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महाराष्ट्र में फिर गरमाई राजनीति: शरद पवार की बैठक से नदारद रहे रोहित, नाराजगी की खबरों को बताया अफवाह
Wed, 20 May 2026 03:18 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 20 May 2026 03:18 PM IST
सार
शरद पवार की यह बैठक आगामी चुनावों और सांगठनिक मजबूती के लिहाज से बेहद अहम है। रोहित पवार की अनुपस्थिति भले ही किसानों के जल संकट से जुड़ी थी, लेकिन महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता और सत्ताधारी गुट की आपसी खींचतान के बीच एनसीपी शरद पवार इसे अपने पुनरुद्धार के बड़े अवसर के रूप में देख रही है।
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रोहित पवार
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने बुधवार को एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश और महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करना और पार्टी के पुनरुद्धार के लिए मजबूत रणनीतियां तैयार करना था। दक्षिण मुंबई के वाईबी चव्हाण सेंटर में आयोजित इस बैठक में एनसीपी के सांसदों, विधायकों और 2024 के विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। बैठक में आगामी 10 जून को होने वाले पार्टी के स्थापना दिवस कार्यक्रम की तैयारियों पर भी गहन मंथन हुआ।
रोहित पवार की अनुपस्थिति और कयासों पर विराम
इस अहम बैठक से शरद पवार के प्रपौत्र और पार्टी विधायक रोहित पवार नदारद रहे। उनके इस कदम से सियासी गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। हालांकि, रोहित पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने साफ कहा कि उनके नाराज होने की खबरें अफवाह मात्र हैं और वे सभी पवार साहब के मार्गदर्शन में काम करने वाले कार्यकर्ता हैं।
यह भी पढ़ें: UP: संविधान की प्रति लेकर राहुल बोले- RSS और प्रधानमंत्री इसे फाड़ने की कोशिश कर रहे; पढ़ें पांच बड़े बयान
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किसानों के लिए पानी का संकट बना वजह
रोहित पवार ने बैठक में न आने की वजह बताते हुए कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र कर्जत-जामखेड अहिल्यानगर जिला के कुकडी क्षेत्र और बारामती में जनई-शिरसाई परियोजना से किसानों को मिलने वाले पानी का मुद्दा बेहद गंभीर हो गया था। इसी वजह से उन्हें अचानक पुणे के सिंचाई भवन जाना पड़ा। उन्होंने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर अधिकारियों पर दबाव न होता और उन्होंने पानी छोड़ने का अपना वादा निभाया होता, तो वे पुणे जाने के बजाय मुंबई की पूर्व-निर्धारित बैठक में शामिल हो सकते थे। रोहित ने कहा कि पूरे महाराष्ट्र में किसान और आम लोग भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं, जिसके लिए सड़कों पर उतरकर कड़ा संघर्ष करने की जरूरत है।
रोहित के भाजपा में शामिल होने की चर्चा
पिछले कुछ दिनों से रोहित पवार के भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। इसके पीछे वजह यह है कि उन्होंने अजीत पवार की मौत की जांच की बात की थी। इसके बाद से ही सूबे के सियासी इतिहास को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि रोहित पवार भी पाला बदल सकते हैं, जिसे भुनाने के लिए विरोधी गुटों ने भी कई बयान दिए। हालांकि, रोहित पवार ने इन तमाम चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि अगर मुझे भाजपा में शामिल होना होता, तो मैं पहले ही हो गया होता। मैं इतनी मेहनत और संघर्ष क्यों करता? अगर हम इन्हीं अफ़वाहों में उलझे रहेंगे, तो लोगों के बारे में कौन सोचेगा?
सत्ताधारी गुट में मची आंतरिक कलह
दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले सत्ताधारी एनसीपी गुट में भारी आंतरिक कलह की खबरें आ रही हैं। चर्चा है कि पार्टी के दिग्गज नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को किनारे कर दिया गया है और कमान सुनेत्रा के बेटों पार्थ और जय पवार के हाथों में जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में सुनील तटकरे ने पिछले हफ्ते मुंबई में शरद पवार से मुलाकात भी की थी, जिससे राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।
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रोहित पवार की अनुपस्थिति और कयासों पर विराम
इस अहम बैठक से शरद पवार के प्रपौत्र और पार्टी विधायक रोहित पवार नदारद रहे। उनके इस कदम से सियासी गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। हालांकि, रोहित पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने साफ कहा कि उनके नाराज होने की खबरें अफवाह मात्र हैं और वे सभी पवार साहब के मार्गदर्शन में काम करने वाले कार्यकर्ता हैं।
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किसानों के लिए पानी का संकट बना वजह
रोहित पवार ने बैठक में न आने की वजह बताते हुए कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र कर्जत-जामखेड अहिल्यानगर जिला के कुकडी क्षेत्र और बारामती में जनई-शिरसाई परियोजना से किसानों को मिलने वाले पानी का मुद्दा बेहद गंभीर हो गया था। इसी वजह से उन्हें अचानक पुणे के सिंचाई भवन जाना पड़ा। उन्होंने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर अधिकारियों पर दबाव न होता और उन्होंने पानी छोड़ने का अपना वादा निभाया होता, तो वे पुणे जाने के बजाय मुंबई की पूर्व-निर्धारित बैठक में शामिल हो सकते थे। रोहित ने कहा कि पूरे महाराष्ट्र में किसान और आम लोग भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं, जिसके लिए सड़कों पर उतरकर कड़ा संघर्ष करने की जरूरत है।
रोहित के भाजपा में शामिल होने की चर्चा
पिछले कुछ दिनों से रोहित पवार के भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। इसके पीछे वजह यह है कि उन्होंने अजीत पवार की मौत की जांच की बात की थी। इसके बाद से ही सूबे के सियासी इतिहास को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि रोहित पवार भी पाला बदल सकते हैं, जिसे भुनाने के लिए विरोधी गुटों ने भी कई बयान दिए। हालांकि, रोहित पवार ने इन तमाम चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि अगर मुझे भाजपा में शामिल होना होता, तो मैं पहले ही हो गया होता। मैं इतनी मेहनत और संघर्ष क्यों करता? अगर हम इन्हीं अफ़वाहों में उलझे रहेंगे, तो लोगों के बारे में कौन सोचेगा?
सत्ताधारी गुट में मची आंतरिक कलह
दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले सत्ताधारी एनसीपी गुट में भारी आंतरिक कलह की खबरें आ रही हैं। चर्चा है कि पार्टी के दिग्गज नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को किनारे कर दिया गया है और कमान सुनेत्रा के बेटों पार्थ और जय पवार के हाथों में जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में सुनील तटकरे ने पिछले हफ्ते मुंबई में शरद पवार से मुलाकात भी की थी, जिससे राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।