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Lok Sabha Election: 15 विपक्षी दलों के मिलने का क्या होगा असर, भाजपा के लिए कितनी सीटों पर बढ़ेगी चुनौती?

Sat, 01 Jul 2023 05:44 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Sat, 01 Jul 2023 05:44 PM IST
सार

2019 लोकसभा चुनाव में एनडीए के खाते में 352 सीटें आईं थीं, जबकि विपक्ष को 190 सीटें मिली थीं। अगर विपक्ष के 15 दल एकसाथ आ गए तो भाजपा की चुनौतियां करीब 100 सीटों पर बढ़ जाएंगी। ये वो सीटें हैं, जहां 2019 चुनाव में भाजपा ने कुछ सौ से लेकर 50 हजार वोटों तक से जीत हासिल की थी। 
 

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Lok Sabha Election 2024: impact of the meeting of 15 opposition parties and worry for BJP
विपक्षी दलों की बैठक - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

अगले साल लोकसभा चुनाव को लेकर देश में सियासी हलचल तेज हो गई है। एक तरफ विपक्ष की सभी बड़े दल एक बड़ा महागठबंधन करने में जुटे हैं वहीं, दूसरी ओर भाजपा छोटे दलों को अपने साथ करने की कोशिश में है। विपक्ष की पहली बैठक पटना में 23 मई को हो चुकी है। अब दूसरी बैठक 13 और 14 जुलाई को बेंगलुरु में होनी है। 
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विपक्षी एकजुटता को लेकर अब काफी हद तक तस्वीर साफ होने लगी है। करीब 15 विपक्षी दल एकसाथ आ सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर ये सभी 15 विपक्षी दल एकसाथ आ गए तो भाजपा को इससे कितना नुकसान होगा? राजनीति में क्या-क्या बदलाव हो सकता है? आइए समझते हैं...
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Lok Sabha Election 2024: impact of the meeting of 15 opposition parties and worry for BJP
पटना में विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक। - फोटो : अमर उजाला
पहले जानिए पहली बैठक में क्या-क्या हुआ? 
23 जून को पटना में विपक्ष्री दलों की एकजुटता के लिए बैठक हुई थी। इसमें 15 दल शामिल हुए थे। ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान, एमके स्टालिन समेत छह राज्यों के मुख्यमंत्री और पांच राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी भी बैठक में शामिल हुए। बैठक के बाद सभी नेताओं ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सभी दलों ने एकसाथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि भाजपा को हराने के लिए सभी को साथ आने की जरूरत थी। अब ये तय हो गया है। 

Lok Sabha Election 2024: impact of the meeting of 15 opposition parties and worry for BJP
विपक्षी दलों की दूसरी बैठक 13 और 14 जुलाई को बेंगलुरु में होगी। - फोटो : अमर उजाला
विपक्ष की अगली बैठक में क्या-क्या होगा? 
विपक्षी दलों की दूसरी बैठक 13 और 14 जुलाई को बेंगलुरु में होगी। इसका एलान खुद एनसीपी चीफ शरद पवार ने किया। उन्होंने कहा कि इस बैठक में सीट बंटवारे को लेकर चर्चा होगी। इसमें ये भी तय होगा कि कौन सी पार्टी किस राज्य से चुनाव लड़ेगी? लोकसभा चुनाव के मुद्दों और रणनीति पर भी बातचीत होगी।
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Lok Sabha Election 2024: impact of the meeting of 15 opposition parties and worry for BJP
पटना में विपक्षी एकता की बैठक। - फोटो : अमर उजाला
अब जानिए 15 दल मिले तो कितनी सीटों पर बढ़ेगी भाजपा चुनौती? 
2014 में भाजपा ने 282 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा की सहयोगी दलों को मिला लें तो ये आंकड़ा बढ़कर 336 हो गया था। इसके बाद 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एक और बड़ी जीत हासिल की। 2019 में भाजपा को 303 सीटों पर जीत मिली थी। एनडीए के खाते में कुल 352 सीटें आईं थीं। वहीं, यूपीए को केवल 91 सीटों से संतोष करना पड़ा था। 

Lok Sabha Election 2024: impact of the meeting of 15 opposition parties and worry for BJP
बीजेपी की जीत के बाद जश्न मनाते लोग - फोटो : अमर उजाला
2019 में किसे कितनी सीटें मिली थीं? 

एनडीए                352
भाजपा                 303
शिवसेना              18
जेडी(यू)                16
एलजेपी                06
अपना दल            02
अकाली               02
एआईडीएमके    01
अन्य                  04


यूपीए                91
कांग्रेस              52
डीएमके             23
एनसीपी            05
आईयूएमएल      03
जेकेएनसी         03
अन्य               05

अन्य                99
टीएमसी          22
वाईएसआरसीपी 22
बीजेडी              12
बीएसपी            10
टीआरएस        09
एसपी              05
निर्दलीय          03
अन्य              16

इस तरह से एनडीए के खाते में 352 सीटें आईं थीं, जबकि विपक्ष को 190 सीटें मिली थीं। अगर विपक्ष के 15 दल एकसाथ आ गए तो भाजपा की चुनौतियां करीब 100 सीटों पर बढ़ जाएंगी। ये वो सीटें हैं, जहां 2019 चुनाव में भाजपा ने कुछ सौ से लेकर 50 हजार वोटों तक से जीत हासिल की थी। 

अगर ये सभी दल मिलकर चुनाव लड़े तो संभव है कि भाजपा को इससे नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि, इसको लेकर भी दो पहलू हैं। पहला ये कि क्या वाकई में सभी विपक्षी दल एकसाथ लड़ेंगे और दूसरा ये कि क्या इन दलों के कार्यकर्ता और नेता भी एक-दूसरे की मदद करेंगे? 

अगर इन दलों के वोट ट्रांसफर नहीं हुए तो विपक्ष को इसका नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। जैसा कि 2019 में सपा और बसपा के साथ हुआ था। तब बसपा को सपा के वोटर्स का साथ तो मिल गया, लेकिन बसपा का वोट सपा को ट्रांसफर नहीं हो पाया।
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