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पवित्रता के नाम पर होने वाली कुप्रथा के खिलाफ दो बहनों ने खोला मोर्चा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महाराष्ट्र Updated Sun, 14 Jan 2018 12:11 PM IST
girl secrecy, virginity
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महाराष्ट्र की एक घटना ने मुहिम का रूप ले लिया है। यहां कंजरभट समुदाय की दो बहनों ने वो विषय उठाया है जो लड़कियों की गोपनीयता से जुड़ा है। खुद एक घटना की शिकार इनमें से एक बहन इस सामाजिक बुराई के खिलाफ लड़ रही है कि शादी से पहले कैसे कोई लड़कियों की वर्जिनिटी पर कोई भी गलत दावा कर सकता है। यानी ये कह सकता है कि फलां लड़की वर्जिन है और इसका कोई सबूत नहीं, सिर्फ एक अंधविश्वास जिसे डॉक्टर भी नकारते हैं। 
ये मामला है पिंपरी चिंचवाड़ का जहां एक लड़की को शादी से दो महीने पहले इसलिए प्रताड़ित किया गया कि वो अपनी वर्जिनिटी साबित करे। दूल्हा पक्ष इस बात पर अड़ गया कि वो लड़की की वर्जिनिटी जांच कर ही मानेगा। इसके बाद दूल्हा पक्ष ने अंधविश्वास की गलत परंपरा से उसका परीक्षण किया और उसकी वर्जिनिटी पर सवाल उठाकर उसे रिजेक्ट कर दिया। यानी की लड़की के परिवार को शादी से इनकार सुनना पड़ा।

ऐसा नहीं है कि इस घटना से सिर्फ लड़की ही प्रताड़ित है, इस लड़की की दूसरी बहन और भाई पर भी सामाजिक दबाव साफ दिखाई दे रहा है। बहनों के साथ-साथ भाई का भी सामाजिक बहिष्कार देखने को मिल रहा है। लड़की के परिवार पर दबाव अब इस बात का है कि वो आखिर अपनी बेटियों की शादी कैसे करेगा? सामाजिक स्तर पर परिवार सिर्फ नफरत की नजरों से देखा जा रहा है। 

इन सब के बीच हैदराबाद के एक वरिष्ठ डॉक्टर का यहां तक कहना है कि जिन धार्मिक मान्यताओं (अंधविश्वास) से इस परिवार का बहिष्कार हुआ है, दरअसल वो वैज्ञानिक रूप से भी ठीक नहीं है। डॉक्टर भवानी प्रसाद का दावा है कि महिलाओं की वर्जिनिटी पर जिस तरह से सवाल खड़े किए जा रहे हैं वो गलत हैं। यानी वो तरीका ठीक नहीं है जिससे गांव के लोग किसी भी लड़की को कुमारी होने या ना होने का प्रमाण पत्र देते हैं। 

डॉक्टर का यहां तक कहना है जिस शारीरिक ढांचे को देखकर ग्रामीण ये दावा करते हैं, जरूरी नहीं है कि उसमे इस तरह के बदलाव यही साबित करते हों कि लड़की अब कुमारी नहीं रही या फिर उसकी वर्जिनिटी समाप्त हो गई है। बहरहाल पीड़ित बहनें न्याय की आस में हैं और अभी भी हिम्मत नहीं हारीं हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से वो ग्रामीणों की जागरुकता की खातिर लड़ रही हैं। ऐसे में ये सामाजिक बुराई या फिर कहिए लड़ाई अब जनता के बीच आ चुकी है। 

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