फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Maharashtra : BJP saved the dignity of the constitution by leaving the ground before the power test

महाराष्ट्र : शक्ति परीक्षण से पहले मैदान छोड़ भाजपा ने बचाई संविधान की गरिमा

Wed, 27 Nov 2019 05:29 AM IST
गौरव पाण्डेय शरद गुप्ता, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 27 Nov 2019 05:29 AM IST
विज्ञापन
Maharashtra : BJP saved the dignity of the constitution by leaving the ground before the power test
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

महाराष्ट्र मामले पर भाजपा की राजनीतिक शुचिता पर भले ही सवाल उठाए जा रहे हों लेकिन संविधान दिवस पर उसने संविधान को तार-तार होने से बचा लिया। जैसे ही भाजपा को एहसास हुआ कि उसके पास बहुमत नहीं है, पार्टी ने शक्ति परीक्षण से पहले ही मैदान छोड़ दिया।

विज्ञापन


लेकिन ऐसा नहीं है कि जोड़-तोड़ की कोशिश नहीं की गई। और इसके लिए केवल देवेंद्र फडणवीस या महाराष्ट्र राज्य इकाई के सर ठीकरा नहीं फोड़ा जा सकता है। राज्यपाल के पास दावा करते समय उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव भी थे। आधी रात को संविधान के विशेष प्रावधान के जरिए राष्ट्रपति शासन खत्म करने का निर्णय फडणवीस का नहीं था। न ही फडणवीस अकेले अजित पवार के साथ तालमेल कर सरकार बनाने का फैसला कर सकते थे।
विज्ञापन


नारायण राणे और बबनराव पचपुते जैसे कई लोगों को ऑपरेशन कमल के जरिए दूसरे दलों से विधायकों को तोड़ लाने की जिम्मेदारी दी गई थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के जिन तीन विधायकों को गुड़गांव के एक होटल में लाया गया था उनके आसपास भाजपा के कार्यकर्ताओं का ही तो पहरा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसीलिए शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के विपरीत विचारधारा वाले गठबंधन को मिल रही अलोकप्रियता पर भाजपा और अजित पवार की सरकार बनाने के प्रयास भारी पड़ गए। भाजपा का राजनीति में शुचिता और पारदर्शिता लाने का दावा धूमिल हो गया। सोशल मीडिया में भाजपा के कट्टर समर्थक भी अचानक उसके आलोचक बन गए।

अजित पवार की विश्वसनीयता

भाजपा द्वारा 70 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले के आरोपी अजित पवार पर भरोसा करना एक भूल थी। लेकिन अचानक रातों-रात भाजपा ने उन पर इतना विश्वास कैसे कर लिया? अजित पवार के पास 54 विधायक होने के दावे की सत्यता परखने की जगह केंद्र और राज्य में सत्तासीन भाजपा सीधे राजभवन दौड़ पड़ी। आखिर में अजित पवार के सबसे विश्वस्त सुनील तटकरे और धनंजय मुंडे जैसे नेता भी उनका साथ छोड़ गए।

सरकार के स्थायित्व का सवाल

शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार भले ही बना ली हो लेकिन उसके स्थायित्व पर फिलहाल प्रश्न चिन्ह लगा है। जिन दलों को अपना न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय करने में ही 15 दिन लग गए हों, वे सरकार कैसे चलाएंगे यह समझना कठिन नहीं है। हालांकि महाराष्ट्र में काफी लंबे समय से गठबंधन सरकारें ही चल रही हैं।

दूसरे राज्यों पर भी राजनीतिक असर

महाराष्ट्र के घटनाक्रम का राजनीतिक असर दूसरे राज्यों पर भी पड़ सकता है, खासतौर पर झारखंड और दिल्ली जैसे राज्यों पर जहां अगले कुछ महीनों में ही चुनाव होने हैं। कर्नाटक में पांच दिसंबर को होने वाले 14 विधानसभा सीटों के उपचुनाव पर भी इसका असर पड़ सकता है। उसके बाद बिहार में चुनाव होने हैं।

एनडीए का सिमटता कुनबा

48 दलों से बने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में भाजपा के अलावा अब सिर्फ दो ही बड़े दल बचे हैं - जनता दल यू और शिरोमणि अकाली दल। शिवसेना के जाने के बाद अब एनडीए का कुनबा सिमटने लगा है। इसकी वजह भाजपा द्वारा खुद को अन्य राज्यों में फैलाने के प्रयास है। इसी से सहयोगी दल डर रहे हैं।

सबसे अधिक फायदे में कांग्रेस

इस घटनाक्रम का सबसे अधिक लाभ चुनाव में चौथे नंबर पर आने वाली कांग्रेस को हुआ है। वह भी तब जब उसके अधिकतर प्रमुख नेता चुनाव से पहले पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।  सोनिया गांधी या प्रियंका गांधी ने राज्य में प्रचार नहीं किया था। और राहुल गांधी की भी चंद सभाएं ही आयोजित की गईं थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed