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महाराष्ट्र : दूसरे दलों के विधायकों का इस्तीफा या क्रॉस वोटिंग का दांव चल सकती है भाजपा
Tue, 26 Nov 2019 10:23 AM IST
गौरव पाण्डेय
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 26 Nov 2019 10:23 AM IST
सार
- सरकार बनाए रखने के लिए जरूरत पड़ी तो कर्नाटक मॉडल भी अपना सकती है भाजपा
- विपक्ष के विधायकों की परेड के बाद भी रणनीतिकारों को सरकार बचा लेने का विश्वास
- विधायक कौन सा विकल्प आजमाएंगे यह बहुमत की संख्या के आधार पर तय होगा
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शरद पवार-उद्धव ठाकरे-देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
महाराष्ट्र में फडणवीस सरकार को हर हाल में बचाने के लिए भाजपा की उम्मीदें सिर्फ अजित पवार पर ही नहीं टिकी हैं। पार्टी ने इसके अतिरिक्त भी शक्ति परीक्षण के लिए कई तरह की रणनीति तैयार की है। पार्टी जरूरत पड़ने पर बहुमत साबित करने के लिए कर्नाटक मॉडल भी अपना सकती है। गौरतलब है कि तब कर्नाटक की कुमारस्वामी सरकार गिराने के लिए कांग्रेस और जेडीएस के कई विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था।
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सोमवार को मुंबई में एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस विधायकों की मीडिया के सामने परेड के बावजूद भाजपा के रणनीतिकारों का दावा है कि फडणवीस सरकार फ्लोर टेस्ट की अग्नि परीक्षा पास कर लेगी। इसमें पार्टी की पहली रणनीति एनसीपी विधायक दल के नेता के तौर पर भाजपा को समर्थन देने वाले अजित पवार का पुराना स्टेटस (नेता विधायक दल) बरकरार रखने की है। अगर पवार को विधायक दल का नेता के रूप में मान्यता मिली तो वह शक्ति परीक्षण के दौरान भाजपा के पक्ष में वोट करने का व्हिप जारी करेंगे।
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दूसरी रणनीति कर्नाटक मॉडल अपनाना है। पार्टी के रणनीतिकारों का दावा है कि उसके संपर्कमें एनसीपी, शिवसेना, कांग्रेस के कई विधायक के साथ फिलहाल इन तीनों दलों के गठबंधन के साथ खड़े कुछ निर्दलीय विधायक भी हैं। इनमें अजित पवार के साथ 13 विधायक होने का दावा किया जा रहा है। अगर विपरीत परिस्थिति आई तो पार्टी के संपर्क वाले विधायक शक्ति परीक्षण के दौरान या तो क्रॉस वोटिंग करेंगे या जरूरत पड़ने पर शक्ति परीक्षण से पहले इस्तीफा देंगे। इन दो विकल्पों में से विधायक कौन सा विकल्प आजमाएंगे यह उस दौरान बहुमत की जरूरी संख्या के आधार पर तय होगा।