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Mahakal Darshan: उज्जैन उत्तर के विधायक पारस जैन बोले- मेरा बस चले तो सशुल्क व्यवस्था बंद कर दूं!

Mon, 15 May 2023 07:03 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Mon, 15 May 2023 07:03 PM IST
सार

Mahakal Darshan: पारस जैन उस इलाके का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां भगवान महाकाल का मंदिर बना है। वह छह बार के विधायक हैं और शिवराज सरकार में कई अहम मंत्रालय भी संभाल चुके हैं। पारस जैन ने कहा कि मैं जनप्रतिनिधि हूं। मैं तो चाहता हूं कि सरकार सभी श्रद्धालुओं को छूट दे। किसी से कोई शुल्क न वसूले...

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Mahakal Darshan: Ujjain North MLA Paras Jain said - If I can, I will stop the paid system!
उज्जैन में आम भक्तों से दूर होते महाकाल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में जाने से लेकर भस्म आरती में भाग लेने तक के लिए सशुल्क व्यवस्था से संत समाज और आम श्रद्धालु नाराज हैं। उज्जैन उत्तर के विधायक पारस जैन को भी मंदिर दर्शन के लिए शुल्क वसूले जाने को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मेरा बस चले तो मैं पैसे लेकर दर्शन कराने की व्यवस्था ही बंद कर दूं। लेकिन सरकार भी मजबूर है। दर्शन के लिए बहुत ज्यादा शुल्क वसूला जा रहा है, जिसे कम करने की जरूरत है। श्रद्धालुओं पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ना चाहिए।

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पारस जैन उस इलाके का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां भगवान महाकाल का मंदिर बना है। वह छह बार के विधायक हैं और शिवराज सरकार में कई अहम मंत्रालय भी संभाल चुके हैं। पारस जैन ने कहा कि मैं जनप्रतिनिधि हूं। मैं तो चाहता हूं कि सरकार सभी श्रद्धालुओं को छूट दे। किसी से कोई शुल्क न वसूले। लेकिन सरकार की भी अपनी मजबूरी हैं। वह भी क्या करे। मेरा मानना है कि स्थानीय प्रशासन शुल्क व्यवस्था जारी रखना चाहता है, तो शुल्क थोड़ा कम करें। इससे लोगों को राहत मिलेगी। वे कम शुल्क देकर आसानी से दर्शन सकेंगे।

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यह भी पढ़ें: वीआईपी के महाकाल: उज्जैन के एमपी अनिल फिरोजिया ने स्वीकारा- क्राउड मैनेजमेंट गड़बड़ है, सुधारने पर काम जारी

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महाकाल लोक देखने आ रहे हैं श्रद्धालु

विधायक जैन ने यह भी कहा कि श्रद्धालु शुल्क देकर गर्भगृह में जाकर दर्शन करें या फिर निशुल्क लाइन में लगकर दर्शन करें, इससे क्या फर्क पड़ता है। भगवान तो एक ही हैं। व्यवस्थाएं नई हैं इसलिए लोगों को थोड़ा एडजस्ट करना होगा। हालांकि, जैन भी मंदिर प्रशासन के उस दावे से सहमत हैं कि दर्शन आधे घंटे में हो रहे हैं। हकीकत यह है कि अमर उजाला की टीम ने जब आम श्रद्धालु की तरह दर्शन किए, तो तीन से ज्यादा घंटे लग गए। भीड़ और कतार में लगने वाले समय की वजह से कई लोग तो शिखर दर्शन कर लौट रहे हैं। जैन का दावा है कि आने वाले दिनों में अन्य गेट खोले जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन में आसानी होगी। वे महज 15 मिनट में दर्शन कर बाहर आ सकेंगे। श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। इस वजह से थोड़ी परेशानी है।

लगातार हो रहा है विरोध

महाकाल लोक कॉरिडोर को देखने के लिए हर रोज हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से उज्जैन पहुंच रहे हैं। शीघ्र दर्शन के लिए 250 रुपये, भस्म आरती में शामिल होने के लिए 200 और गर्भगृह में दर्शन के लिए 750 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के इस निर्णय से संत समाज भी आहत है। वे लगातार इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं। संत समाज इस फैसले के विरोध में पीएम मोदी और सीएम शिवराज सिंह चौहान को भी पत्र लिख चुका है।

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