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तृणणूल कांग्रेस के सामने पिछली बार जीती छह सीटों को बचाने की चुनौती
Mon, 29 Apr 2019 03:53 AM IST
गौरव द्विवेदी
रीता तिवारी, अमर उजाला, कोलकाता
रीता तिवारी, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Mon, 29 Apr 2019 03:53 AM IST
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ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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पश्चिम बंगाल में चौथे चरण में सोमवार को लोकसभा की जिन आठ सीटों पर मतदान होना है उनमें सत्तारुढ़ तृणणूल कांग्रेस के सामने पिछली बार जीती गई छह सीटों को बचाने की चुनौती है। भाजपा ने पिछली बार इसमें से आसनसोल सीट जीती थी। यह सीट इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तृणणूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी के बीच नाक की लड़ाई बन गई है। कांग्रेस के लिए भी अपनी अकेली बहरमपुर सीट को बचाने की चुनौती है।
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बरहामपुरः मुर्शिदाबाद जिले की यह सीट वाममोर्चा के सहयोगी आरएसपी का गढ़ रही है। वर्ष 1984 को छोड़ कर 1952 से 1998 तक इस सीट पर उसी का कब्जा रहा है। 1999 में कांग्रेस नेता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर चौधरी ने यह सीट जीती थी। उसके बाद वे लगातार यहां पांच बार जीत चुके हैं। आरएसपी ने अबकी यहां ईद मोहम्मद को मैदान में उतारा है जबकि तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ने अपूर्व सरकार व कृष्ण जुआरदार को टिकट दिया है।
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कृषणनगरः नदिया जिले की इस सीट पर पिछली बार तृणमूल के तापस पाल जीते थे। इस बार पार्टी ने उनकी जगह महुआ मित्र को मैदान में उतारा है। उनका मुकाबला भाजपा के कल्याण चौबे से है। कांग्रेस ने यहां इम्तियाज अली शाह को टिकट दिया है और वाममोर्चा ने डॉ. शांतनु झा को।
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रानाघाटः इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस विधायक सत्यजित विश्वास की विधवा पत्नी रूपाली विश्वास तृणमूल के टिकट पर मैदान में हैं। सत्यजित की सरस्वती पूजा के दिन सरेआम गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। भाजपा ने यहां जगन्नाथ सरकार को उम्मीदवार बनाया है और वाममोर्चा और कांग्रेस ने क्रमशः रमा विश्वास और मिनती विश्वास को टिकट दिया है।
आसनसोलः मोदी और ममता के बीच नाक का सवाल
भाजपा के वर्तमान सांसद बाबुल सुप्रियो और तृणमूल की मुनमुन सेन के बीच मुकाबला वाली इस सीट को पीएम मोदी और ममता की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस ने यहां विश्वरूप मंडल को और वाममोर्चा ने गौरांग चटर्जी को मैदान में उतारा है। वर्ष 2014 में बाबुल सुप्रियो ने तृणमूल की डोला सेन को 70 हजार वोटों के अंतर से पराजित किया था। वर्ष 2009 से 2014 के बीच इस सीट पर भाजपा के वोटों में 31.19 फीसदी का जबरदस्त उछाल आया जबकि उसी दौरान तृणमूल के वोटों में 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इस बार खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इलाके में दो-दो रैलियां कर चुके हैं।
पूर्वी बर्दवानः यहां से पिछली बार तृणमूल कांग्रेस के सुनील मंडल जीते थे। इस बार भी वही मैदान में हैं। माकपा के ईश्वर चंद्र दास, भाजपा के परेश चंद्र दास व कांग्रेस के सिद्धार्थ मजुमदार भी यहां किस्मत आजमा रहे हैं।
बर्दवान-दुर्गापुरः भाजपा ने पिछली बार दार्जिलिंग से जीते केंद्रीय मंत्री एस.एस. आहलुवालिया को उम्मीदवार बनाया है। पिछली बार यहां तृणमूल कांग्रेस की मुमताज संघमित्रा चौधरी जीती थीं। वे इस बार भी मैदान में हैं। कांग्रेस ने यहां रंजीत मुखर्जी को मैदान में उतारा है और माकपा ने आभाष राय चौधरी को। बहुजन समाज पार्टी ने भी यहां रामकृष्ण मल्लिक को उम्मीदवार बनाया है।
बोलपुरः बीरभूम जिले की इस सीट पर पिछली बार तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार अनुपम हाजरा ने माकपा नेता रामचंद्र डोम से छीनी थी। हाल में हाजरा को पार्टी-विरोधी गतिविधियों पर तृणमूल से निकाल दिया। उनकी जगह पार्टी ने असित कुमार माल को टिकट दिया है। इस सीट पर भाजपा की ओर से राम प्रसाद दास और माकपा की ओर से रामचंद्र डोम मैदान में हैं।
बीरभूमिः तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार व अभिनेत्री शताब्दी राय जीत की हैट्रिक लगाने के लिए मैदान में हैं। भाजपा ने यहां उनके मुकाबले दूध कुमार मंडल को मैदान में उतारा है। माकपा की ओर से यहां डा. रेजाउल करीम मैदान में हैं। बीरभूम बंगाल की उन चुनिंदा सीटों में शामिल है जहां भाजपा को अपना खाता खुलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तक यहां रैलियां कर चुके हैं।
तृणमूल ने उठाया खली की नागरिकता पर सवाल
तृणमूल कांग्रेस ने पहलवान दिलिप सिंह राणा उर्फ खली की नागरिकता पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखकर भाजपा उम्मीदवार के रोड शो में उनके शामिल होने का विरोध किया है। खली ने जादवपुर से भाजपा प्रत्याशी अनुपम हाजरा के समर्थन में रोड शो किया था। तृणमूल ने आयोग को पत्र में कहा है कि खली अमेरिकी नागरिक हैं। उनको प्रचार की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। भाजपा वोटरों को गुमराह करने के लिए खली का इस्तेमाल कर रही है।