अब निवेशकों की पहली पसंद नहीं रहा महाराष्ट्र, बेरोजगारी के साथ कर्ज का बोझ भी बढ़ा
पिछले साल विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के मामले में महाराष्ट्र अग्रणी राज्य था जबकि इस बार कर्नाटक पहले पायदान पर पहुंच गया है। पिछले साल राज्य में 80 हजार 13 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश आया था जबकि इस साल महज 25 हजार 316 करोड़ रुपये का विदेश निवेश आने का अनुमान लगाया गया है।
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विकसित राज्यों में शुमार महाराष्ट्र के विकास की रफ्तार भी आर्थिक सुस्ती के कारण धीमी पड़ गई है। महाराष्ट्र आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के तहत प्रति व्यक्ति आय के मामले में महाराष्ट्र तीसरे पायदान से खिसककर पांचवे स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, महाराष्ट्र अब निवेशकों की पहली पंसद भी नहीं रहा। बेरोजगारी के साथ ही राज्य पर कर्ज का बोझ भी बढ़ गया है।
राज्य के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में महाराष्ट्र का आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की। इसमें राज्य की आर्थिक वृद्धि दर 2019-20 में 5.7 फीसदी रहने का अनुमान है। हालांकि इस अवधि में देश की विकास दर पांच फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है जबकि पिछले वित्त वर्ष में राज्य की आर्थिक वृद्धि दर 7.5 फीसदी थी। रिपोर्ट में देशभर में प्रति व्यक्ति आय के मामले में हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु के बाद महाराष्ट्र का नंबर है। पिछले साल महाराष्ट्र से केवल कर्नाटक और तेलंगाना ही आगे थे।
विकास दर में 2.7 फीसदी की गिरावट
राज्य की विकास दर में 2.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, कर्ज का बोझ पिछले साल की तुलना में ज्यादा हो गया है। 2018-19 में राज्य पर 4,14,411 करोड़ रुपये का कर्ज था। वहीं, साल 2019-20 में राज्य का कर्ज बढ़कर 4,71,642 करोड़ रुपये हो गया है।
निवेश के मामले में कर्नाटक से पिछड़ा महाराष्ट्र
पिछले साल विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के मामले में महाराष्ट्र अग्रणी राज्य था जबकि इस बार कर्नाटक पहले पायदान पर पहुंच गया है। पिछले साल राज्य में 80 हजार 13 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश आया था जबकि इस साल महज 25 हजार 316 करोड़ रुपये का विदेश निवेश आने का अनुमान लगाया गया है। निवेश में कमी के साथ खर्च में भी वृद्धि का अनुमान है।
गतवर्ष की तुलना में रोजगार भी घटा
महाराष्ट्र में बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है। समीक्षा के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल डेढ़ लाख रोजगार के अवसर घटे है। साल 2018-19 के दौरान राज्य में 73 लाख 50 हजार रोजगार उपलब्ध हो रहे थे जो 2019-20 में घटकर 72 लाख तीन हजार रह गए। राज्य की बेरोजगारी दर बढ़कर 8.3 फीसदी हो गई। जबकि गुजरात में यह दर 4.1 फीसदी, कर्नाटक 4.3 फीसदी और पश्चिम बंगाल में बेरोजगारी दर 7.4 फीसदी है।