{"_id":"611e42afda30d4714746fcfc","slug":"madras-hc-directs-center-to-reply-only-in-english-after-home-ministry-writes-to-tamil-nadu-mp-in-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"तमिलनाडु: हिंदी में उत्तर मिला तो हाईकोर्ट पहुंचे सांसद, अदालत ने केंद्र से कहा- केवल अंग्रेजी में ही जवाब दें","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
तमिलनाडु: हिंदी में उत्तर मिला तो हाईकोर्ट पहुंचे सांसद, अदालत ने केंद्र से कहा- केवल अंग्रेजी में ही जवाब दें
Thu, 19 Aug 2021 05:08 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मदुरै
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मदुरै
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 19 Aug 2021 05:08 PM IST
सार
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बीते दिनों तमिलनाडु के एक सांसद को एक सवाल के जवाब में हिंदी भाषा में लिखित उत्तर दिया था। सांसद ने इसे लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था और मांग की थी केंद्र और तमिलनाडु के बीच संवाद अंग्रेजी भाषा में ही होना चाहिए। अब अदालत ने गुरुवार को इस मामले में केंद्र सरकार को निर्देश जारी किया है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने गुरुवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह ऑधिकारिक भाषा अधिनियम, 1963 का सख्ती से पालन करे। अदालत ने कहा, 'अंग्रेजी में पत्र मिलने पर यह केंद्र सरकार का दायित्व है कि वह केवल अंग्रेजी में ही उसका उत्तर दे।'
विज्ञापन
न्यायाधीश एन किरुबकरन और एम दुरैस्वामी की विभागीय पीठ ने मदुरै लोकसभा क्षेत्र सेसांसद सू वेंकटेशन की जनहित याचिका को अनुमति देते हुए यह निर्देश दिया। वेंकटेशन ने मांग की है कि केंद्र व राज्य सरकार के बीच सभी संवाद अंग्रेजी में ही किए जाएं।
विज्ञापन
वेंकटेशन ने अदालत का रुख पिछले साल किया था जब गृह मंत्रालय ने उनके पत्र का उत्तर हिंदी भाषा में दिया था। सांसद ने इस पत्र में तमिलनाडु और पुडुचेरी में सीआरपीएफ पैरामेडिकल स्टाफ भर्ती के लिए एक परीक्षा केंद्र स्थापित करने का अनुरोध किया था।
विज्ञापन
न्यायाधीश किरुबकरन ने कहा कि भाषा की अहमियत को समझा जा सकता है क्योंकि राज्यों को भाषा के आधार पर पुनर्गठित किया गया है। केंद्र सरकार को हिंदी के साथ अंग्रेजी का प्रयोग जारी रखना चाहिए जो एक बाध्यकारी शक्ति के रूप में कार्य कर सके।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 350 का भी उल्लेख किया। इसके अनुसार हर व्यक्ति को संघ या राज्य में इस्तेमाल की जाने वाली किसी भी भाषा में अभ्यावेदन देने का अधिकार है। इसलिए अंग्रेजी में लिखे पत्र का अंग्रेजी में ही जवाब देना केंद्र की जिम्मेदारी है।