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Lok Sabha: सबसे ज्यादा छोटे कद के लोग उत्तर प्रदेश में, लोकसभा में सरकार ने पेश किए आंकड़े

Fri, 26 Jul 2024 06:55 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा झा Updated Fri, 26 Jul 2024 06:55 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश के 46.36 प्रतिशत बच्चे बौनेपन का शिकार, लक्षद्वीप के 13.22 प्रतिशत बच्चे अतिकुषोषित

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Lok Sabha: UP has highest number of short people, govt presented figures in Lok Sabha
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार बच्चों में सबसे अधिक बौनेपन का प्रतिशत उत्तर प्रदेश में निकला है, जो कि 46.36 प्रतिशत है। वहीं लक्षद्वीप के बच्चों में बच्चों में कुपोषण का प्रतिशत सबसे अधिक है, 13.22 प्रतिशत बच्चे गंभीर रूप से कुषोषित हैं। यही नहीं 0-5 वर्ष आयु वर्ग के 17 प्रतिशत बच्चे कम वजन के पाए गए, वहीं बौनेपन का प्रतिशत 36 प्रतिशत और कमजोरी का प्रतिशत 6 प्रतिशत रहा है।
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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने शुक्रवार को लोकसभा में प्रश्नकाल में जून 2024 के महीने के पोषण ट्रैकर के आंकड़े प्रस्तुत किए। इन आंकड़ों के अनुसार 6 साल से कम आयु के बच्चों बौनेपन की प्रवत्ति बढ़ रही है। लगभग 8.57 करोड़ बच्चों को पोषण ट्रैकर के जरिए ट्रैक किया गया। जिसमें सामने आया कि 35 प्रतिशत बच्चे बौने हैं। वहीं 17 प्रतिशत बच्चों का वजन कम मापा गया। वहीं 5 वर्ष से कम आयु के 6 प्रतिशत बच्चे कमजोर पाए गए। वहीं 0-5 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 17 प्रतिशत बच्चे कम वजन के हैं, जबकि 36 प्रतिशत बौने हैं और 6 प्रतिशत कमज़ोर हैं।
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बता दें कि 0-5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में बौने, कमज़ोर और कम वजन कुपोषण के प्रमुख संकेत हैं। कमजोर से तात्पर्य उन बच्चों से है जो अपनी उम्र के हिसाब से बहुत छोटे हैं, जो आमतौर पर दीर्घकालिक कुपोषण के कारण होता है। वहीं कुछ बच्चे अपनी लंबाई के हिसाब से बहुत पतले हैं, जो अक्सर वजन कम होने के कारण तीव्र कुपोषण का संकेत देते हैं। कम वज़न वाले बच्चों का वजन उनकी उम्र के हिसाब से कम होता है। इसमें बौनापन और कमजोरी दोनों शामिल हैं। 
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लोकसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने राज्यवार आंकड़े प्रस्तुत किए। इन आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में बौनेपन की दर सबसे अधिक है। यहां 46.36 प्रतिशत बच्चे बौनापन के शिकार हैं। वहीं दूसरे स्थान पर लक्षद्वीप है, यहां 46.31 प्रतिशत बच्चे बौने हैं। वहीं महाराष्ट्र 44.59 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 41.61 प्रतिशत की बौनेपन दर दर्ज हुई। उन्होंने बताया कि कुपोषण की एक गंभीर निशानी, कमजोरी जो कि लक्षद्वीप में सबसे गंभीर स्थिति में है। यहां 13.22 प्रतिशत बच्चे कुपोषण से प्रभावित हैं। उधर बिहार में 9.81 प्रतिशत और गुजरात में 9.16 प्रतिशत की उच्च कमजोरी दर दर्ज हुई। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह समस्या आमतौर पर अपर्याप्त भोजन या बीमारियों के कारण होता है।

कम वजन वाले बच्चे मध्य प्रदेश में सबसे अधिक है, 26.21 प्रतिशत बच्चे कम वजन वाले दर्ज किए गए। वहीं दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव 26.41 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर हैं। कम वजन वाली सूची में लक्षद्वीप तीसरे स्थान पर रहा, 23.25 प्रतिशत बच्चे यहां कम वजन वाले दर्ज हुए। यह स्थिति चिंताजनक है।


महिला एवं बाल विकास मंत्री ने बताया कि कुछ राज्य अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते हैं। गोवा में सबसे कम स्टंटिंग दर 5.84 प्रतिशत, वेस्टिंग 0.85 प्रतिशत और कम वजन वाले बच्चे 2.18 प्रतिशत दर्ज किए गए हैं। वहीं सिक्किम और लद्दाख में भी तुलनात्मक रूप से कम कुपोषण दर दिखी।
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