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छात्रों को मिलेगी सुविधा: महाराष्ट्र के सुदूर गांवों में मुफ्त वाई-फाई कनेक्शन

Mon, 30 Aug 2021 02:13 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, लातूर ।
एजेंसी, लातूर । Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 30 Aug 2021 02:13 AM IST
सार

  • गृहणियों को हॉटस्पॉट के लिये पतियों के इंतजार की जरूरत नहीं
  • छात्रों को मिली राहत, ऑनलाइन कक्षाओं में ले सकते हैं भाग
  • हर सुबह सुनाई देगी धार्मिक गीत व प्रार्थना, लगाए गए 12 साउंड स्पीकर

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Maharashtra government will provide free wifi connection in remote villages
free wifi - फोटो : social media

विस्तार

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सुदूर गांवों को मुफ्त वाई-फाई कनेक्शन देने की योजना की शुरुआत की है। इसके तहत लातूर जिले में दूरदराज इलाके का एक गांव नागतीर्थवाड़ी मुफ्त वाई-फाई कनेक्शन वाला पहला ऐसा गांव बना, जहां फ्री नेटवर्किंग की सुविधा प्रदान की गई।

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प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) मनोज राउत ने इस बाबत जानकारी देते हुए कहा कि मुफ्त इंटरनेट देते समय अनावश्यक साइटों को ब्लॉक कर दिया जाता है। इससे विशेष रूप से इस गांव के छात्रों को राहत मिली, जो लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन शिक्षा प्राप्ति से वंचित रह गए थे। अब वे स्कूलों से ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
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बकौल राउत, ‘यह पहल संभागीय आयुक्त सुनील केंद्रेकर द्वारा प्रस्तावित ‘सुंदर मजा गांव’ (माई ब्यूटीफुल विलेज) कार्यक्रम का हिस्सा है और जिला परिषद के सीईओ अभिनव गोयल की बीएएलए (बिल्डिंग एज लर्निंग एड) पहल है, जिसका उद्देश्य गांव को एक स्मार्ट मॉडल के रूप में विकसित करना है।’
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552 की आबादी वाले नागतीर्थवाड़ी गांव की रहने वाली सरिता यालमाटे ने कहा कि उनके जैसी गृहणियों के पास पहले हॉटस्पॉट का उपयोग करने के लिए अपने पतियों पर निर्भर रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। ग्राम पंचायत में मुफ्त वाई-फाई कनेक्शन सुविधा प्रदान होने से अब गृहणियों को अपने पतियों के इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने की दिशा में यह पहला कदम है। सभी ग्रामीण अब इंटरनेट पाकर खुश हैं।’ अन्य पहलों के अलावा, हर सुबह धार्मिक गीत और प्रार्थना करने के लिए गांव भर में 12 साउंड स्पीकर लगाए गए थे।

इसके अलावा, हर सुबह और शाम समाचार बुलेटिन प्रसारित किए जाते हैं। इस सुविधा का उपयोग ग्रामीणों को कुछ महत्वपूर्ण निर्देश देने के लिए भी किया जाता है।  

आय बढ़ाने के लिये लगाए गए 220 इमली, 101 बरगद के पेड़
 मनोज राउत ने कहा कि ग्राम पंचायत की सालाना 3 लाख रुपये की आय को बढ़ाने के लिए बंजर भूमि में 220 इमली के पेड़ लगाए गए, जिससे भविष्य में 8 से 10 लाख रुपये की आय हो सकती है।

गांव ने 2017 में पानी फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक प्रतियोगिता में भाग लिया था और 5 लाख रुपये का पुरस्कार जीता था। साथ ही पर्यावरण की रक्षा के लिए वट पूर्णिमा के अवसर पर 101 महिलाओं ने इन इमली के पेड़ों के चारों ओर 101 बरगद के पौधे लगाए।

पूरी तरह से शौच मुक्त है यह गांव, हर समय 24 घंटे पानी
बीडीयो ने कहा कि ‘हर बरगद का पौधा घोंसले से बंधा होता है और उस पर लगाने वाली महिला की नेमप्लेट होती है। इन पेड़ों और पौधों को सार्वजनिक कुओं से पानी पिलाया जाता है।

ग्राम पंचायत नल के पानी की व्यवस्था के माध्यम से सभी ग्रामीणों को 24 घंटे पीने का पानी उपलब्ध कराती है। गांव पूरी तरह से शौच मुक्त है। इसने पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा दिए गए 2006 में ‘निर्मल ग्राम पुरस्कार’जीता था।’

भाजपा सचिव निलंगेकर ने इस गांव को ले रखा है गोद
इस गांव को महाराष्ट्र भाजपा सचिव अरविंद पाटिल निलंगेकर ने गोद लिया था। ग्राम पंचायत ने 11 सितंबर से सभी लेन-देन को पेपरलेस करने का निर्णय लिया है। गांव में जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय के सभी 28 छात्रों को हाल ही में फोटो छपे स्कूल बैग के साथ स्कूल यूनिफॉर्म के रूप में ब्लेजर और नेकटाई वितरित की गई थी,जो एक निजी पहल थी।

इंटरनेट के लिये पिता का इंतजार नहीं करती
‘ मुफ्त वाई-फाई के कारण, अब हम नेटवर्क की समस्याओं पर काबू पाने के लिए नियमित रूप से ऑनलाइन कक्षाओं में भाग ले सकते हैं। अब मैं अपने पिता के इंटरनेट का उपयोग करने के लिए इंतजार नहीं करती हूं क्योंकि ग्राम पंचायत मुफ्त इंटरनेट प्रदान करती है।’

- अक्षता शिंगडे, आठवीं कक्षा की छात्रा

आभासी दुनिया में प्रवेश कर गया मेरा गांव
‘हमें लगता है कि हमारा गांव एक आभासी दुनिया में प्रवेश कर गया है। ग्राम पंचायत द्वारा प्रदान की जाने वाली सभी सुविधाओं से छात्रों को लाभ हुआ है। इन सुविधाओं के कारण लोग एक साथ आ रहे हैं। गुटबाजी से बचने के लिए कम से कम तीन बार हमारे जीपी को निर्विरोध चुना गया। गांव के कम से कम 70 से 80 छात्रों को नौकरी मिल गई है और वे विदेशों में एक सहित विभिन्न स्थानों पर ईमानदारी से काम कर रहे हैं।’
- तुकाराम यलमाते, किसान  

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