के औपचारिक विलय का फैसला लिया जाना था। इतना ही नहीं, विलय के बाद एकीकृत एनसीपी की कमान अजित पवार को सौंपे जाने की योजना भी तय हो चुकी थी। लेकिन 28 जनवरी को विमान दुर्घटना में अजित पवार के निधन के बाद यह प्रक्रिया अधूरी रह गई। शिंदे ने इसे किस्मत का हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को उनके सपने को पूरा करना चाहिए।
क्या होगा आगे?
अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी के दोनों गुटों के भविष्य को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं। यदि विलय की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। शशिकांत शिंदे ने अपने लेख के अंत में कहा कि अजित पवार को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि पार्टी एकजुट होकर मजबूत बने, वही पार्टी जिसे उन्होंने दशकों तक अपने परिश्रम से खड़ा किया।
2023 में क्यों टूटी थी एनसीपी?
गौरतलब है कि जुलाई 2023 में एनसीपी में बड़ा विभाजन हुआ था, जब अजित पवार ने तत्कालीन एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होने का फैसला किया। इसके बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गई। अजित पवार गुट को ‘एनसीपी’ नाम और ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न मिला, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को ‘नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार)’ नाम दिया गया।
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