यूपी में किसान कर्जमाफी की घोषणा कर मुसीबत में फंसी बीजेपी
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किसान कर्जमाफी की घोषणा करने वाली भाजपा महाराष्ट्र में इसी मुद्दे पर मुसीबत में घिर गई है। किसानों की कर्ज माफी के मसले पर बृहस्पतिवार को भी महाराष्ट्र विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। मजे की बात यह है कि सरकार में शामिल भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना भी इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ हो गई है।
वहीं, भाजपा के विधायक भी एक सुर में बात करते नजर आए। इससे सरकार को रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा। महाराष्ट्र में विधानमंडल सत्र शुरू होने पर विपक्ष शुरुआत में किसानों की कर्जमाफी का मसला उठाता रहा है, लेकिन सरकार की तरफ से इसे नजरंदाज किया जाता रहा है। लेकिन, उत्तर प्रदेश में भाजपा द्वारा किसानों की कर्जमाफी के आश्वासन ने महाराष्ट्र में इस मुद्दे को गरमा दिया है।
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार में ढाई साल के अंदर करीब आठ हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। वहीं, बीते साल में 3052 किसानों ने आत्महत्या की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा ने घोषणा की है कि सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट में किसानों को कर्जमाफी का निर्णय लिया जाएगा। लेकिन, सर्वाधिक किसान आत्महत्या होने के बावजूद महाराष्ट्र की सरकार किसानों का कर्ज माफ नहीं कर रही है।
वहीं, एनसीपी के नेता अजीत पवार ने भी यूपी में किसान कर्जमाफी को लेकर भाजपा पर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि जब यूपी में किसानों को कर्जमाफी दी जा सकती है तो महाराष्ट्र में क्यों नहीं।
बचाव में आई सरकार
कर्जमाफी के मुद्दे पर विधानसभा में जारी गतिरोध पर वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि कांग्रेस-एनसीपी किसानों को नहीं बैंकों को कर्जमाफी का फायदा दिलाना चाहती है। उन्होंने कहा कि साल 2009 में जब कर्जमाफी हुई थी तब किसान को नहीं बैंकों को फायदा हुआ था। वित्त मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार सूक्ष्म सिंचन, नियोजन सहित कई उपाय योजनाओं के माध्यम से किसानों के लिए आधारभूत सुविधाओं को जुटाने में लगी है।
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान आखिरी साल में 13005 करोड़ रुपये दिए थे, जबकि हमने 23000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। सिंचाई के क्षेत्र में पिछले दो साल में साढ़े सात हजार करोड़ रुपये दिए गए। राज्य में किसानों की आत्महत्या पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार के लिए एक भी किसान की आत्महत्या ठीक नहीं है।