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Lok Sabha Election: NCP में फूट के बाद PDA का क्या होगा? कहीं एकजुट होने से पहले ही बिखर न जाए विपक्षी गठबंधन

Mon, 03 Jul 2023 04:50 PM IST
Himanshu Mishra हिमांशु मिश्रा
Updated Mon, 03 Jul 2023 04:50 PM IST
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सार
सवाल है क्या बनने से पहले ही बिखर जाएगा PDA?  इस फूट का विपक्ष की एकता पर कितना और क्या असर पड़ेगा? आइए समझते हैं...   
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Lok Sabha Election: What happen to PDA after split in NCP? opposition alliance disintegrate even before unitin
विपक्षी दल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिछले साल जून-जुलाई में शिवसेना में टूट हुई, अब वैसी ही दरार एनसीपी में भी पड़ चुकी है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने बगावत कर ली। अजित ने महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री का पद भी संभाल लिया है।  इस घटनाक्रम को विपक्षी एकता के लिए बड़ा झटका कहा जा रहा है।


 इस बीच बेंगलुरु में होने वाली विपक्ष की बैठक को भी टाल दिया गया है। ऐसे में सवाल है क्या बनने से पहले ही बिखर जाएगा PDA?  इस फूट का विपक्ष की एकता पर कितना और क्या असर पड़ेगा? आइए समझते हैं...   

 

शिवसेना और एनसीपी में फूट का विपक्षी एकता पर क्या असर पड़ेगा?
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि विपक्षी एकता में इस फूट का दोहरा असर पड़ सकता है। पहला यह कि महाराष्ट्र जैसे ही तोड़फोड़ की बातें बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की विपक्षी पार्टियों में भी होने की लगी है। अगर ऐसा ही मॉडल महाराष्ट्र के बाद बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी लागू होता है तो 2024 के लोकसभा चुनाव में एक ही पार्टी के दो-दो गुट चुनावी मैदान में होंगे। इससे वोटों का बिखराव होगा। जिसका फायदा भाजपा को हो सकता है। 

दूसरा असर यह कि इस टूट के बाद देश की अन्य विपक्षी पार्टियां सतर्क हो गईं हैं। ऐसे में जो दल अब तक विपक्षी गठबंधन में शामिल होने से हिचक रहे थे वो भी अब एक मंच पर आ सकते हैं। अब ये विपक्षी दल अपने अस्तिव को बचाने के लिए लड़ाई लड़ेंगे।  
 

विपक्षी एकता की बैठक का क्या होगा?
बिहार में 23 जून को हुई विपक्ष की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा था कि 11 या 12 जुलाई को शिमला में अगली बैठक होगी। इसके बाद कहा गया कि यह बैठक शिमाल की जगह जयपुर में हो सकती है। हालांकि, बाद में 13-14 जुलाई को बेंगलुरू में बैठक होने की जानकारी दी गई। अब महाराष्ट्र में हुए सियासी घटनाक्रम बाद यह तारीख टाल दी गई है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि अब यह बैठक 17-18 जुलाई को बेंगलुरू में ही होगी।
 

क्या सिर्फ महाराष्ट्र में ही इस तरह की सियासी हलचल है?
महाराष्ट्र के सियासी घमासान के बाद सोमवार को लोजपा (आर) सुप्रीमो चिराग पासवान ने दावा किया कि जल्द ही बिहार की महागठबंधन सरकार टूट सकती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी के कई विधायक और सांसद NDA के संपर्क में है। चिराग पासवान ने कहा कि जिस तरह से मुख्यमंत्री अपने विधायक और सांसदों से मुलाकात कर रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि उन्हें उनकी पार्टी टूटने का डर है। वहीं, भाजपा नेता सुशील मोदी ने भी कुछ इसी तरह की बात कही।  

वहीं, उत्तर प्रदेश में सपा के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने वाले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी सुप्रीमो ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि सपा में भी ऐसी ही टूट हो सकती है। उन्होंने कहा कि सपा के विधायकों को पार्टी में कोई भविष्य नहीं दिख रहा है। जल्द ही कई विधायक पार्टी से अलग होकर सरकार में शामिल हो सकते हैं। 

वहीं, रविवार को केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने दावा किया कि रालोद प्रमुख जयंत चौधरी एनडीए में शामिल होंगे। जयंत को 23 जून को पटना में हुई विपक्ष की बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे।   
 

23 जून की बैठक के बाद विपक्षी गठबंधन के नाम को लेकर थी चर्चा
पटना बैठक में हुई बैठक के बाद बैठक में शामिल विपक्षी दलों के एक महत्त्वपूर्ण सहयोगी ने इशारा किया था कि सत्तारूढ़ एनडीए (नेशनल डेमोक्रैटिक एलायंस) के सामने विपक्ष अपने गठबंधन को पीडीए का नाम दे सकता है। इस पीडीए का विस्तार पेट्रियॉटिक डेमोक्रेटिक एलायंस हो सकता है। इसमें पेट्रियॉटिक शब्द जोड़कर विपक्ष यह बताने की कोशिश कर सकता है कि वे भाजपा से कहीं ज्यादा राष्ट्रवादी हैं।
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