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महाराष्ट्र का राजनीतिक तमाशा, 'कभी हां-कभी ना' में उलझ गई सत्ता की कुर्सी

Tue, 12 Nov 2019 07:27 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अनिल पांडेय Updated Tue, 12 Nov 2019 07:27 PM IST
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Maharashtra Govt Formation LIVE: Union Cabinet Recommends President Rule in State says source
राष्ट्रपति शासन - फोटो : Amar Ujala

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही राजनीतिक दांवपेच शुरू हो गए थे। भाजपा और शिवसेना सरकार बनाने को तैयार थे, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर उलझन बढ़ती चली गई। शिवसेना मुख्यमंत्री पद से कम के लिए तैयार नहीं थी और भाजपा को यह मंजूर नहीं था। शिवसेना ने तो मीठे-नमकीन बिस्किट की तरह 50:50 यानी ढाई-ढाई साल का प्रस्ताव भी रखा। लेकिन भाजपा नहीं मानी।

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खींचतान का नतीजा यह रहा कि 30 साल पुराने भाजपा-शिवसेना गठबंधन में दरार आ गई। सरकार बनने में देरी होते देख राज्यपाल ने भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन पार्टी ने मना कर दिया। अब राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शिवसेना को बुलाया।

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बस यही से शुरू हुआ राजनीतिक तमाशा। शिवसेना ने राज्यपाल से मुलाकात करने का फैसला किया। 11 नवंबर को सुबह से शुरू हुआ राजनीतिक धारावाहिक देर रात तक चलता रहा। समाचार चैनल पूरे खेल की लाइव कमेंट्री करते रहे। एक से बढ़कर एक दावों की हवा आई और गई। पूरा दिन मुंबई-दिल्ली में बैठकों, फोन कॉल्स और उतार-चढ़ाव से भरपूर रहा। लेकिन कांग्रेस की दिल्ली में शाम चार बजे से तीन घंटे तक चली बैठक के चलते शिवसेना को राज्यपाल द्वारा मिला वक्त निकल गया।

सरकार न बनते देख संवैधानिक संकट से बचने के लिए राज्य के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा कर दी, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास भेज दिया। जिस पर राष्ट्रपति ने मुहर लगा दी और अब फिलहाल के लिए राज्य में सरकार बनाने का तमाशा थम गया है।

11 नवंबर को इस तरह से शुरू हुआ था राजनीतिक ड्रामा:

  • सुबह 8.15 बजे: दिल्ली में शिवसेना सांसद और केंद्रीय मंत्री अरविंद सावंत ने इस्तीफा देने की घोषणा की।
  • सुबह 10.10 बजे: संजय राउत ने भाजपा जब जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बना सकती है तो शिवसेना क्यों नहीं कांग्रेस-एनसीपी का समर्थन लेकर सरकार नहीं बना सकती
  • सुबह 10.20 बजे: अहदम पटेल, केसी वेणुगोपाल और मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में हिस्सा लेने के लिए सोनिया गांधी के घर पहुंचे
  • सुबह 10.50 बजे: शरद पवार के घर एनसीपी के कोर ग्रुप की बैठक
  • सुबह 11.45 बजे: उद्धव से बातचीत के बाद संजय राउत और रश्मि ठाकरे मातोश्री से बाहर निकले
  • सुबह 11.50 बजे: शिवसेना ने सभी विधायकों से समर्थन के हस्ताक्षर पत्र देने को कहा
  • दोपहर 12.00 बजे: कांग्रेस कार्यसमिति ने महाराष्ट्र के प्रमुख नेताओं को दिल्ली बुलाने का फैसला किया। चार बजे बैठक
  • दोपहर 12.45 बजे: एनसीपी ने कहा कि वैकल्पिक सरकार देना हमारी जिम्मेदारी, कांग्रेस के साथ मिलकर फैसला लेंगे: एनसीपी
  • दोपहर 1.00 बजे: उद्धव और आदित्य ठाकरे शरद पवार से मिलने के लिए मातोश्री से निकले
  • दोपहर 1.30 बजे: उद्धव-आदित्य और शरद पवार की बैठक। कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर विचार
  • दोपहर 2.20 बजे: कांग्रेस विधायकों ने जयपुर छोड़ा
  • दोपहर 2.40 बजे: शिवसेना विधायकों ने समर्थन के पत्र हस्ताक्षर करके दिए
  • दोपहर 3.40 बजे: संजय राउत सीने में दर्द के बाद लीलावती अस्पताल में भर्ती
  • शाम 4.00 बजे: महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं के साथ सोनिया गांधी की बैठक
  • शाम 5.20 बजे: एनसीपी ने शिवसेना को समर्थन का पत्र दिया
  • शाम 5.50 बजे: शिवसेना सूत्रों ने कहा कि सत्ता समीकरण हल हो गए। फोन पर चर्चाओं के बाद एनसीपी-कांग्रेस की तरफ से समर्थन की हरी झंडी मिल गई है
  • शाम 6.05 बजे: शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे और आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में राज्यपाल से मिलने के लिए निकले
  • शाम 6.45 बजे: एकनाथ शिंदे और आदित्य ठाकरे राज्यपाल के पास पहुंचे। कहा गया कि अपने विधायकों के साथ एनसीपी-कांग्रेस का समर्थन पत्र उन्हें सौंपा
  • शाम 7.15 बजे: कांग्रेस ने दिल्ली में वक्तव्य जारी किया कि उसने शिवसेना को समर्थन पर फैसला नहीं किया है। सोनिया गांधी फिर शरद पवार से बात करेंगी
  • शाम 7.30 बजे: आदित्य ठाकरे ने मीडिया को बताया कि उन्हें एनसीपी-कांग्रेस के विधायकों के समर्थन वाले हस्ताक्षरित पत्र नहीं मिले। वह सरकार बनाने को तैयार हैं मगर राज्यपाल से 48 घंटे की मांग की। जिसे राज्यपाल ने ठुकरा दिया।
  • रात 8.30 बजे: राज्यपाल ने एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता दिया।


दूसरे दिन भी जारी रहे दांवपेच

दूसरे दिन यानी मंगलवार को भी राजनीतिक दांवपेच जारी रहे। सुबह एनसीपी के मुखिया शरद पवार से जब पूछा गया कि क्या कांग्रेस की तरफ से देर हो रही है तो उन्होंने कहा, 'मैं कांग्रेस से बात करूंगा।' इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिवसेना नेता अरविंद सावंत का केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा स्वीकार कर लिया। शिवसेना के एनडीए से अलग होने का संकेत देते हुए सावंत ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया था।

उधर मुंबई में एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और भाजपा नेता आशीष शेलार मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती शिवसेना सांसद संजय राउत से मिलने पहुंचे।

इसी बीच शिवसेना के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने दावा किया कि सरकार शिवसेना की ही आएगी। उन्होंने कहा है कि धीरे-धीरे माहौल बेहतर होगा और सेना सरकार बनाएगी।

ओवैसी ने भी किया हमला 

उधर, एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'हम लोग ना भाजपा की अगुआई वाली सरकार को समर्थन देंगे और ना ही शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार को। हमलोग अपने स्टैंड पर कायम हैं। मुझे अब खुशी है कि कांग्रेस-एनसीपी शिवसेना को समर्थन देने जा रही है। इससे लोगों को पता चलेगा कि कौन सा दल किसका वोट काट रही है।'

जब ओवैसी से सवाल किया गया कि राज्य में एनसीपी की मुख्यमंत्री बनने की बात आती है तो उनकी पार्टी का रुख क्या होगा, तो उन्होंने कहा, 'पहले निकाह होगा उसके बाद सोचेंगे कि बेटा हो या बेटी। अभी तो निकाह ही नहीं हुआ, कुछ सोचने के लिए है ही नहीं। यह सब खेल हो रहा है।'

दोपहर होते-होते राज्यपाल के केंद्र सरकार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश भेजने की तैयारी को लेकर खबर मिलने पर शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाया। ठीक उसी समय दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के लिए ब्राजील रवाना होने से पहले कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई।

सभी टीवी चैनलों पर यह ब्रेकिंग फ्लैश होने लगी कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना तय हो चुका है। यह जानकारी सामने आते ही शिवसेना ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। पार्टी का आरोप है कि राज्यपाल भारतीय जनता पार्टी के इशारों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा को 48 घंटे का समय दिया था, जबकि शिवसेना और एनसीपी को केवल 24 घंटे दिए। लेकिन शाम होते-होते यह सस्पेंस भी समाप्त हो गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश को मानते हुए महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुमति दे दी। इसी के साथ लगभग 24 घंटे तक चला राजनीतिक ड्रामा थम गया है।

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