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महाराष्ट्र : अजित पवार की घर वापसी तो हुई लेकिन पार्टी से दूरियां बढ़ीं
Wed, 27 Nov 2019 05:21 AM IST
गौरव पाण्डेय
अनूप वाजपेयी, नई दिल्ली
अनूप वाजपेयी, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 27 Nov 2019 05:21 AM IST
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शरद पवार और अजित पवार (फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
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परिवार के दबाव और मान-मनौव्वल में अजित पवार की घर वापसी तो हो गई लेकिन चार दिनों की बेरुखी ने उन्हें एनसीपी से अलग-थलग कर दिया है। एनसीपी के अलावा महाविकास अघाड़ी के दोनों सहयोगी शिवसेना और कांग्रेस अजित पवार की भूमिका को लेकर बेहद नाराज हैं। ऐसे में एनसीपी प्रमुख शरद पवार अपने भतीजे को किनारे करके ही आगे बढ़ना चाहते हैं। उनकी वापसी भी ऐसे समय हुई है जब महाविकास अघाड़ी के तीनों दल विधानसभा में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे।
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शरद पवार की हिम्मत और परिवार में मुखिया की भूमिका ने न पार्टी टूटने दी और न ही परिवार टूटा। एनसीपी ने अजित पवार के राजनीतिक भविष्य और भूमिका भी तय कर दी थी लेकिन उनके विद्रोह ने पार्टी में उनका कद अचानक से घटा दिया है। ऐसे उन्होंने सबसे बड़ी पूंजी विश्वास खो दिया है। चाचा शरद पवार भले ही उन्हें अपने से दूर नहीं जाने देने के सभी प्रयास किए लेकिन पार्टी में उन्हें पद और खोई प्रतिष्ठा मिलने में समय लगेगा।
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अजित पवार को लेकर अकेले शरद पवार ही थे जिन्होंने अंतिम समय तक उनकी वापसी की प्रतीक्षा की। चार दिनों के घटनाक्रम में महाराष्ट्र की राजनीति में कोई व्यक्ति सबसे बड़ा रणनीतिकार बनकर उभरा है तो वे एनसीपी प्रमुख शरद पवार हैं। वहीं भतीजे के जाने पर किसी ने सबसे ज्यादा दबाव, राजनीतिक जलालत और तनाव बर्दाश्त किया तो वो भी शरद पवार के हिस्से जाता है।
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सहयोगी दलों के नेताओं ने अजित पवार की भूमिका पर तीखे हमले किए हैं, खासकर कांग्रेस ने सिंचाई घोटाले को लेकर उन्हें बार बार कटघरे में खड़ा किया है। सहयोगी दल शिवसेना और कांग्रेस के साथ पूरा मीडिया उनसे यही सवाल पूछ रहा था कि जिसने उनके पीठ में छुरा घोंपा है, उसे पार्टी ने क्यों नहीं निकाल रहे। शरद पवार ने हर बार एक ही जवाब दिया ये फैसला अकेले उनका नहीं है, पार्टी समय आने पर फैसला करेगी।