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देश में चांद जैसी मिट्टी बनाने की तकनीक का इसरो को मिला पेटेंट
Wed, 20 May 2020 10:39 PM IST
अमित कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित कुमार
Updated Wed, 20 May 2020 10:39 PM IST
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इसरो गगनयान
- फोटो : social media
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भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने अपने नाम एक और उपलब्धि दर्ज करा ली है। चंद्रयान-2 अभियान के दौरान इसरो ने देश में ही चांद जैसी मिट्टी बनाई थी। इसी पर लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान का परीक्षण किया गया था। अब भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी को इसका पेटेंट मिल गया है।
मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक 18 मई को भारतीय पेटेंट कार्यालय ने इस तकनीक के लिए पेटेंट दिया। अब यह पेटेंट 20 साल तक के लिए मान्य रहेगा। परीक्षण के लिए देश में ही चंद्रमा जैसी मिट्टी बनाने की तकनीक खोजने में इसरो के शोधकर्ता आई वेणुगोपाल, एसए कन्नण, शामराओ, वी चंद्रबाबू ने अहम भूमिका निभाई थी।
दरअसल चांद और धरती की सतह बिल्कुल अलग है। इसलिए हमें कृत्तिम मिट्टी बनानी पड़ी जो बिल्कुल चांद की सतह जैसी दिखती। अगर यह मिट्टी हमें अमेरिका से खरीदनी पड़ती तो हमें बहुत महंगी पड़ती क्योंकि हमें 70 टन मिट्टी की जरूरत थी। रूस ने भी हमारी मदद करने से इनकार कर दिया था। तमिलनाडु के सालेम में एनॉर्थोसाइट नाम की चट्टानें हैं। यहां की चट्टानों की मिट्टी बिल्कुल चांद की सतह जैसी है। यहीं की मिट्टी लाकर इसरो में चांद की सतह तैयार की गई।
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मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक 18 मई को भारतीय पेटेंट कार्यालय ने इस तकनीक के लिए पेटेंट दिया। अब यह पेटेंट 20 साल तक के लिए मान्य रहेगा। परीक्षण के लिए देश में ही चंद्रमा जैसी मिट्टी बनाने की तकनीक खोजने में इसरो के शोधकर्ता आई वेणुगोपाल, एसए कन्नण, शामराओ, वी चंद्रबाबू ने अहम भूमिका निभाई थी।
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दरअसल चांद और धरती की सतह बिल्कुल अलग है। इसलिए हमें कृत्तिम मिट्टी बनानी पड़ी जो बिल्कुल चांद की सतह जैसी दिखती। अगर यह मिट्टी हमें अमेरिका से खरीदनी पड़ती तो हमें बहुत महंगी पड़ती क्योंकि हमें 70 टन मिट्टी की जरूरत थी। रूस ने भी हमारी मदद करने से इनकार कर दिया था। तमिलनाडु के सालेम में एनॉर्थोसाइट नाम की चट्टानें हैं। यहां की चट्टानों की मिट्टी बिल्कुल चांद की सतह जैसी है। यहीं की मिट्टी लाकर इसरो में चांद की सतह तैयार की गई।
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