{"_id":"5c2b3615bdec2256cd7e1d6b","slug":"maharashtra-doctor-sends-report-to-remove-controversial-virginity-test-from-medical-textbooks","type":"story","status":"publish","title_hn":"महाराष्ट्र: डॉक्टर ने की मांग, किताबों से जल्द हटाया जाए 'वर्जिनिटी टेस्ट'","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
महाराष्ट्र: डॉक्टर ने की मांग, किताबों से जल्द हटाया जाए 'वर्जिनिटी टेस्ट'
Tue, 01 Jan 2019 03:12 PM IST
Shilpa Thakur
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Shilpa Thakur
Updated Tue, 01 Jan 2019 03:12 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
- वर्जिनिटी टेस्ट को मेडिकल की किताबों से हटाएं।
- डॉक्टर ने एमसीआई को भेजी रिपोर्ट।
- मेडिकल के छात्रों को ये नहीं पढ़ाया जाना चाहिए: डॉक्टर
- लिंग असमानता को मिलता है बढ़ावा।
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
डेमो
- फोटो :
डेमो
विस्तार
महाराष्ट्र के वर्धा में फॉरेंसिक मेडिकल प्रोफेसर ने मेडिकल की किताबों से 'वर्जीनिटी' और 'टू फिंगर टेस्ट' जैसे विवादास्पद टेस्ट को हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसमें वैज्ञानिक प्रमाणिकता का अभाव है और भविष्य में डॉक्टरों को इसे नहीं पढा़या जाना चाहिए।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को सौंपी अपनी रिपोर्ट में डॉक्टर इंद्रजीत खांडेकर ने कहा है कि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और इससे मानव अधिकारों का उल्लंघन होता है। ये लिंग असमानता को भी बढ़ावा देता है।
खांडेकर का कहना है कि उन्होंने इसकी कॉपी एमसीआई को भेज दी है। इसके अलावा रिपोर्ट की कॉपी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस रजिस्ट्रार डॉक्टर केडी चंदावन को भी भेजी गई है। यह एक ऐसा टेस्ट होता है जिससे पता चलता है कि किसी महिला या लड़की ने शारीरिक संबंध बनाए हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि दुष्कर्म के मामलों में भी ये टेस्ट किया जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार 'वर्जिनिटी टेस्ट' उपयोगी क्लीनिकल टूल नहीं है और इंसान को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से परेशान करने वाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह टेस्ट वजाइनल इंटरकोर्स और इसके इतिहास के बारे में निर्णायक साक्ष्य नहीं देता है।
उनका कहना है कि कई किताबों में तो 'फॉल्स वर्जिन' और 'ट्रू वर्जिन' की जानकारी भी विस्तार से बताई गई है। किसी भी अन्य किताब में पुरुषों के लिए वर्जिनिटी टेस्ट के बारे में नहीं बताया गया है। इस टेस्ट को जल्द से जल्द मेडिकल पाठ्यक्रम से हटा लिया जाना चाहिए। इससे डॉक्टरों, आम लोग और अदालतों पर गलत प्रभाव पड़ता है।