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विपक्षी एकता की कसौटी पर होंगे मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव, छोटे दलों ने भी कांग्रेस से मांगी सीटें

Thu, 06 Sep 2018 05:36 AM IST
शरद गुप्ता, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, नई दिल्ली Updated Thu, 06 Sep 2018 05:36 AM IST
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Madhya Pradesh Legislative Assembly election will be the criterion of opposition unity
सपा, बसपा, कांग्रेस
तीन महीने बाद होने जा रहे मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव विपक्षी एकता की कसौटी साबित होंगे। कांग्रेस चाहती है कि बहुजन समाज पार्टी उसके साथ मिलकर पंद्रह साल से लगातार सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी को चुनौती दे। लेकिन समाजवादी पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) जैसे छोटे दल भी विपक्षी एकता की दुहाई देते हुए अपने लिए सीटें मांग रहे हैं।
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पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा चार सीटें जीती थी और 12 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी। जबकि कांग्रेस 58 सीटें जीती थी और 147 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी। वहीं सपा कोई भी सीट जीतने में सफल नहीं रही थी और केवल तीन सीटों पर दूसरे स्थान पर थी। जीजीपी का भी यही हाल था। वह भी केवल तीन सीटों पर दूसरे नंबर पर आई थी।
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लेकिन इस बार सपा और जीजीपी दोनों 25-25 सीटों पर दावा कर रही हैं। उनका कहना है कि जिन सीटों पर वे पिछली बार दूसरे स्थान पर रहे, उन पर उनके और कांग्रेस के वोट मिलाकर बीजेपी को मिले वोटों से अधिक हैं। इसलिए यदि उनके साथ मिलकर लड़ने से कांग्रेस को फायदा ही होगा। लेकिन वे कम सीटों पर भी मान सकते हैं।
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कांग्रेस केवल बसपा से समझौते के पक्ष में

हालांकि कांग्रेस केवल बसपा से समझौता चाहती है। पिछली बार बसपा को  6.29 फीसदी वोट मिले थे जबकि कांग्रेस को 36.38 फीसदी। दोनों के वोट मिलाकर 42.67 प्रतिशत है जो कि बीजेपी को मिले 44.88 फीसदी वोट से बहुत ज्यादा कम नहीं है। सीटों के बंटवारे पर राज्य कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की बसपा प्रमुख मायावती से बातचीत चल रही है।

सपा-जीजीपी का दावा

सपा चुनाव समिति के सदस्य डा. सुनीलम कहते हैं कि उनके दल को 1.2 फीसदी वोट मिले और जीजीपी को 1 फीसदी। कांग्रेस-बसपा के मत प्रतिशत में यदि ये 2.2 प्रतिशत वोट और जोड़े जाएं तो यह बीजेपी के मतप्रतिशत बराबर हो जाता है। यह मत प्रतिशत इन दलों ने एक दूसरे के खिलाफ लड़कर पाया है। यदि ये साथ लड़ें तो बीजेपी को आसानी से हरा सकते हैं। उनका कहना है कि अखिलेश जल्द ही इस बारे में कांग्रेस नेताओं से बात करेंगे।


जुमला बन जाएगा महागठबंधन

सपा-जीजीपी विपक्षी एकता की दुहाई भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी दलों का महागठबंधन बनाना चाहती है। लेकिन पहले वह विधानसभा चुनावों में थोड़ी उदारता और समझदारी तो दिखाए। वरना महागठबंधन एक जुमला ही बन कर रह जाएगा। 
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