{"_id":"5bf70ac4bdec2241417d1477","slug":"maharashtra-government-accepts-tribal-peasant-demand","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"किसानों की हुंकार से डरी महाराष्ट्र सरकार, मांगी तीन महीने की मोहलत","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
किसानों की हुंकार से डरी महाराष्ट्र सरकार, मांगी तीन महीने की मोहलत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Updated Fri, 23 Nov 2018 06:25 AM IST
विज्ञापन
farmer suicide
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महाराष्ट्र सरकार आखिरकार आदिवासी-किसानों के आंदोलन के सामने झुकने को मजबूर हो गई। सरकार ने उनकी सभी मांगे मानते हुए उन्हें समस्याओं के समधान का लिखित आश्वासन दिया है। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसान प्रतिनिधिमंडल के साथ उनकी मांगों पर चर्चा की। तीन महीने में किसान आदिवासियों की सभी समस्याओं का हल निकालने का सरकार ने लिखित आश्वासन दिया है। इसके बाद आजाद मैदान पर बैठे किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया।
जल संसाधन मंत्री गिरीष महाजन ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि आदिवासियों की मुख्य मांग जमीन के पट्टे को लेकर है। इस मामले में सभी जिलों के अधिकारियों को सख्ती से निर्देश दिए जाएंगे कि वे अगले तीन महीने में इसका हल निकालें। उन्होंने कहा कि आदिवासी जमीन पट्टाधारकों को भी सूखा राहत से जुड़ी सभी सुविधाएं दी जाएंगी। साथ ही, कृषि अनुदान देने से जुड़ा निर्णय भी लिया गया है। मोर्चे में शामिल लोग गैरआदिवासी और आदिवासियों की तीन पीढ़ियों के निवासी होने से जुड़ी शर्त भी रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन
जल संसाधन मंत्री गिरीष महाजन ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि आदिवासियों की मुख्य मांग जमीन के पट्टे को लेकर है। इस मामले में सभी जिलों के अधिकारियों को सख्ती से निर्देश दिए जाएंगे कि वे अगले तीन महीने में इसका हल निकालें। उन्होंने कहा कि आदिवासी जमीन पट्टाधारकों को भी सूखा राहत से जुड़ी सभी सुविधाएं दी जाएंगी। साथ ही, कृषि अनुदान देने से जुड़ा निर्णय भी लिया गया है। मोर्चे में शामिल लोग गैरआदिवासी और आदिवासियों की तीन पीढ़ियों के निवासी होने से जुड़ी शर्त भी रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन
चंद्रपुर और गढ़चिरोली में सिंधियों की तर्ज पर बंगालियों का पुनर्वास
इस बारे में राज्य सरकार ने कहा कि वह केंद्र सरकार के पास प्रस्ताव भेजेगी। पहले सरकार ने लगभग 80 फीसदी दावों को नकार दिया था। लेकिन, अब इस पर फिर से विचार करने का आश्वासन दिया है। साथ ही दावेदारों के नाम एक ही सात-बारह की बजाय अलग-अलग सात-बारह पर चढ़ाए जाएंगे। पहले वन अधिकार कानून पर अमल के लिए आदिवासी इलाकों के गांवों के 50 फीसदी लोगों की उपस्थिति अनिवार्य थी लेकिन अब गांव की जगह पाडे को घटक माना जाएगा। बता दें कि अपनी मांगों को लेकर हजारों किसान आदिवासी आजाद मैदान धरने पर बैठे थे।
चंद्रपुर और गडचिरोली जिलों के 50 गावों में 25-30 हजार बंगाली शरणार्थी हैं। जिस तरह से सिंधी शरणार्थियों का पुनर्वास किया गया है उसी तरह बंगाली शरणार्थियों को समान कानून के तहत पुनर्वसित किया जाएगा। बृहस्पतिवार को सरकार ने यह मांग भी मान ली है।
चंद्रपुर और गडचिरोली जिलों के 50 गावों में 25-30 हजार बंगाली शरणार्थी हैं। जिस तरह से सिंधी शरणार्थियों का पुनर्वास किया गया है उसी तरह बंगाली शरणार्थियों को समान कानून के तहत पुनर्वसित किया जाएगा। बृहस्पतिवार को सरकार ने यह मांग भी मान ली है।
दिसंबर तक जमीनों का फैसलाऱ् सावरा
चर्चा में शामिल आदिवासी विकास मंत्री विष्णु सावरा ने बताया कि वन जमीन से जुड़े कुल 3 लाख 6 हजार दावे सरकार को मिले थे। इनमें से 1 लाख 74 हजार दावों को मंजूरी दे दी गई है। अन्य के बारे में भी दिसंबर महीने तक निर्णय लिया जाएगा।
महाराष्ट्र में सूखा मानवजनित- डॉ. राजेन्द्र सिंह
सूखा राहत और आदिवासियों को भूमि अधिकार देने की मांग कर रहे हजारों किसान लोकसंघर्ष मोर्चा नामक संगठन के बैनर के तले बृहस्पतिवार को दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान पहुंचे। इस मोर्चे में जलपुरूष व मैंगसेसे पुरस्कार विजेता डॉ राजेंद्र सिंह भी शामिल रहे। उन्होंने सूखे के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया और इसे मानव-जनित करार दिया।
महाराष्ट्र में सूखा मानवजनित- डॉ. राजेन्द्र सिंह
सूखा राहत और आदिवासियों को भूमि अधिकार देने की मांग कर रहे हजारों किसान लोकसंघर्ष मोर्चा नामक संगठन के बैनर के तले बृहस्पतिवार को दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान पहुंचे। इस मोर्चे में जलपुरूष व मैंगसेसे पुरस्कार विजेता डॉ राजेंद्र सिंह भी शामिल रहे। उन्होंने सूखे के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया और इसे मानव-जनित करार दिया।