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तमिलनाडु: तंजावुर में छात्रा की मौत का मामला सीबीआई को हुआ ट्रांसफर, मद्रास हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Mon, 31 Jan 2022 12:35 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 31 Jan 2022 12:35 PM IST
सार

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने 28 जनवरी को कथित तौर पर जबरन धर्म परिवर्तन करवाने के बाद आत्महत्या करने वाली 12वीं कक्षा की छात्रा के मामले में सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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Madurai Bench of Madras High Court orders transfer of Thanjavur student death case to CBI
सीबीआई(फाइल) - फोटो : social media

विस्तार

तमिलनाडु की मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने तंजावुर में 12वीं की छात्रा की मौत के मामले को सीबीआई को ट्रांसफर करने का आदेश दे दिया है। यानी अब इस मामले की जांच सीबीआई करेगी। वहीं इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने 28 जनवरी को कथित तौर पर जबरन धर्म परिवर्तन करवाने के बाद आत्महत्या करने वाली 12वीं कक्षा की छात्रा के मामले में सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। दरअसल, तंजावुर जिले के एक मिशनरी स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा ने नौ जनवरी को जहर खा लिया था। 19 जनवरी को उसकी मौत हो गई थी। छात्रा ने एक वीडियो में दावा किया था कि स्कूल प्रबंधन ने उसे जबरन ईसाई धर्म स्वीकार करवाया था। इस मामले में पुलिस ने स्कूल के हॉस्टल के वार्डन को गिरफ्तार किया है।

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जानिए क्या है पूरा मामला
मृत किशोरी तमिलनाडु के तंजावुर जिले के क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल में पढ़ती थी। वहां उसका कथित तौर पर उत्पीड़न किया गया और जिस हॉस्टल वार्डन उससे जबरन घरेलू काम करवाती थी। सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो में किशोरी ने आरोप लगाया था कि उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया है। इसके बाद नाबालिग ने अपनी जान देने की कोशिश की। उसे तंजावुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन 19 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। 
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मृतका के माता-पिता ने अन्य इकाई से जांच की मांग की थी
मृतका के माता-पिता ने इस मामले की जांच के लिए राज्य पुलिस से उम्मीद न होने की बात कहते हुए क्राइम ब्रांच, अपराध जांच विभाग (सीबीसीआईडी) या किसी अन्य इकाई से जांच कराने की मांग की है।
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केरल हाईकोर्ट : लॉ छात्रा के पति को दी जमानत
इधर, केरल हाईकोर्ट ने उस 21 वर्षीय लॉ की छात्रा के पति को सोमवार को जमानत दे दी जिसने आत्महत्या कर ली थी। उसने सुसाइड नोट में आत्महत्या के लिए अपने पति और सास-ससुर और एक पुलिस अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया था।

जस्टिस गोपीनाथ पी. ने कहा कि चूंकि पति को हिरासत में रहते हुए 65 से भी अधिक दिन हो चुके हैं और मामले में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी गई। इस लिहाज से अब उसे हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने कुछ शर्तों के साथ उसे जमानत दे दी। 

हालांकि, पीड़िता के सास-ससुर को चार जनवरी को जमानत मिल गई थी। लेकिन पति को यह कहते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया गया था उस पर लगाए गए आरोप बहुत गंभीर हैं। इसके बाद पति ने दूसरी जमानत याचिका दायर करते हुए दावा किया कि उसकी पत्नी की आत्महत्या के लिए पुलिस अधिकारी जिम्मेदार है। 

मृतका के पति और सुसराल वालों को पिछले साल 24 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था और उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304(बी), 498ए (दहेज प्रताड़ना), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया। 


पीड़िता ने अपने सुसाइड नोट में आरोप लगाया था कि जब वह अपने पिता के साथ अलुवा पूर्व पुलिस थाने में पति व ससुराल वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की शिकायत कराने पहुंची थी, तब तत्कालीन एसएचओ ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया। उसकी शिकायत भी नहीं लिखी।

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